अध्याय 21
सहकारी कृषि समितिय


291. धारा 78 के खण्ड (क) तथा (ख) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और किसी समिति के निबन्धन के सम्बन्ध में पूर्ववर्ती नियमों में निर्धारित अपेक्षाओं के अतिरिक्त सहकारी कृषि समिति के निबन्धन के लिये प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित होंगे --
(क) अधिकार-अभिलेख के उद्धरण जिसमें प्रत्येक ऐसे प्रार्थी जो धारा 77 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन भूमि समुच्चय करना चाहता हो, द्वारा समस्त धृत भूमि की अभिलिखित गाटा संख्यायें तथा कुल क्षेत्रफल दिया गया होः
(ख) समिति के निबन्धक के सम्बन्ध में प्रपत्र सं0 कृ0 1 तीन प्रतिलिपियों में संसचूना जिसमें धारा 77 की उपधारा (1) खण्ड (1) के अधीन समुच्चय की जाने वाली भूमि का ब्यौरा दिया गया है?
(ग) प्रस्तावित समिति के प्रक्षेत्र (फार्म) के नक्शे की दो प्रतिलिपियां जिनमें गाटों (प्लाट्स) की खसरा संख्यायें तथा प्रक्षेत्र की सीमायें निर्दिष्ट हों, तथा
(घ) निबन्धक द्वारा अपेक्षित कोई अन्य लेख्य या विवरण।
292. यदि सहकारी कृषि समिति धारा 77 के अधीन निबद्ध हो तो निबन्धक, धारा 77 की उपधारा (2) के अधीन कलेक्टर को निबन्धन प्रमाण पत्र की एक प्रतिलिपि प्रेषित करते समय निम्नलिखित भी भेजेगा -
(क) नियम 291 (ख) में अभिदिष्ट लेख्य की एक प्रतिलिपि तथा
(ख) कोई भी अन्य सूचना विवरण या लेख्य जिन्हें निबन्धक आवश्यक समझे।
293. नियम 292 के अधीन निबन्धक से निबन्धन प्रमाण पत्र तथा अन्य लेखों की प्रतिलिपियां प्राप्त होने पर कलेक्टर--
1. सम्बद्ध अभिलेखों में इस आशय की कि सदस्यों द्वारा समिति को अंशदत्त भूमि सहकारी कृषि समिति के कब्जे नियन्त्रण तथा प्रबन्ध में है, तथा
2. सहकारी कृषि समिति क रजिस्टर में प्रपत्र सं0 कृ0 2 में प्रविष्ट करायेगा।
294. जब सहकारी कृषि समिति निबन्धक के पश्चात् कोई नया सदस्य बनाये तो समिति उक्त सदस्य के सम्बन्ध में निबन्धक को -
(1) नियम 291 (क) के अधीन अपेक्षित विवरण तथा
(2) ऐसा सदस्य बनाये जाने के समिति के संकल्प को दो प्रमाणित प्रतिलिपियों के साथ, प्रपत्र सं0 कृ0 (1) (क) में विवरण पत्र की तीन प्रतिलिपियां भेजेगी।
निबन्धक संकल्प की तथा इस नियम के उपखण्ड (2) में अभिदिष्ट सदस्य के विवरण पत्र की एक प्रतिलिपि कलेक्टर को नियम 293 के अधीन यथाव्यवस्थित कार्यवाही के लिये भेजेगा।
295. अन्य नियमों के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक सहकारी कृषि समिति, प्रत्येक सहकारी वर्ष के अन्त में निबन्ध को यदि उसके द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाये, निम्नलिखित प्रस्तुत करेगी --
(क) वर्ष में बनाये गये सदस्यों द्वारा अंशदत्त भूमि तथा वर्ष में समिति द्वारा अन्यथा प्राप्त भूमि के ब्यौरे,
(ख) समिति द्वारा धृत भूमि का नवीनतम नक्शा।
296. (क) सहकारी कृषि समिति धारा 79 की उपधारा (3) के उपबन्धों के अधीन, किसी भूमिधर सदस्य को यहां नीचे उल्लिखित किसी भी एक या अधिक कारणों के आधार पर उसके द्वारा समिति को अंशदान की गई भूमि का, वसीयत से भिन्न कोई अन्य संक्रमण करने की अनुज्ञा दे सकता है-
(1) यदि वह अपनी शारीरिक या मासिक अंशक्ता के कारण भूमि न जोत सके,
(2) यदि उसे अपने ऐसे ऋण चुकाना हो, जिन्हें वह अन्यथा न चुका सकता हो और वह ऋण उसके द्वारा समिति को भूमि का अंशदान करने के पूर्व लिया गया हो,
(3) यदि वह समिति के प्रक्षेत्र के स्थान से बहुत दूर ऐसे स्थान पर रहना चाहता हो जह से वह समिति के प्रक्षेत्र पर कृषि कार्यो में भाग न ले सकता हो,
(4). यदि वह कृषि से भिन्न कोई वृत्ति करना चाहता हो, तथा

(5) समिति के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति और निबन्धक के अनुमोदन से किसी कारण के आधार पर:
प्रतिबन्ध यह है कि केवल तभी अनुज्ञा दी जायेगी जब प्रस्तावित संक्रामिति समिति का सदस्य होने के लिये अर्ह है और उसने सदस्यता के लिये प्रार्थना-पत्र भी दे दिया है:
(ख) यदि सहकारी कृषि समिति स्वयं ऐसे भूमिधर सदस्य की भूमि क्रय करना चाहती हो जो अपनी भूमि उपनियम (क) के अधीन निस्तारित करना चाहती हो, तो समिति, उक्त भूमिधर सदस्य और समिति के बीच समस्त मूल्य पर ऐसा करने की हकदार होगी
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक के पूर्व अनुमोदन से बिना कोई भी भूमि उपनियम (ग) में निर्धारित रीति से गणना की गई धनराशि से अधिक मूल्य पर क्रय नहीं की जायेगी;
(ग) भूमिधर सदस्य की भूमि के मूल्य की गणना निम्नलिखित रीति से की जायेगी -
यह (मूल्य) ऐसी भूमि की मौरूसी दरों के मूल्यांकन के पैंतीस गुने के या देय भू-राजस्व के सत्तर गुने के, इसमें जो भी अधिक हो, बराबर होगा:
प्रतिबन्ध यह है कि यदि भू-राजस्व मौरूसी दरों पर मूल्यांकन की धानराशि से कम ह तो भी राजस्व और मूल्यांकन के बीच के अन्तर के दस गुने के बराबर धनराशि मूल्य की धनराशि में बढ़ाई जायेगी।
297. (1) यदि कोई व्यक्ति सहकारी का सदस्य न रह जाये तो ऐसे बहिर्गामी सदस्य द्वारा अंशदान की गयी, किन्तु धारा 82 में दिये गये कारणों से जो भूमि सदस्य को लौटाई न गई हो भूमि का मूल्य, समिति की भूमि से, भूमि के विनिमय अथवा उक्त बर्हिगामी सदस्य को प्रतिकर का भगुतान करने के प्रयोजनो के लिये वह धनराशि होगी जो बहिर्गामी सदस्य तथा कृषि समिति के बीच तय हुई हो।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि परस्पर धनराशि उपनियम (2) में निर्धारित रीति से गणना की गई धनराशि से अधिक हो, तो यथास्थिति भूमि के विनियम मे नकद प्रतिकर के भुगतान के पूर्व निबन्धक को स्वीकृति आवश्यक होगी।
(2) उपनियम (1) के प्रयोजन के लिये भूमिधारी भूमि का मूल्य ऐसी भूमि के सम्बन्ध में मौरूसी दरों पर मूल्यांकन की धनराशि का पैंतीस गुना या देय भू-राजस्व की धनराशि का सत्तर गुना, इसमें जो भी अधिक हो और सीरदारी भूमि की दशा में, यह ऐसे मूल्यांकन की धनराशि का पन्द्रह गुना होगा।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि भूमिधारी या सीरदारी भूमि के सम्बन्ध में दिया जाने वाला भू-राजस्व मौरूसी दरों पर मूल्यांकन से कम हो तो भूमिधारी भूमि की दशा में मूल्यांकन और भू-राजस्व के बीच के अन्तर के दस गुने तथा सीरदार भूमि की दशा में ऐसे अन्तर कांच गुने के बराबर धनराशि, मूल्य में बढ़ाई जायेगी।
298. यदि सहकारी कृषि समिति, समिति के सदस्य से भिन्न व्यक्ति से समिति के प्रक्षेत्र से प्रासन्न कृषि योग्य भूमि क्रय करना चाहे तो वह उसे सम्बन्धित भूमिधर तथा समिति के बीच समस्त मूल्य पर क्रय कर सकती हैं
प्रतिबन्ध यह है कि यदि उक्त भूमिधर तथा समिति के बीच समस्त मूल्य, की नियम 297 के उपनियम (2) में व्यवस्थित रीति से गणन की गयी धनराशि से अधिक हो तो क्रय के पूर्व निबन्धक की स्वीकृति आवश्यक होगी।
299. धारा 84 की उपधारा (2) के अधीन कोई सहकारी कृषि समिति अपने द्वारा धारित भूमि की चकबन्दी के लिये प्रार्थना पत्र प्रपत्र सं0कृ0 3 में होगी।
300. नियम 299 के अधीन प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर, सहायता कलेक्टर ग्राम के शेष खातेदारों को एक नोटिस जारी करेगा, जिसमें उससे नोटिस की प्राप्ति के दिनांक से एक माह के भीतर यह कारण बताने की अपेक्षा की जायेगी कि क्यों न चकबन्दी जिसके लिये समिति द्वारा प्रार्थना-पत्र दिया गया है, कर दी जाये। यदि आपत्तियों की यदि कोई हो, सुनवाई करने के पश्चात् सहायक कलेक्टर यह समझे कि चकबन्दी इष्टकर नहीं है तो वह उसके कारणों को अभिलिखित करेगा और चकबन्दी का प्रार्थना पत्र अस्वीकार कर देगा। किन्तु यदि प्रार्थना पत्र अस्वीकार करने के लिये उचित कारण न हों तो वह ग्राम की भूमि प्रबन्ध कमेटी के आदेश के दिनांक से तीन माह के भीतर भूमि की चकबन्दी के लिये प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निदेश देगा।
301. लेखपाल और सम्बन्धित सहकारी कृषि समिति के अध्यक्ष की सहायता से भूमि प्रबन्धक कमेटी ऐसे सभी क्षेत्रों का जिनके विनियम की सम्भावना हो, प्रथम मूल्यांकन खसरा प्रपत्र सं0कृ0 4 में तैयार करेगी। यदि उस भूमि पर जिसके विनिमय की सभ्मावना हो, कोई वृक्ष हो, तो उसका मूल्यांकन खसरा के अभ्ययुक्ति स्तम्भ में लिखा जायेगा।
302. भूमि प्रबन्धक कमेटी नियम 301 के अधीन तैयार किए गये मूल्यांकन खसरा की सहायता से प्रपत्र सं0 कृ0 5 में चकबन्दी प्रस्ताव ऐसी रीति से तैयार करेगी कि लगभग समान मूल्य की भूमि विनिमय की जाये।
303. चकबन्दी प्रस्ताव तीन प्रतियों में सहायक कलेक्टर को प्रस्तुत किये जायेंगे। प्रस्तावों के साथ मूल्यांकन खसरा और भूमि के नक्शे की दो प्रतियां होगी, जिसमें से एक नक्शे में सहकारी कृषि समिति का प्रक्षेत्र, जैसे वह चकबन्दी के पूर्व हो, दिखाया जायेगा और दूसरे नक्शे में चकबन्दी प्रस्ताव के अनुसार स्थिति दिखाई जायेगी।
304. यदि भूमि प्रबन्धक समिति, नियम 303 में निर्दिष्ट समय के भीतर चकबन्दी प्रस्ताव प्रस्तुत न करे तो सहायक कलेक्टर सम्बन्धित तहसीलदार को यह निदेश देगा कि वह उक्त प्रस्ताव अपने पर्यवेक्षण में तैयार कराये और ऐसा निदेश उसे प्राप्त होने के दिनांक से तीस दिन के भीतर सहायक कलेक्टर को प्रस्तुत करें। सम्बन्धित तहसीलदार ऐसे निदेशों का अनुपालन करेंगा।
305. नियम 303 या नियम 304 के अधीन चकबन्दी प्रस्ताव प्राप्त होने पर सहायक कलेक्टर एक उदृघोषण जारी करेगा जिसमें वह उदृघोषण जारी किये जाने के दिनांक से तीस दिन क भीतर चकबन्दी प्रस्ताव के सम्बन्ध में आपत्तियां आमान्त्रित करेगा। प्रस्ताव की एक प्रति के साथ उदृघोषण की एक प्रति सहायक कलेक्टर के न्यायालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकायी जायेगी और इसी प्रकार दूसरी प्रति उस ग्राम में जहां पर सहकारी कृषि समिति का प्रक्षेत्र स्थिति हो, किसी प्रमुख स्थान पर चिपकायी जायेगी। उदृघोषणा की एक प्रति कृषि समिति पर भी तामील की जायेगी।
306. उदृघोषणा में निश्चित अवधि की समाप्ति पर, सहायक कलेक्टर आपत्तियों की यदि कोई हो, सुनवाई करेगा और निर्णय देगा और धारा 84 के उपबन्ध के अधीन रहते हुये भूमि की चकबन्दी के लिये अन्तिम आदेश देगा।
307. चकबन्दी का आदेश, आदेश के ठीक बाद में फसली वर्ष के प्रारम्भ से लागू होगा। उन दशाओं में, जिनमें धारा 84 की उपधारा (4) के अधीन प्रतिकर का भुगतान किया जाना हो, चकबन्दी के लिये सहायक कलेक्टर का आदेश तक प्रभावी न होगा जब तक कि प्रतिकर का भुगतान न कर दिया जाये।
308. ऐसी स्थिति में जब कोई ऋण भार विनिमय की जाने वाली भूमि से संलग्न हो तो सहायक कलेक्टर यह निदेश देगा कि उक्त ऋण भार उसे उन्मुक्त करने के लिये उत्तरदायी खातेदार द्वारा प्राप्त की जाने वाली भूमि से संलग्न होगा।
309. नियम 15 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सहकारी कृषि समिति की उपविधियों में निम्नलिखित की भी व्यवस्था की जायेगी-
(1) सदस्यों द्वारा भूमि, निधियों और अन्य सम्पत्ति का अंशदान, उनका मूल्यांकन और समायोजन;
(2) समिति के प्रक्षेत्र पर कार्य करने वाले सदस्यों को दिया जाने वाला पारिश्रमिक, और मजदूरी;
(3) समिति के प्रक्षेत्र सम्बन्धी व्ययों और अन्य व्ययों का भुगतान;
(4) समिति की उपज का विवरण ; और
(5) समिति प्रक्षेत्र के कार्यकलापों और कार्यो का संचालन।
310. कोई सहकारी कृषि समिति, निम्नलिखित शर्तो के अधीन रहते हुये, धारा 86 के अधीन भूमि का कब्जा बिना बन्धक पर ऋण ले सकती है -
(1) जिस प्रयोजन के लिये ऋण लिया जाये वह ऐसा हो जिससे कि समिति और उनके सदस्यों को सम्मिलित रूप से लाभ हो, या उसके कृषि-उत्पादन में वृद्धि होने की अथवा मिटट के गुण का ास या अपक्षय रोकने की बहुत सम्भावना हो अथवा बाढ़ की रोकथाम हो सकती हो,
(2) ऐसे ऋण का प्रस्ताव समिति के सामान्य निकाय द्वारा अंगीकृत और निबन्धक द्वारा स्वीकृति कर लिया गया हो, और
(3) बन्धक रखने के लिये जिन सदस्यों का प्राधिकार प्राप्त किया जाना हो वे खण्ड (2) में अभिदिष्ट प्रस्ताव के सम्बन्ध में और ऐसे प्रपत्र में जो निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट किया जाये, लिखित रूप से अलग-अलग सहमत हो। ऐसा प्राधिकार किसी राजपत्रित अधिकारी या सहकारी विभाग के किसी अधिकारी द्वारा जो वर्ग 2 के निरीक्षक की श्रेणी के नीचे का न हो, अभिप्रमाणित किया जायेगा और वह अपने हस्ताक्षर के नीचे मुहर लगायेगा।
311. नियम 162 के अधीन किसी सहकारी कृषि समिति के किसी सदस्य को देय बोनस नकदी में या वस्तु के रूप में अथवा आंशिक रूप से नकदी में और आंशिक रूप से वस्तु के रूप में और एकमुश्त या किस्त में दिया जा सकता है और यदि कोई सदस्य समिति का ऋण हो तो बोनस के प्रति समायोजित किया जा सकता है।