अध्याय 22
अभिनिर्णयों, डिक्रियों, आदेशों तथा निर्णयों का निष्पादन


312. (क) प्रत्येक डिक्रीधारी जो धारा 92 के खण्ड (ख) के उपबन्धों के अधीन किसी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन की अपेक्षा करें, उस प्रत्यादान अधिकारी को, जिसका क्षेत्राधिकार उस क्षेत्र पर हो जिसमें निर्णीत-ऋणी रहता हो, या उसकी सम्पत्ति हो, प्रार्थना पत्र देगा और निष्पादन का सम्भाव्य व्यय, जो ऐसे प्राधिकारी द्वारा निश्चित किया जाये, जमा करेगा।
(ख) प्रत्येक ऐसा प्रार्थना पत्र निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट प्रपत्र में दिया जायेगा और उस पर डिक्रीधारी हस्ताक्षर करेगा। डिक्रीधारी यह इंगित कर सकता है कि क्या वह उसके पास बन्धक रखी गयी अचल सम्पत्ति यदि कोई है या अन्य अचल सम्पत्ति के विरूद्ध कार्यवाही करना चाहता है अथवा चल सम्पत्ति की कुर्की चाहता है। यदि वह अचल सम्पत्ति के विरूद्ध कार्यवाही करना चाहे तो प्रार्थना पत्र में ऐसी सम्पत्ति के ब्यौरे देगा जो उसकी पहचान के लिये पर्याप्त हो। यदि ऐसी सम्पत्ति किसी अधिकार अभिलेख, बन्दोबस्त या सर्वोक्षण में दी हुई सीमाओं या संख्याओं से पहचानी जा सके तो ऐसी सीमाओं या संख्याओं को विशिष्ट और ऐसी सम्पत्ति में निर्णीत ऋणी का अंश या हित प्रार्थना पत्र में दिये जायेंगे।
(ग) ऐसा प्रार्थना पत्र होने पर, प्रत्यादान अधिकारी, निबन्धक के कार्यालय में अभिलेखों से, यदि कोई हो, प्रार्थना पत्र में दिये गये ब्यौरों की शुद्धता की जांच करेगा और निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट प्रपत्र में, दो प्रतियों में मांग का नोटिस तैयार करेगा अथवा तैयार करायेगा जिसमें वह निर्णीत ऋणी का नाम और देय धनराशि लिखेगा और उसे विक्रय अधिकरी के पास भेज देगा। मांग के नोटिस में व्यय भी यदि कोई हो, सम्मिलित होगा और यह भी अपेक्षा की जायेगी कि भुगतान निर्दिष्ट दिनांक तक कर दिय जाये। ऐसा न करने पर उक्त अचल सम्पत्ति यथास्थिति कुर्क कर ली जायेगी और बेच दी जायेगी या कुर्क किये बिना बेच दी जायेगी।
प्रतिबन्ध यह है कि प्रत्यादान अधिकारी का यह समाधान हो जाये कि निर्णत-ऋणी अपने विरूद्ध निष्पादन कार्यवाहियों में विलम्ब करने या बाधा पहुचाने के अभिप्राय से अपनी सम्पूर्ण सम्पत्ति या उसके किसी भाग का निस्तारण करने वाला है अथवा उसे प्रत्यादान अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से हटाने वाला है तो निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति, मांग की नोटिस में दिये गये समय के हते हुए भी, तुरन्त कुर्क कर ली जायेगी।
313. निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति के विरूद्ध इस प्रकार कार्यवाही की जायेगी, जैसा कि नियम 312 के अधीन डिक्रीधारी द्वारा दिये गये आवेदन पत्र में प्रार्थना की गई हो और यदि उक्त आवेदन पत्र में इसका उल्लेख न किया गया हो कि उक्त सम्पत्ति कि विरूद्ध किस प्रकार कार्यवाही की जाये तो साधारणतया निष्पादन निम्नलिखित रीति से किया जाना चाहिये -
(1) सबसे पहले निर्णीत ऋणी की चल सम्पत्ति के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी, किन्तु साथ ही साथ उस दशा में जब कि चल सम्पत्ति से प्राप्त धनराशि डिक्रीधारी के कुल दावों के पूर्ण रूप से पूरा करने में पर्याप्त न होने की सम्भावना हो तो इससे अचल सम्पत्ति के विरूद्ध कार्यवाही करने में कोई बाधा नहीं पडे़गी।
(2) यदि कोई अचल सम्पत्ति न हो या यदि कुर्क की गई और बेची गई चल सम्पत्ति या सम्पत्तियों की बिक्री से प्राप्त धनराशि डिक्रीधारी से दावे को पूर्णतः पूरा करने के लिये अपर्याप्त हो तो डिक्रीधारी को बन्धक रखी गई अचल सम्पत्ति या निर्णीत ऋणी के किसी अन्य अचल सम्पत्ति के विरूद्ध कार्यवाही की जा सकेगी।


 

विशिष्ट चल सम्पत्ति जिसके अन्तर्गत खेत की
फसलें भी हैं की कुर्की और बिक्री


314. विक्रय अधिकारी, डिक्रीधारी, की पूर्व सूचना के पश्चात् यथास्थिति उस स्थान पर जायेगा जहां पर निर्णीत ऋणी रहता है या जहां पर कुर्की की जाने वाली सम्पत्ति हो, जैसी स्थिति हो, और नियम 312 के उपनियम (ग) के अधीन जारी किये गये मांग नोटिस को निर्णीत ऋणी पर, यदि वह मिले तामील करेगा। यदि मांग नोटिस निर्णीत ऋणी पर तामील किया जा चुका हो और वह मांग नोटिस की देय धनराशि का भुगतान न करे तो, विक्रय अधिकारी चल सम्पत्ति की कुर्की करेगा और निर्णीत ऋण को कुर्की की गई सम्पत्ति की सूची या तालिका तुरन्त देगा और उस स्थान, दिनांक तथासमय की जहां और जब कुर्की की गई सम्पत्ति बेची जायेगी यदि देय धनराशि का भुगतान उस दिनांक से पूर्व न कर दिया जाये, सूचना देगा। यदि निर्णीत ऋणी न मिले तो विक्रय अधिकारी उक्त मांग नोटिस को उसके परिवार के किसी व्यस्क पुरूष सदस्य पर या निर्णीत ऋणी के प्राधिकृत एजेन्ट पर तामील करेगा और जब मांग नोटिस इस प्रकार तामील न की जा सके तो विक्रय अधिकारी उस मांग नोटिस की एक प्रति निर्णीत ऋणके निवास स्थान के किसी ध्यानाकर्षी भाग पर चिपका देगा। वह तब कुर्की की कार्यवाही करेगा और कुर्की की गई सम्पत्ति की सूची या तालिका उस स्थान पर चिपकायेगा जहां कि निर्णीत ऋण सामान्यतया रहता हो और उस पर वह स्थान, जहां सम्पत्ति जमा की जाये या रखी जाये और वह स्थान दिनांक और समय भी लिखे जहां और जब बिक्री की जायेगी।
315. कुर्की कर लेने के पश्चात्, विक्रय अधिकारी, कुर्क सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिये डिक्रीधारी के साथ या अन्यथा प्रबन्ध कर सकता है। यदि कुर्क सम्पत्ति पशुधन हो तो वह व्यक्ति जिसकी अभिरक्षा में पुशधन रखा गया हो उसके लिये उत्तरदायी होगा      तथा ऐसे   भरण पोषण के व्यय निर्णीत ऋणी पर भारणीय होगें। विक्रय अधिकारी निर्णीत ऋणी या किसी ऐसे व्यक्ति के अनुरोध पर जो ऐसी सम्पत्ति में हित का दावा करे, उस (सम्पत्ति) की उसी मांग या स्थान में जहां वह कुर्क की गई हो-ऐसे निर्णीत ऋणी या व्यक्ति के प्रभार में छोड़ देगा यदि वह निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट प्रपत्र में एक या अधिक प्रतिभूतियों के साथ (जो भी पर्याप्त समझे जाये) मांगने पर सम्पत्ति प्रस्तुत करने के लिये जमानत दे)
316. नियम 314 या 315 के अन्तर्गत कोई भी कुर्की सूर्योदय के पूर्व तथा सर्यास्त के पश्चात् नहीं की जायेगी।
317. अत्यधिक कुर्की नहीं की जायेगी अर्थात कुर्क की गई सम्पत्ति की मूल्य कुर्की और विक्रय से भी प्रासंगिक व्ययों को मिलाकर निर्णीत ऋणी द्वारा ब्याज सहित देय धनराशि के सामान्यतया 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
318. यदि निर्णीत ऋणी की भूमि की फसल या इकट्ठा न की गई उपज कुर्क की जाये तो विक्रय अधिकारी उसे उस समय बिकवा सकता है, जब वह कटाई के या इकट्ठा  करने के योग्य हो, या अपने विकल्प पर निर्णीत ऋणी के खर्चे पर उचित मौसम में उसकी कटाई करा सकता है और बिक्री होने तक उसे उचित स्थान पर रखवा सकता है।
319. विक्रय अधिकारी के लिये किसी अस्तबल, गोशाला, खत्ती, गोदाम, बर्हिगृह (आउट हाउस) या अन्य भवन को जबरदस्ती खोलना वैध होगा और वह किसी ऐसे निवास गृह के किसी भी कमरे के द्वारा को निर्णीत ऋणी की, उसमें रखी सम्पत्ति को कुर्क करने के प्रयोजनार्थ, तोड़ सकती है:
प्रतिबन्ध सदैव यह है कि तत्पश्चात् की गई व्यवस्था के सिवाय उक्त अधिकारी द्वारा ऐसे निवास गृह के जनाने कक्ष या महिलाओं द्वारा रहने के काम में लाये जाने वाले कक्ष को जबरदस्ती खोलना या उसमें प्रवेश करना वैध न होगा।
320. यदि विक्रय अधिकारी के पास यह मान लेने का कारण हो कि किसी निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति ऐसे निवास गृह में हो जिसका बाहरी द्वार बन्द हो या महिलाओं के लिये निर्धारित किसी भी ऐसे कक्ष में रखी है, जो रूढ़ि या प्रथा से वैयक्तिक समझे जाते है, तो विक्रय अधिकारी इस तथ्य की सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को देगा। ऐसी सूचना पर उक्त स्टेशन का प्रभारी अधिकारी किसी पुलिस अधिकारी को उस स्थल पर भेजेगा जिसकी उपस्थिति में विक्रय अधिकारी ऐसे निवास गृह के बाहरी द्वार को उसी रीति से जबरदस्ती खोल सकता है। जिस प्रकार वह गृह के भीतर जनाने कक्ष से भिन्न, किसी भी कमरे के द्वार को तोड़ सकता है। विक्रय अधिकारी जनाने कक्ष के भीतर ही महिलाओं को हटने का यथाविधि नोटिस देने के पश्चात् और उचित रीति से उनके हटने के साधन प्रस्तुत करने के पश्चात् यदि वे ऐसी महिलायें हों जो रूढ़ि या प्रथा के अनुसार परदे से बाहर न आती हों, जनाने कक्षों में, निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति कुर्क करने करने के प्रयोजनार्थ यदि कोई वहां रखी गयी हो, किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में प्रवेश कर सकता है, किन्तु यदि ऐसी सम्पत्ति पायी जाये, तो वह तुरन्त ऐसे कक्षों से हटायी जायेगी और उसके बाद उन कक्षों को पहले की तरह इस्तेमाल के लिये छोड़ दिया जायेगा।
321. विक्रय अधिकारी बिक्री के पूर्ववर्ती दिनांक तथा बिक्री के दिनांक को उस गांव में जहां निर्णीत ऋणी रहता है तथा ऐसे अन्य स्थान या स्थानों में जिसमें प्रत्यादान अधिकारी बिक्री का उचित विज्ञापन करना आवश्यक समझे, की जाने वाली अभिप्रेत बिक्री के समय तथा स्थान की घोषणा डुग्गी पिटवाकर करा सकता है। अभिप्रेत बिक्री का दिनांक नियम 314 में निर्धारित रीति से बिक्री नोटिस तामील करने या चिपकाये जाने के दिनांक से पन्द्रह दिन व्यतीत होने के पूर्व नहीं होगा:
प्रतिबन्ध यह है कि यदि अभिग्रहीत सम्पत्ति शीध्र और स्वाभाविक रूप से नष्ट होने वाली हो या उसे अभिरक्षा में रखने का व्यय उसके मूल्य से अधिक होने की सम्भावना हो तो अपेक्षाकृत कोई ऐसा पहले का दिनांक निश्चित किया जा सकता है जब विक्रय अधिकारी धनराशि का उसके पूर्व भुगतान न किये जाने की दशा में बेच सकेगा।
322. नियम 321 के अधीन निश्चित समय पर सम्पत्ति एक या एक से अधिक ढेरियों में, जैसा विक्रय अधिकारी उचित समझे रखी जायेगी और सबसे ऊंची बोली बोलने वाले को बेची जायेगी:
प्रतिबन्ध यह है कि विक्रय अधिकारी को प्रस्तुत मूल्य अनावश्यक रूप के कम प्रतीत होने या अन्य कारणों से उच्चतम बोली को अस्वीकार करने का अधिकार होगा यदि सम्पत्ति देय धनराशि से अधिक मूल्य पर बिके तो ब्याज आदेशिका के व्यय तथा अन्य व्ययों को काटकर, ऐसी अधिक धनराशि निर्णीत ऋणको भुगतान की जायेगी।
प्रतिबन्ध यह भी है कि प्रत्यादान अधिकारी या विक्रय अधिकारी, स्वमति से, उसे किसी निर्दिष्ट दिनांक तथा समय के लिये स्थगित कर सकता है और ऐसे स्थगन के अपने कारणों को अभिलिखित करेगा। यदि ऐसी स्थगित बिक्री सात दिनांक से अधिक अवधि के लिये हो तो नियम 321 के अनुसार नवीन घोषणा की जायेगी, जब तक कि निर्णीत ऋणी उसको अधित्याग करने की सहमति न दे दे।
323. बिक्री के समय सम्पत्ति के लिये भुगतान नकदी में किया जाये और क्रेता का सम्पत्ति का कोई भी भाग ले जाने की अनुज्ञा तब तक नहीं की जायेगी जब तक कि उसके लिये वह पूरा भुगतान न कर दे। यदि क्रेता क्रय की धनराशि भुगतान करने में चूक करे तो सम्पत्ति की पुनः बिक्री की जायेगी।
324. यदि इस नियमावली के अधीन कुर्क कोई सम्पत्ति किसी व्यक्ति द्वारा बलपूर्वक या गुप्त रूप से हटाई गई हो तो विक्रय अधिकारी ऐसी सम्पत्ति की वापसी के लिये क्षेत्राधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र दे सकता है। यदि मजिस्ट्रेट का प्रार्थना पत्र में कथित तथ्यों को सत्यता के विषय में समाधान हो जाये तो वह विक्रय अधिकारी को ऐसी सम्पत्ति लौटाये जाने का आदेश दे सकता है।
325. यदि बिक्री से पहले निर्णीत ऋणी या उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति अथवा कुर्क की गयी सम्पत्ति मे हित का दावा करने वाला कोई व्यक्ति ब्याज सहित देय पूर्ण धनराशि का तथा सम्पत्ति कुर्क करने में उपगत अन्य व्ययों का भुगतान कर दे तो विक्रय अधिकारी तुरन्त कुर्की का आदेश निरस्त करेगा और सम्पत्ति को मुक्त कर देगा।
326. धारा 39 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए चल सम्पत्ति जो सिविल प्रक्रिया संहिता (कोड आफ सिविल प्रोसीजर, 1908)(1908 की संख्या 5) की धारा 60 के अधीन कुर्की किये जाने से मुक्त है इस नियमावाली के अधीन न तो कुर्क की जा सकेगी और न बेची जा सकेगी।
 


अन्य चल सम्पत्तियों की कुर्की


327. यदि कुर्क की जाने वाली चल सम्पत्ति, सरकार या रेलवे या किसी स्थानीय अधिकारी या किसी सहकारी समिति के किसी अधिकारी या सेवक का वेतन या भत्ता या मजदूरी हो तो प्रत्यादान अधिकारी, विक्रय अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त होने पर आदेश दे सकता है कि धनराशि, सिविल प्रक्रिया संहित (कोड आफ सिविल प्रोसीजर, 1908) (1908 की संख्या 5) की धारा 60 के उपबन्धों के अधीन रहते हुये ऐसे वेतन या भत्ते या मजदूरी में से या तो एक बार के भुगतान से या मासिक किस्तों में जैसा उक्त प्रत्यादान अधिकारी निदेश दे, रोक ली जाये और ऐसे आदेशों का नोटिस मिलने पर ऐसा अधिकारी या अन्य व्यक्ति, जिसका कार्य ऐसे वेतन, भत्ता या मजदूरी का विवरण करना हो, उक्त धनराशि रोक लेगा तथा विक्रय अधिकारी को, यथास्थिति आदेश के अधीन देय धनराशि या मासिक किस्त भेज देगा।
328. यदि कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति निर्णीत ऋणी का किसी ऐसी चल सम्पत्ति में अंश या हित हो जो निर्णीत ऋणी तथा किसी अन्य व्यक्ति के सहस्वामित्व में हो तो कुर्की निर्णीत ऋणी को अपने अंश या हित का संक्रमण करने या उसे पारित करने या किसी भी प्रकार से उसमें परिवर्तन करने से निषिद्ध करने को नोटिस देकर की जायेगी।
329. यदि कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति कोई संक्राम्यकरण पत्र हो, जो न तो किसी न्यायालय में जमा हो ओर न ही किसी लोक अधिकारी की अभिरक्षा में रखा गया हो, तो कुर्की वास्तविक अभिग्रहण द्वारा की जायेगी और उक्त कारण पत्र कुर्की का आदेश देने वाले प्रत्यादान अधिकारी के कार्यालय में लाया जायेगा जहां वह उसके अगले आदेश दिये जाने के अधीन रखा जायेगा।
330. यदि कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति किसी न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में हो तो कुर्की, ऐसे न्यायालय या अधिकारी को नोटिस देकर की जायेगी जिसमें यह प्रार्थना की जायेगी कि उक्त सम्पत्ति तथा कोई ब्याज या लाभांश की, जो उस पर देय हो गये हो, नोटिस जारी करने वाले प्रत्यादान अधिकारी के अगले आदेश दिये जाने के अधीन रहते हुये रोक लिया जाये।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि ऐसी सम्पत्ति किसी अन्य जिले के न्यायालय का प्रत्यादान अधिकारी की अभिरक्षा में हो, तो डिक्रीधारी तथा निर्णीत ऋणी से किसी भी अन्य व्यक्ति जो ऐसी सम्पत्ति में अभयर्पण, कुर्की या अन्य किसी आधार पर दावा करता हो, के बीच आगम या पूर्वता के सम्बन्ध में उठने वाले प्रश्न का अवधाराण यथास्थिति ऐसे न्यायालय या प्रत्यादान अधिकारी द्वारा किया जायेगा।
331. उस दशा में जब कि कोई सम्पत्ति किसी धनराशि के भुगतान या किसी बन्धक अथवा प्रभार के आधार पर बिक्री के लिये दिये गये किसी अभिनिर्णय के निष्पादन में अथवा ऐसे आदेश के निष्पादन में जब कि वह अभिनिर्णय हो या ऐसे आदेश के निष्पादन में जिसका उल्लेख धारा 92 में किया गया हो, कुर्क की जानी हो तो निबन्धक के आदेश से कुर्क की जायेगी।
332. यदि नियम 331 के अधीन कुर्की के लिये आदेश दिया गया हो; तो निबन्धक उस डिक्रीधारी के प्रार्थना पत्र पर जिसने अभिनिर्णय या आदेश सम्बन्धी कुर्की करायी हो, कुर्की सम्बन्धी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन के लिये आदेश देगा और निष्पादित किये जाने वाले अभिनिर्णय या आदेश की पूर्ति के लिये शुद्ध आय के उपयोग के भी आदेश देगा।
333. किसी ऐसे अभिनिर्णय या आदेश को, जिसे नियम 331 में निर्दिष्ट प्रकार के किसी दूसरे अभिनिर्णय या आदेश की कुर्की करके निष्पादित करता हो, धारण करने वाले व्यक्ति को कुर्क किये गये अभिनिर्णय या आदेश के धारक का प्रतिनिधि समझा जायेगा और वह कुर्क किये गये अभिनिर्णय या आदेश को ऐक्ट ओर नियमों में दी गई किसी रीति से निष्पादित करने का हकदार होगा।
334. यदि किसी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन मे कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति नियम 331 में अभिदिष्ट प्रकार के अभिनिर्णय या आदेश से भिन्न डिक्री हो तो कुर्की प्रत्यादन अधिकारी द्वारा ऐसे डिक्रीधारी को नोटिस जारी करके की जायेगी जिसमें उसे किसी भी प्रकार से उसका संक्रमण करने या उस पर कोई भार सृजन करने से निषिद्ध किया जायेगा।
335. नियम 331 से 334 के अधीन कुर्क किये गये अभिनिर्णय आदेश या डिक्री का धारक, अभिनिर्णय आदेश या डिक्री का निष्पादन करने वाले प्रत्यादान अधिकारी को ऐसी सूचना तथा सहायता देगा जो उचित रूप से अपेक्षित हो।
336. किसी ऐसे अभिनिर्णय या आदेश कि जिसे दूसरे अभिनिर्णय आदेश या डिक्री की कुर्की करके निष्पादित किया जाना हो, धारक के प्रार्थना पत्र पर, निबन्धक या प्रत्यादन अधिकारी यथास्थिति जो कुर्की का आदेश दें, उस निर्णीत ऋणी को जो अभिनिर्णय, आदेश या कुर्क की गयी डिक्री से बाध्य हो ऐसे आदेश की नोटिस देगा, और ऐसे नोटिस की प्राप्ति के पश्चात् कुर्की के अभिनिर्णय, आदेश या डिक्री के सम्बन्ध में ऐसे आदेश का उल्लंघन करके निर्णीत ऋणी द्वारा किया गया भुगतान या समायोजन तब तक मान्य नहीं होगा जब तक कि कुर्की लागू रहे।
337. (1) यदि कुर्क की जाने वाली चल सम्पत्ति
(क) निर्णीत ऋणी को देय ऋणी हो,
(ख) किसी निगम की पूंजी में अंश या उसमें विनियोजित निक्षेप हो, या
(ग) किसी दीवानी न्यायालय में जमा की गई अथवा उसक अभिरक्षा में सम्पत्ति को छोड़कर ऐसी चल सम्पत्ति को जो निर्णीत ऋणी के कब्जे में न हों, तो कुर्की प्रत्यादान अधिकारी के हस्ताक्षरयुक्त लिखित ओदश से की जायेगी जिसमें-
(1) किसी ऋण की दशा में ऋणदाता को ऋण की वसूली से और ऋणी को उसका भुगतान करने से ;
(2) किसी अंश या निक्षेप की दशा में, उस व्यक्ति को जिसके नाम से अंश या निक्षेप हो, अंश या निक्षेप का संक्रमण करने या उस पर कोई लाभांश या ब्याज लेने से ; और
(3) उपर्युक्त को छोड़कर किसी अन्य चल सम्पत्ति की दशा में उस व्यक्ति को जिसके कब्जे में वह हो, निर्णीत ऋणी को देने से;
निषिद्ध किया जायेगा
(2) ऐसे आदेश की एक प्रति, ऋण की दशा में, अंश या निक्षेप की दशा में निगम के सम्यक अधिकारी को किसी न्यायालय में निक्षिप्त या उसकी अभिरक्षित सम्पत्ति को छोड़कर अन्य चल सम्पत्ति की दशा में उस व्यक्ति को, जिसके कब्जे में ऐसी सम्पत्ति हो, भेजी जायेगी।
(3) ज्यों ही उपनियम (1) के खण्ड (क) में अभिदिष्ट ऋण या उपनियम (1) के खण्ड (ख) में अभिदिष्ट निक्षेप की अवधि पूर्ण हो जाये, त्यों ही प्रत्यादान अधिकारी सम्बद्ध व्यक्ति को उसे धनराशि का भुगतान करने का निदेश दे सकता है। यदि खण्ड (ख) में अभिदिष्ट अंश लौटाने योग्य न हो तो उक्त प्रत्यादान अधिकारी दलाल में माध्यम से उसे बेचने का प्रबन्ध करेगा। यदि अंश लौटाने योग्य हो तो उसके मूल्य का भुगतान ज्योंही वह देय हो जाये उक्त प्रत्यादान अधिकारी को दिया जायेगा। उपरिलिखित उपनियम (1) के खण्ड (ग) में अभिदिष्ट अन्य चल सम्पत्ति की दशा में उसे, ज्योहीं वह निर्णीत ऋणी को देय हो जाये, प्रत्यादान अधिकारी को सौंप दिया जायेगा।
(4) कोई व्यक्ति जिससे प्रत्यादान अधिकारी को धनराशि देने या सम्पत्ति सौंपने की अपेक्षा की गई हो, प्रत्यादान अधिकारी के आदेश का अनुपालन करेगा और प्रत्यादान अधिकारी को धनराशि का भुगतान किये जाने या सम्पत्ति सौंपे जाने के फलस्वरूप वह व्यक्ति प्रभावकारी रूप में उसी प्रकार मुक्त समझा जायेगा जैसे कि उसने उसे उसी पक्ष को भुगतान किया हो या सम्पत्ति सौपी हो जो उसे प्राप्त करने का अधिकारी हो।
अचल सम्पत्ति की कुर्की और बिक्री
338. (क) किसी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन में कोई अचल सम्पत्ति तब तक नहीं बेची जायेगी जब तक कि ऐसी सम्पत्ति पहले कुर्क न की गई ह;
प्रतिबन्ध यह है कि यदि ऐसी सम्पत्ति को बन्धक होने के आधार पर अभिनिर्णय या आदेश प्राप्त किया गया हो तो उसकी कुर्की करना आवश्यक न होगा।
(ख) अचल सम्पत्ति को इस आशय के एक आदेश द्वारा कुर्क किया जायेगा जिसमें निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति को किसी भी प्रकार से हस्तांतरित करने या भारित करने में और सभी व्यक्तियों को ऐसे हस्तातंरण या भारित किये जाने से कोई लाभ उठाने से रोक दिया जायेगा।
339. (क) विक्रय अधिकारी नियम 312 के उपनियम (ग) के अधीन जारी की गयी मांग नोटिस की एक प्रति निर्णीत ऋणी पर या यदि वह उपलब्ध न हो तो उसके परिवार किसी व्यस्क पुरूष सदस्य पर अथवा उसके प्राधिकृत एजेन्ट पर तामील करेगा या तामील करायेगा। इस प्रकार तामील किया जाना सम्भव न हो तो उसकी एक प्रति अचल सम्पत्ति, जिसे यथास्थिति कुर्क करना और बेचना हो अथवा कुर्क किये बिना बेचना हो, किसी ध्यानाकर्षी भाग पर चिकायेगा।
(ख) यदि निर्णीत ऋणी निर्दिष्ट धनराशि का भुगतान, मांग नोटिस की शर्तो के अनुसार न करें तो ‍िवक्रय अधिकारी मांग नोटिस में निर्दिष्ट अचल सम्पत्ति को, यथास्थिति कुर्क करने और बेचने या कुर्क किये बिना बेचने की कार्यवाही करेगा।
(ग) कुर्की के आदेश को कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति पर या उसके आसन्न किसी स्थान पर और ऐसे स्थान या स्थानों पर जो प्रत्यादान अधिकारी बिक्री या उचित ज्ञापन करने के लिये आवश्यक समझे, डुग्गी पीटकर या अन्य प्रचलित रीति से उदृघोषित किया जायेगा और आदेश की एक प्रतिलिपि अचल सम्पत्ति के किसी ध्यानकर्षी भाग पर चिपकायी जायेगी।
() कुर्की के आदेश की एक प्रतिलिपि निर्णीत ऋणी पर भी व्यक्तिगत रूप से तामील की जोयगी और यदि वह उपलब्ध न हो तो उसके परिवार के किसी व्यस्क पुरूष सदस्य को या उसके प्राधिकृत एजेन्ट पर तामील की जायेगी और यदि इस प्रकार की तामील सम्भव न हो तो निर्णीत ऋणी के अन्तिम ज्ञात निवास स्थान के किसी प्रमुख भाग पर चिपकायी जायेगी।
(ड) बिक्री की उदृघोणा बिक्री के लिए निश्चित दिनांक से कम से कम तीस दिन पूर्व प्रत्यादान अधिकारी के कार्यालय और तहसील तथा खण्ड कार्यालय में नोटिस चिपकाकर की जायेगी। इसकी सूचना सम्बद्ध क्षेत्र में बिक्री से दोनों दिन पूर्व और बिक्री के दिन भी, बिक्री प्रारम्भ करने से पहले, डुग्गी पीटकर की जायेगी। यदि बिक्री के पूर्व कुर्की करना अपेक्षित हो तो ऐसी उदृघोणा कुर्की हो जने के पश्चात् की जायेग। बिक्रीधारी तथा निर्णीत ऋणी का भी नोटिस दिया जायेगा।
उदृघोणा में बिक्री का समय और स्थान बताया जायेगा और उसमें निम्नलिखित के सम्बन्ध में यथा सम्भव उचित रूप से और ठीक ठीक उल्लिखित होगा:
(1) बेची जाने वाली सम्पत्ति;
(2) कोई भार जो सम्पत्ति पर हो ;
(3) वह धनराशि जिसकी वसूली के लिये बिक्री का आदेश दिया गया हो और
(4) प्रत्येक अन्य विषय जिसे विक्रय अधिकारी सम्पत्ति के प्रकार तथा मूल्य का क्रेता द्वारा अनुमान लगाने के लिए सारवान समझे।
(च) जब कोई अचल सम्पत्ति इन नियमों के अधीन बेची जाये तो बिक्री उस सम्पत्ति पर पूर्व भार के, यदि कोई हो अधीन होगी। जब वह धनराशि जिसकी वसूली के लिए बिक्री की जाये सौ रूपये से अधिक हो, तो डिक्रीधारी विक्रय विक्रय अधिकारी को ऐसे समय के भीतर जो उसके द्वारा या प्रत्यादान अधिकारी द्वारा निश्चित किया जाये, बेची जाने वाली सम्पत्ति की कुर्की के दिनांक से या , नियम 338 के प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अधीन आने वाले मामलों की दशा में निष्पादन के प्रार्थना पत्र के दिनांक से कम से कम बारह वर्ष पहले की अवधि की भार ग्रस्तता का प्रमाण पत्र  निबन्धक विभाग से लेकर प्रस्तुत करेगा। भार ग्रस्तता का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का समय, यथास्थिति, विक्रय अधिकारी या प्रत्यादान अधिकारी के विवेक से बढ़ाया जा सकता है।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि सम्बद्ध अभिलेखों के नष्ट कर दिये जाने के कारण भार ग्रस्तता का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया जा सकता हो तो गांव के पटवारी (लेखपाल) का उन भारों के सम्बन्ध में जो उसे मालूम हो, एक शपथ पत्र जिसके साथ निबन्ध विभाग का इस आशय का एक प्रमाण पत्र होगा कि सम्बद्ध अभिलेखों के नष्ट कर दिये जाने के कारण भार ग्रस्तता के प्रमाण पत्र होगा कि सम्बद्ध अभिलेखों के नष्ट कर दिये जाने के कारण भार ग्रस्तता के प्रमाण पत्र के स्थान पर स्वीकार किया जायेगा।
(छ) बिक्री, सार्वजनिक नीलामी द्वारा सबसे ऊंची बोली बोलने वाले को की जायेगी किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि विक्रय अधिकारी को यह अधिकार होगा कि सबसे ऊंची बोली को इस कारण से कि दिया जाने वाला मूल्य अनावश्यक रूप से कम जान पड़ता है या अन्य किसी कारण से, अस्वीकार कर दे और प्रतिबन्ध यह भी है कि प्रत्यादान अधिकारी या विक्रय अधिकारी स्वविवेक से स्थगन के कारणों को अभिलिखित करते हुये बिक्री को किसी निर्दिष्ट दिन और समय के लिये स्थगित कर सकता है। यदि बिक्री इस प्रकार सात दिन से अधिक अवधि के लिये स्थगित की जाये तो जब तक कि निर्णीत ऋणी पत्र उदृघोणा  न करने के लिये लिखित सहमति न दे दे खण्ड (ड) के अधीन फिर से उदृघोणा  की जायेगी।
(ज) बिक्री उस दिनांक से जब उदृघोणा  की नोटिस या प्रत्यादान अधिकारी के कार्यालय में चिपकायी जाये कम से कम तीस दिन की समाप्ति के पश्चात् की जायेगी। बिक्री का समय और स्थान प्रत्यादान अधिकारी द्वारा निश्चित किया जायेगा और बिक्री उस स्थान में जहां पर बेची जाने वाली सम्पत्ति स्थिति हो या ऐसे आसन्न प्रमुख सार्वजानिक स्थान जिसे उक्त प्रत्यादान अधिकारी निश्चित करें, की जायेगी।
(झ) क्रेता उस मूल्य के जितने में नीलामी मे अचल सम्पत्ति खरीदी जाये, पन्द्रह प्रतिशत के बराबर धनराशि खरीदने के समय बिक्रय अधिकारी को भुगतान करेगा और ऐसा न करने पर सम्पत्ति तुरन्त फिर से बेच दी जायेगी।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि क्रेता स्वयं डिक्रीधारी हो और उसे क्रय धन मुजरा करने का हक हों तो विक्रय अधिकारी उपर्युक्त नियम की अपेक्षाओं को अभियुक्त कर देगा।
(ञ) क्रय धन की शेष धनराशि और विक्रय प्रमाण पत्र के निमित्त सामान्य स्टाम्प के लिये अपेक्षित धनराशि का भुगतान बिक्री के दिनांक से पन्द्रह दिन के भीतर किया जायेगा:
प्रतिबन्ध यह है कि स्टाम्प का मूल्य देने का समय उचित और पर्याप्त कारणों से प्रत्यादान अधिकारी के विवक से बिक्री के दिनांक से तीस दिन तक बढ़ाय जा सकता है।
प्रतिबन्ध यह भी है कि इस खण्ड के अधीन भुगतान की जाने वाली धनराशि की गणना करने में क्रेता को उस मुजराई का लाभ मिलेगा जिसके लिये वह उपनियम (झ) के अधीन हकदार हो।
(ट) यदि उपनियम (ञ) में उल्लिखित अवधि की समाप्ति तक क्रय धन की सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान न किया जाये तो -
(1) उपनियम (झ) के अधीन जमा धनराशि प्रत्यादान अधिकारी के विवक से, बिक्री का व्यय देने के पश्चात सरकार के प्रति जब्त कर ली जायेगी और
(2) बाकीदार क्रेता का सम्पति में अथवा धनराशि के किसी ऐसे भाग में जिसके लिये वह सम्पत्ति बाद में बेची जाये कोई दावा न होगा।
(ठ) खण्ड (ञ) में उल्लिखित धनरा‍शि के भुगतान के लिये अनुमति अवधि के भीतर भुगतान न किये जाने पर अचल सम्पत्ति की दुबारा बिक्री इस नियम में विक्री के लिये निय रीति से और अवधि के लिए फिर से उद्घोषणा जारी किये जाने के पश्चात् की जायेगी।
(ड) यदि डिक्रीधारी सम्पत्ति का क्रय करे तो क्रय धन और अभिनिर्णय या आदेश के सम्बन्ध में देय धनराशि एक दूसरे के प्रति और विक्रय अधिकारी तदनुसार पूर्ण रूप से अथवा अभिनिर्णय या आदेश की आंशिक रूप से पूर्ति होना अभिलिखित करेगा।
340. (1) जब अचल सम्पत्ति के विक्रय के लिये आदेश दे दिये गये हों, यदि निर्णीत ऋण प्रत्यादान अधिकारी को इस बात से सन्तुष्ट कर दे कि यह विश्वास करने का कारण है कि बिक्री की धनराशि को बन्धक या पट्टा या ऐसी सम्पत्ति के या उसके किसी भाग को, या निर्णीत ऋणी को किसी अन्य अचल सम्पत्ति की बिक्री गैर सरकार विक्रय द्वारा बढ़ाई जा सकती है तो प्रत्यादान अधिकरी निर्णीत ऋणी द्वारा आवेदन पत्र देने पर आदेश में उल्लिखित सम्पत्ति के विक्रय को ऐसी शर्तो पर तथा ऐसी अवधि की लिये जिसे वह उचित समझे स्थगित कर सकता है ताकि निर्णीत ऋणी धनराशि में वृद्धि कर सके।
(2) ऐसी दशा में प्रत्यादान अधिकारी निर्णीत ऋणी को उसमें उल्लिखित अवधि के भीतर प्रस्तावित बन्धक, पट्टा या विक्रय को रोकने का प्राधिकार देने वाला एक प्रमाण पत्र प्रदान करेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि बन्धक, पट्टा या विक्रय के अधीन देय सभी धनराशियों का भुगतान निर्णीत ऋणी की नहीं बल्कि प्रत्यादान अधिकारी को किया जायेगा
प्रतिबन्ध यह भी कि बन्धक, पट्टा या इस नियम के अधीन कोई भी विक्रय पूर्ण न होगा जब तक कि प्रत्यादान अधकारी न इसकी पुष्टि न कर दी हो।
(3) इस नियम में दी गयी कोई बात उस सम्पत्ति की बिक्री के लिये जिसे बन्धक, या प्रभार के प्रवर्तन के सम्बन्ध में अभिनिर्णय या विक्रय आदेश के निष्पादन के लिये बेचने के आदेश हों, लागू नहीं समझी जायेगी।
341. यदि बिक्री के पूर्व, निर्णीत ऋणी या उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति अथवा ऐसी सम्पत्ति में जिसे बेची जानी हो, हित का दावा करने वाला कोई व्यक्ति ब्याज सम्पूर्ण देय धनराशि और सम्पत्ति बेचने में हुये व्यय जिसके अन्तर्गत कुर्की का, यदि कोई हो व्यय भी है, दे दे विक्रय अधिकारी यदि सम्पत्ति कुर्क कर ली गई हो, तो कुर्की का आदेश रद्द करने के पश्चात् सम्पत्ति, तुरन्त छोड़ देगा।
342. (1) यदि अचल सम्पत्ति बेच दी गई हो तो कोई व्यक्ति जो या तो ऐसी सम्पत्ति का स्वामी हो अथवा ऐसी बिक्री के पूर्व अर्जित किसी आगम के कारण उसमें हित रखता हो, प्रत्यादान अधिकारी के पास निम्नलिखित धनराशि जमा करके बिक्री को रद्द करने के लिये प्रार्थना पत्र दे सकता है।
(1) क्रेता को भुगतान करने के लिए, क्रय धन के पांच प्रतिशत के बराबर धनराशि और
(2) डिक्रीधारी को भुगतान करने के लिये बिक्री की उदृघोणा में निर्दिष्ट बकाया धनराशि जिसकी वसूली के लिए बिक्री का आदेश दिया गया ओर उस पर ब्याज और कुर्की का यदि कोई हो और बिक्री का व्यय तथा ऐसी धनराशि के सम्बन्ध में अन्य व्यय, जिसमें से वह धनराशि कम कर दी जायेगी जो ऐसी उदृघोणा  के दिनांक के बाद डिक्रीधारी को प्राप्त हो जाये।
(2) यदि ऐसी निक्षेप और प्रार्थना पत्र बिक्री के दिनांक से तीस दिन के भीतर दिय जाये तो प्रत्यादान अधिकारी बिक्री को रद्द करने का आदेश देगा और क्रेता को अब तक जमा की गई धनराशि और प्रार्थी द्वारा जमा की गई पॉच प्रतिशत धनराशि देगा।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि एक से अधिक व्यक्तियों ने इस उपनियम के अधीन धनराशि जमा की हो और प्रार्थना पत्र दिया हो तो सबसे पहले जमा करने वाले का प्रत्यादान अधिकारी को दिया गया प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जायेगा।
(3) जब किसी व्यक्ति ने अपनी अचल सम्पत्ति के विक्रय को रद्द करने के लिये नियम 343 के अधीन आवेदन पत्र दिया हो तो उस नियम के अधीन आवेदन पत्र देने का तब तक हकदार न होगा जब तक कि वह उक्त आवेदन पत्र को वापस न ले ले।
(4) इस नियम की किसी बात से निर्णीत ऋणी बिक्री/वाले के उदृघोणा  के अन्तर्गत न जाने वाले मूल्य और ब्याज के दायित्व से मुक्त न होगा।
343. (क) किसी अचल सम्पत्ति के दिनांक से तीस दिन के भीतर किसी समय, डिक्रीधारी या कोई व्यक्ति जो सम्पत्ति में किसी अंश का हकदार हो या जिसके हितो पर बिक्री से प्रभाव पड़ता हो, बिक्री के सम्बन्ध में विज्ञापन या संचालन करने में किसी सारवान अनियमितता या त्रुटि अथवा कपट के कारण उसे रद्द करने के लिये प्रत्यादान अधिकारी को प्रार्थना पत्र दे सकता है।
प्रतिबन्ध यह है कि कोई भी बिक्री अनियमितता या त्रुटि अथवा कपट के कारण तब तक रद्द न की जायेगी जब तक कि प्रत्यादान अधिकारी को यह समाधान न हो जाये कि प्रार्थी के हितों को ऐसी अनियमितता, त्रुटि या कपट के कारण पर्याप्त क्षति पहुंची है।
(ख) यदि प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया जाये तो उक्त प्रत्यादान अधिकारी बिक्री रद्द कर देगा और वह फिर से बिक्री करने का निदेश दे सकेगा।
344. (क) यदि नियम 342 या नियम 343 के अधीन विक्री को रद्द करने के लिए कोई प्रार्थना पत्र न दिया गया हो अथवा यदि ऐसा प्रार्थना पत्र दिया गया हो किन्तु वह अस्वीकार कर दिया गया हो तो बिक्री के दिनांक से तीस दिन की समाप्ति पर उक्त प्रत्यादान अधिकारी बिक्री की पुष्टि करने का आदेश देगा।
प्रतिबन्ध यह है कि यदि उसे ऐसा सोचने का कारण हो कि बिक्री, भले ही कोई ऐसा प्रार्थना पत्र न दिया गया हो या किसी ऐसे प्रार्थना पत्र में जो दिया गया हो और अस्वीकार कर दिया गया हो अभिकथित कारणों से भिन्न कारण से रद्द कर दी जानी चाहिए तो वह उन कारणों को अभिलिखित करने के पश्चात् बिक्री रद्द कर सकता है।
(ख) जब कभी किसी अचल सम्पत्ति की बिक्री पुष्टि न की जाये अथवा वह रद्द कर दी जाये तो यथास्थिति निक्षेप या क्रय धन क्रेता को वापस कर दिया जायेगा।
345. बिक्री की पुष्टि होने पर प्रत्यादान अधिकारी, क्रेता को अपनी मुहर लगाकर और हस्ताक्षर करके बिक्री का प्रमाण पत्र देगा, तथा ऐसे प्रमाण पत्र में बिकी हुई सम्पत्ति के ब्य तथा क्रेता का नाम दिया होगा और वह ऐस क्रेता को बिक्री दिये जाने के तथ्य का निश्चायक साक्ष्य होगा।
346. यदि इन नियमों के अधीन कोई कुर्की की गई हो तो कुर्क सम्पत्ति या उसमें किसी के हित का कोई भी व्यक्तिगत संक्रमण या निर्णीत ऋणी को ऐसी कुर्की  के विपरीत किसी ऋण, लाभांश या अन्य धनराशि का भुगतान, कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय समस्त दावों के प्रति निष्प्रभावी होंगे।
स्पष्टीकरण - इन नियमों के प्रयोजन के लिए किसी कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय दावों के अन्तर्गत परिसम्पत्तियों का पातिक रीति से वितरण भी है।
347. (क) यदि इन नियम अधीन चल सम्पत्ति की कुर्की और बिक्री के सम्बन्ध में या अचल सम्पत्ति की कुर्की तथा डिक्री या कुर्की के बिना बिक्री के सम्बन्ध में उपगत व्यय तथा परिव्यय नियम 312 के उपनियम (क) के अधीन डिक्रीधारी द्वारा जमा की गई लागत की धनराशि से अधिक हो तो ऐसी अधिक धनराशि, विक्रीत सम्पत्ति की धनराशि या निर्णीत ऋण द्वारा भुगतान की गई धनराशि में से जैसी भी दशा हो, कम की जायेगी तथा शेष धनराशि बिक्रीधारी को उपलब्ध की जायेगी।
(ख) प्रत्येक व्यक्ति ऐसी देय धनराशि का, जिसकी वसूली के लिए इन नियमों के अधीन प्रार्थना पत्र दिया गया हो, प्रत्यादान अधिकरी या उसके द्वारा तदर्थ प्राधिकृत अन्य अधिकारी को भुगतान करने पर उक्त धनराशि के लिए उक्त अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित रसीद पाने का हकदार होगा, रसीद में भुगतान करने वाले व्यक्ति का नाम तथा उस विषय का जिसके सम्बन्ध में किया गय हो, उल्लेख होगा।
348. (क) यदि इन नियमों के अधीन कुर्क सम्पत्ति के सम्बन्ध में कोई दावा प्रस्तुत किया जाये या कुर्की के सम्बन्ध में इस आधार पर कोई आपत्ति की जाये कि सी सम्पत्ति कुर्की करने के योग्य नहीं है तो विक्रय अधिकारी उक्त दावे या आपत्ति की जांच करके और उसका गुण दोष के आधार पर निस्तारण करेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि विक्रय अधिकारी दावे की जांच करने से इन्कार कर सकता है यदि वह यह समझे कि दावा सारहीन है अथवा वह बिक्री के लिए निश्चित दिनांक को या उसके पश्चात् दिया गया है।
(ख) यह सम्पत्ति जिसके सम्बन्ध में दावा या आपत्ति हो, बिक्री के लिए विज्ञापित की गई हो तो विक्रय अधिकारी, उक्त दावे या आपत्ति की जांच होने तक बिक्री स्थगित कर सकता है।
(ग) यदि कोई दावा या आपत्ति प्रस्तुत की जाये तो वह पक्ष जिसके विरूद्ध आदेश दिया गया हो, विवाद ग्रस्त सम्पत्ति में अपने दावे को प्रमाणित करने के लिए आदेश के दिनांक से 6 महीने के भीतर वाद संस्थित कर सकता है, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे वाद के यदि कोई हो, परिणाम के अधीन रहते हुये उक्त आदेश निश्चायक होगा।
349. (क) यदि क्रेता द्वारा चूक करने के कारण नियम 339 या नियम 323 के खण्ड (झ) तथा (ठ) के अधीन की गयी पुनः बिक्री के कारण मूल्य में कोई कमी हो जाये तो ऐसी कमी तथा ऐसी पुनः बिक्री से उत्पन्न समस्त व्यय विक्रय अधिकारी द्वारा प्रत्यादान अधिकारी को प्रमाणित किये जायेंगे और बिक्रीधारी या निर्णीत ऋणी के अनुरोध पर चूक करने वाले क्रेता से वसूल किये जा सकेंगे। ऐसी वसूली के प्रासंगिक व्यय भी यदि कोई हो चूक करने वाले क्रेता को वहन करने होंगे।
(ख) यदि पुनः बिक्री पर सम्पत्ति, पहली बिक्री के मूल्य से अपेक्षाकृत अधिक मूल्य पर बेची जाये तो पहली बिक्री में चूक करने वाले क्रेता को ऐसे मूल्यांतर या वृद्धि में कोई दावा नहीं होगा।
350. यदि किसी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन में कोई सम्पत्ति में कोई सम्पत्ति कुर्क की गई ह किन्तु डिक्री की चूक के कारण विक्रय अधिकारी या प्रत्यादान अधिकारी निष्पादन के प्रार्थना पत्र पर आगे कार्यवाही करने में असमर्थ हो, तो ऐसा अधिकारी या तो उक्त प्रार्थना पत्र को रद्द कर देगा अथवा किसी पर्याप्त कारण से कार्यवाहियों को आगामी दिनांक के लिए स्थगित कर देगा। ऐसा प्रार्थना पत्र को रद्द होने पर कुर्की समाप्त हो जायेगी।
351. जब परिसम्पत्तियां विक्रय अधिकारी के पास हो तथा ऐसी परिसम्पत्तियों के होने के पूर्व किसी निर्णीत ऋण के विरूद्ध अन्य अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन के लिए प्रार्थना पत्र  के अनुसरण में मांग की नोटिस एक से अधिक डिक्रीधारियों से प्राप्त हुई हो और डिक्रीधारियों की तुष्टि न हुई हो तो विक्रय अधिकारी द्वारा परिसम्पत्तियां वसूली के व्ययों को काटकर सिविल व्यवहार संहिता (कोड आफ सिविल प्रोसीजर 1908) (ऐक्ट संख्या 5, 1908) की धारा 73 में व्यवस्थित रीति से समस्त ऐसी डिक्रीधारियों में आनुपातिक रीति से वितरित की जायेंगी।
352. (क) यदि किसी निर्णीत ऋणी की अभिनिर्णय या आदेश की पूर्णतः तृष्टि के पूर्व मृत्यु हो जाये तो नियम 312 के उपनियम (क) के अधीन प्रार्थना पत्र मृत व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधि के विरूद्ध दिया या जारी रखा जा सकता है और तत्पश्चात इस अध्याय के समस्त उपबन्ध, सिवाय इस नियम में की गई व्यवस्था के, उसी प्रकार लागू होंगे मानो कि ऐसा विधिक प्रतिनिधि ही निर्णीत ऋणी हो:
प्रतिबन्ध यह ह कि ऐसे विधिक प्रतिनिधि के विरूद्ध निष्पादन आरम्भ करने के पूर्व उसे कारण बताने का नोटिस जारी किया जायेगा और उसकी आपत्तियों की सुनवाई की जायेगी।
(ख) जब ऐसे विधिक प्रतिनिधि के विरूद्ध अभिनिर्णय या आदेश निष्पादित किया जाये तो उसक उत्तरदायित्व मृतक की सम्पत्ति में केवल उस सीमा तक होगा जो उसे प्राप्त हुई हो और यथाविधि निस्तारित न की गयी हो तथा दायित्व सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए अभिनिर्णय या आदेश निष्पादित करने वाला प्रत्यादान अधिकारी, स्वतः अथवा डिक्रीधारी के प्रार्थना पत्र पर विधिक ऐसे प्रतिनिधि को ऐसे लेखे प्रस्तुत करने को बाध्य कर सकता है जो वह उचित समझे।
353. (1) उपनियम (3) के उपबन्धों के अधीन रजिस्ट्रार धारा 94 के अधीन सम्पत्ति की कुर्की का आदेश देने पूर्व से उन व्यक्तियों से जिनकी सम्पत्ति की कुर्की की जानी हो, ऐसी धनराशि प्रतिभूति और ऐसे समय के भीतर प्रस्तुत करने की उपेक्षा कर सकता है जिसका उल्लेख आदेश मे किया गया हो।
(2) जब कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार की संतुष्टि के लिए इस बात का कारण बताने में असफल रहे कि उसे रजिस्ट्रर द्वारा निय समय के भीतर प्रतिभूति क्यों जमा नहीं करनी चाहिये या प्रतिभूति जमा न करे तो रजिस्ट्रर यह आदेश दे सकता है कि उप नियम (1) में उल्लिखित सम्पत्ति की कुर्की कर ली जाये।
(3) निबन्धक उपुर्यक्त उप नियम के अधीन जारी किये गये निदेश के अन्तर्गत सम्पत्ति को सप्रतिबन्ध कुर्की करने का आदेश भी दे सकता है।
(4) धारा 94 के अधीन सम्पत्ति की कुर्की उपर्युक्त उप नियमों के अधीन उस रीति से की जायेगी जो नियम 314 से 348 तक में दी गयी है।
354. (1) यदि नियम 353 के अधीन कुर्क सम्पत्ति में कोई दावा प्रस्तुत किया जाये तो ऐस दावे की जांच नियम 348 में निर्दिष्ट रीति से प्राधिकारी द्वारा की जायेगी।
(2) नियम 353 के अधीन की गयी सम्पत्ति की कुर्की निम्नलिखित दशाओं में वापस ले ली जायेगी-
(1) जब सम्बद्ध पक्ष अपेक्षित प्रतिभूति के साथ कुर्की के व्यय की प्रतिभूति प्रस्तुत करें, या
(2) जब धारा 74 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन परिसमापक (Liquidator) यह निश्चित करें कि सम्बद्ध पक्ष द्वारा कोई अंशदान देय नहीं है, या
(3) जब निबन्धक, धारा 68 के अधीन या आदेश दे कि सम्बद्ध पक्ष को प्रतिकर के रूप में किसी भी धनराशि या सम्पत्ति की वापसी या प्रत्यास्थापना करना या समिति की परिसम्पत्ति में किसी धन अंशदान करना आवश्यक नहीं है, या
(4) जब धारा 68 की उपधारा (2) के अधीन निबन्धक द्वारा उस पक्ष के विरूद्ध दिया गया अधिभार का आदेश जिसकी सम्पत्ति कुर्क कर ली गई हो, धारा 98 के अधीन की गई अपील में खारिज कर दिया जायें, या
(5) जब धारा 71 की उपधारा (न) में अभिदिष्ट विवाद का निर्णय उस पक्ष के विरूद्ध हुआ हो, जिसके अनुरोध पर कुर्की की गई थी।
(3) नियम 353 के अधीन की गई कुर्की का ऐसे व्यक्तियों के, जो कुर्की से सम्बन्धित कार्यवाहियों में कोई पक्ष न हों, कुर्की के पूर्व विद्यमान अधिकारों पर कोई प्रभाव न पडे़गा।
(4) यदि कोई सम्पत्ति नियम 353 के उपबन्धों के आधार पर कुर्की के अधीन हो और वाद उस के व्यक्ति के विरूद्ध जिसकी सम्पत्ति कुर्क हो, कोई अभिनिर्णय या आदेश दिया जाये, तो ऐसे अभिनिर्णय आदेश के निष्पादन के लिए प्रार्थना पत्र देना आवश्यक न होगा।