अध्याय 24
लेखा-पुस्तक अर्थात् रजिस्टर जो सहकारी समिति द्वारा रखे जायेंग


364. (1)प्रत्येक सहकारी ऐसे प्रपत्र में जिसे निबन्धक समय समय पर निर्दिष्ट करें, समिति के व्यापार सम्बन्धी लेन-देने अभिलिखित करने के लिए निम्नलिखित लेख पुस्तकें तथा रजिस्टर अद्यावधिक रखेगा -
(क) समिति की सामान्य निकाय प्रबन्ध कमेटी तथा किन्ही  अन्य समितियों या उपसमितियों की बैठकों की कार्यवाहियाँ अभिलिखित करने के लिए कार्यवृत्ति पंजी या पंजियां,
(ख) समिति या सदस्यता के लिए प्रार्थना पत्रों का रजिस्ट जिसमें प्रार्थी का नाम और पता, प्रार्थित अंशों तथा अस्वीकृत की दशा में प्रार्थी की सदस्यता को अस्वीकृति का निर्णय, संसूचित करने का दिनांक दिया होगा:
(ग) सदस्यों का रजिस्टर, जिनमें प्रत्येक का नाम और पता, सदस्य होने का दिनांक, लिए गये अंश तथा ऐसे अंशों के लिए सदस्य द्वारा भुगतान की गई धनराशि और उनके सदस्यता समाप्त होने के दिनांक तथा सदस्यता समाप्ति के कारण दिखाये जायेंगे
(घ) नाम निर्देशनों का रजिस्टर (जो नियम 77 के अधीन सदस्यों द्वारा किये गये है)
(ड) सदस्यों के प्रतिनिधियों का रजिस्टर यदि समिति की सामान्य  निकाय प्रतिनिधियों द्वारा संगाठित हो;
(च) रोकड़-बही जिसमें दैनिक प्राप्तियां और व्यय तथा अन्त में प्रतिदिन को शेष धनराशि दिखाई जायेगी ;
(छ) रसीद-बही;
(ज) समिति के प्रत्येक सदस्य के लिए एक खाता बही ;
(झ) प्रमाण पत्र (बाउचर) पत्रावली जिसमें समिति द्वारा किये गये व्यय के लिए समस्त प्रमाणक (बाउचर) क्रमवार संख्यांकित तथा कालानुसार नत्थी किये जायेंगे;
(ञ) सामान्य खाता बही जिसमें दिन प्रतिदिन विभिन्न शीर्षकों (मदों) के अधीन प्राप्तियां तथा भुगतान और अदत्त धनराशियों दिखाई जायेंगी ;
(ट) अधिकारियों तथा पदाधिकारियों का रजिस्टर, जिसमें नियुक्त किये गये प्रतिनिधि यदि कोई हो सम्मिलित ह;
(ठ) लाभाँश का रजिस्टर, सिवाय उन समितियों के जिनके पास कोई अंश पूंजी न हो;
(ड) ऐसी अन्य पुस्तके और रजिस्टर जो निबन्धक द्वारा समय-समय पर द्विशेष संचालित किसी विशेष प्रकार के व्यवसाय के लिए निर्दिष्ट किये जायें।
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि कोई सहकारी समिति -
(1) जो ऋण लेती हो या निक्षेप रखती हो निम्नलिखित भी रखेगी -
(क) उधार-खाता जिसमें निक्षेप तथा अन्य सभी प्रकार के उधार दिखाये जायेंगे तथा
(ख) अस्थिर साधनों का रजिस्टर;
(2) जो ऋण लेती हो या निक्षेप रखती हो तथा ऋण भी देती हो, निम्नलिखित भी रखेगी -
(क) ऋण खाता बही जिसमें ऋण वितरण की संख्या तथा दिनांक, प्रयोजन जिसके लिए ऋण दिया हो तथा दिनांक जिस पर या जिन पर मूलधन की वापसी तथा ब्याज देय हो तथा उसक प्रतिदान किया जाये दिखाया जायेगा तथा
(ख) दायित्व रजिस्टर जिसमें प्रत्यक सदस्य की समिति के प्रति ऋणग्रस्तता दिखाई जायेगी, चाहे वह सीधे उसी के द्वारा लिये गये ऋणों के लिए हो या किसी ऋण का प्रतिभू होने के कारण हों;
(3) जो असीमित दायित्व वाली हो, वह ऐसा भी रजिस्टर रखेगी जिसमें सदस्यों के सम्पत्ति सम्बन्धी ऐसी विवरण पत्र दिये जयेंगे जिनमें प्रत्येक सामान्य सदस्य की उसके सदस्य होने के दिनांक पर परसम्पत्तियों तथा दायित्वों का और भूमि के गाटों (प्लाट्स) को खसरा संख्या सहित सम्पत्ति का पूर्ण विवरण दिया गया हो; ये विवरण पत्र जब भी आवश्यक हो तब और किसी भी दशा में तीन सहकारी वर्षो में कम से कम एक बार यथाविधि सत्यापति किये जायेंगे।
(2)(क) कोई भी सहकारी समिति ऐसे किसी आगम विलेख, अनुबन्ध पत्र या ठेके के विलेख, प्रमाणक (बाउचर), लेखा पुस्तक या अन्य किसी ऐसे अभिले की छंटनी नहीं करेगी जो संपरीक्षण, निरीक्षण या जांच के प्रयोजनों के लिये अपेक्षित हो।
(ख) समिति की प्रबन्ध कमेटी उपखण्ड (क) में उल्लिखित अभिलेखों से भिन्न अन्य अभिलेखों की छंटनी किसी संकल्प द्वारा निबन्धक की पूर्व स्वीकृति लेकर कर सकती है।
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे किसी अभिलेख की छंटनी नहीं की जायेगी, जो उस लेन देन या व्यवहार से सम्बन्धित हो, जो अभिलेखों को छंटनी करने के लिये प्रबन्ध कमेटी द्वारा पारित किये गये संकल्प के दिनां से पूर्व पांच वर्ष के भीतर किये गये हो।
(ग) निबन्धक, उपखण्ड (ख) के अधीन अभिलेखों की छंटनी करने के लिये अपनी स्वीकृति देने से पूर्व सम्बद्ध क्षेत्रीय संपरीक्षा अधिकारी से यह सुनिश्चित कर लेगा कि उस अवधि के जिसम अभिलेख सम्बन्धित है, कोई संपरीक्षण सम्बन्धी अनुपालन शेष नहीं है।
365. निबन्धक, लिखित आदेश द्वारा किसी सहकारी समिति को किसी भी या सभी लेखा पुस्तकों तथा रजिस्टरों को ऐसे दिनां तक, प्रपत्र में तथा ऐसे समय के भीतर जो उक्त आदेश में निर्दिष्ट किया जाये पूरा करने का निदेश दे सकता है। समिति द्वारा ऐसा न कर सकने की या चूक करने की दशा में, निबन्धक उक्त लेखा पुस्तकों तथा रजिस्टरों को पूरा कराने में समिति के सचिव की सहायता के लिए किसी भी व्यक्ति को तैनात कर सकता है।
366. यदि नियम 365 के अधीन निबन्धक द्वारा तैनात किये गये व्यक्ति की सहायता से लेखा पुस्तके पूरी करायी जायें तो उस दशा में निबन्धक उक्त कार्य में लगे समय और श्रम को देखते हुए ऐसे व्यय की धनराशि अवधारित करने के लिए सक्षम होगा, जिसका भुगतान सम्बद्ध समिति द्वारा किया जायेगा। उक्त व्यय की धनराशि के भुगतान में चूक करने की दशा में उसे मालगुजारी की बकाया के रूप में वसूल किया जायेगा और समिति को यह धनराशि उस व्यक्ति से पाने का अधिकारी होगा जिसका कर्तव्य ऐसे लेखों को रखना हो।