अध्याय 23
शुल्क तथा व्यय


1[ 355. धारा 65 की उपधारा (2) के अधीन किसी सहकारी समिति की जांच के लिए प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित दर पर शुल्क देय होगा -
रू0
(1) किसी प्रारम्भिक कृषि सहकारी समिति की दशा में 25
(2) जिला स्तर की केन्द्रीय सहकारी समिति की दशा में 100
(3) शीर्ष स्तर की सहाकरी समिति की दशा में 150
(4) किसी अन्य सहकारी समिति की दशा में 50
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1. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा नियम 355, 356, 357, 358, 359, 361 व 362 प्रतिस्थापित हुआ।
356. किसी सहकारी समिति के ऋणदाता द्वारा धारा 66 के अधीन निरीक्षण के लिए प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित दर पर शुल्क देय होगा -
रू0
(1) किसी प्रारम्भिक कृषि सहकारी समिति की दशा में 25
(2) जिला स्तर की केन्द्रीय सहकारी समिति की दशा में 100
(3) शीर्ष स्तर की सहकरी समिति की दशा में 150
(4) किसी अन्य सहकारी समिति की दशा में 50
1[357. किसी ऐस व्यक्ति द्वारा जो न तो सहकारी समिति का सदस्य हो और न उसका ऋणदाता हो, किसी सहकारी समिति का निरीक्षण करने या उसके कार्यो से सम्बद्ध मामलों की जांच करने के लिए किसी प्रार्थना पत्र पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी, जब तक कि ऐसे प्रार्थना पत्र के साथ पांच सौ रूपये का शुल्क न दिया हो:
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि यदि निरीक्षण या जांच करने पर उक्त प्रार्थना पत्र में लगाये गये आरोप ठीक पाये जाये तो नियम 355 या 356 में निर्धारित शुल्क की तालिका में दी गयी, धनराशि से अधिक वापस कर दी जायेगी।
स्पष्टीकरण - इस नियम के प्रयोजन के लिए पद सदस्य में सामान्य निकाय का एक सदस्य और समिति के प्रबन्ध कमेटी का एक सदस्य भी सम्मिलित होगा।
358. किसी विवाद के निपटारे के लिए धारा 70 की उपधारा (1) के अधीन किसी अभिदेश -
(क) के लिए रू0 25.00 शुल्क अपेक्षित होगा, जहां अभिदेश नियम 229 के उपनियम (1) के खण्ड (क) के अन्तर्गत आता हो और सम्पत्ति का मूल्य या अभिदेश में अन्तर्गस्त दावे की धनराशि 2,500 रूपये से अधिक न हो।
(ख) के साथ सम्पत्ति के मूल्य या अभिदेश में अन्तर्गस्त दावे की धनराशि के एक प्रतिशत की दर पर शुल्क देय होगा, जहां अभिदेश नियम 229 के उपनियम (1) के खण्ड (क), (ख) (ग) या (घ) के अन्तर्गत आता है और सम्पत्ति का मूल्य या अभिदेश में अन्तर्गत दावे की धनराशि 2500 रूपये से अधिक हो।
(ग) के साथ रूपये 500.00 का शुल्क देय होगा, जहां अभिदेश नियम 229 के उपनियम (2) या उपनियम (3) के अन्तर्गत आता हो किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि जहां वादी के अनुरोध पर धारा 71 की उपधारा (1) के अधीन मध्यस्थ मण्डल संघटित किया जाये वहां शुल्क की धनराशि वह होगी जो पूर्ववर्ती संगत खण्ड के अधीन देय हो और उसके अतिरिक्त उसक दस प्रतिशत या पचास रूपये इसमें जो भी अधिक हो देय होगा।
2[359. अपील के ज्ञापन पत्र -
(क) के लिये कोई शुल्क अपेक्षित नहीं होगा, जहां अपील धारा 98 की उपधारा (1) खण्ड (ग) में अभिदिष्ट निर्णय के विरूद्ध हो,
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1. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा नियम 355, 356, 357, 358, 359, 361 व 362 प्रतिस्थापित हुआ।
2. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा नियम 355, 356, 357, 358, 359, 361 व 362 प्रतिस्थापित हुआ।

(ख) के साथ नियम 358 में विनिर्दिष्ट दर की दो गुनी दर पर शुल्क देय होगा जहां अपील अधिनियम की धारा 97 की उपधारा (1) या धारा 98 की उपधारा (1) के खण्ड (ज) में अभिदिष्ट अभिनिर्णय के विरूद्ध हो,
(ग) अन्य सभी मामलों में -
(एक) जहां अधिनियम की धारा 3 उपधारा (1) के अधीन नियुक्त सहकारी समितियों का निबन्धक या धारा 3 उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अपर निबन्धक या संयुक्त निबन्धक/उप निबन्धक अपीलीय प्राधिकारी हो, वहां निम्नलिखित दर पर शुल्क देय होगा -
(क) दावे की धनराशि का दो प्रतिशत यदि वह धनराशि या सम्पत्ति का दावा न हो
(ख) 200.00 रूपये का शुल्क यदि वह धनराशि या सम्पत्ति का दावा न हो।
(दो) रूपये 300.00 का शुल्क जह राज्य सरकार अपीलीय प्राधिकारी हो;
(तीन) रूपये 300.00 का जहां सहकारी न्यायाधिकरण अपीलीय प्राधिकारी हो;
(चार) रूपये 150.00 का शुल्क जह खण्ड (एक) या खण्ड (दो) या खण्ड (तीन) में उल्लिखित प्राधिकारी से भिन्न कोई प्राधिकारी अपीलीय प्राधिकारी हो।
360. धारा 99 के अधीन पुनर्विलोकन के लिए प्रार्थना पत्र के साथ नियम 359 में अपील के लिए निर्दिष्ट दर का आधा शुल्क देय होगा।
1[361. धारा 101 के अधीन किसी अपील के संक्रमण के लिए प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित दरों पर शुल्क देय होगा:
(क) दो सौ पचास रूपये का शुल्क यदि अपील के संक्रमण के लिए प्रार्थना पत्र, धारा 101 के उपधारा (1) के अन्तर्गत आता हो,
(ख) दो सौ रूपये का शुल्क् यदि अपील के संक्रमण के लिए प्रार्थना पत्र धारा 101 की उपधारा (2) के अन्तर्गत आता हो,
(ग) एक सौ पचास रूपये का शुल्क यदि अपील के संक्रमण के लिए प्रार्थना पत्र धारा 101 की उपधारा (3) के अन्तर्गत आता हो
362. निष्पादन की कार्यवाहियों के सम्बन्ध में निम्नलिखित शुल्क लिया जायेगा -
(क) किसी अभिनिर्णय या आदेश के निष्पादन के निमित्त प्रार्थना पत्र के लिये
(एक) यदि धनराशि जो वसूल की जानी हो, दो सौ पचास रूपये या उससे कम हो
10.00 रूपये
(दो) यदि धनराशि जो वसूल की जानी हो, दो सौ पचास से अधिक हो, तो प्रति सौ रूपये या उसके भाग के लिए 10 पैसे की दर से अतिरिक्त शुल्क किन्तु अधिक से अधिक पांच सौ रूपये लिया जायेगा।
(ख) निष्पादन की कार्यवाहियों के अन्तर्गत प्रत्येक नोटिस के लिए 10.00 रूपये,
(ग) प्रत्येक निर्णीत ऋणी का चल सम्पत्ति की कुर्की के लिए 25.00 रूपये,
(घ) प्रत्येक बिक्री के लिए बिक्री के पूर्व प्रतिदिन के विज्ञापन के निमित्त डुग्गी पीटने के लिए 20.00 रूपये,
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1. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97 लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा नियम 355, 356, 357, 358, 359, 361 व 362 प्रतिस्थापित हुआ।
(ड) प्रत्येक बिक्री के विक्रय शुल्क 25.00 रूपये,
(च) बिक्री के विरूद्ध प्रत्येक आपत्ति याचिका के लिए शुल्क 25.00रूपये,
(छ) प्रत्येक निर्णीत ऋणी की अचल सम्पत्ति की कुर्की के लिए शुल्क 50.00 रूपये,
(ज) अचल सम्पत्ति की बिक्री के लिए शुल्क 50.00 रूपये,
363. अधिनियम या इन नियमों के अधीन शुल्क के रूप में या अन्यथा प्राप्त या वसूल की गई कोई भी धनराशि, राज्य सरकार या निबन्धक द्वारा समय समय पर निर्दिष्ट शीर्षक के अन्तर्गत राजकीय कोषागार में जमा की जायेगी, निबन्धक शुल्क तथा अन्य धनराशियों के प्राप्त या वसूल करने की और उन्हें कोषागार में जमा करने की रीति भी निर्दिष्ट कर सकता है।