अध्याय 25
सहकारी समितियों द्वारा जो विवरण पत्र, प्रतिवेदन
विवरणियां तथा सूचना प्रस्तुत करना है


367. प्रत्येक सहकारी समिति, प्रत्येक सहकारी वर्ष के लिए निम्नलिखित तैयारी करेगी -
(क) एक राजस्व विवरण पत्र जिसमें वर्ष के दौरान में समिति की प्राप्तियां और संवितरण दिखाये जायेंगे।
(ख) रोकड़ पत्र जिसमें समिति की परसम्पत्तियां और दायित्व जसे व 30 जून को हों, दिखाये जायेंगे;
(ग) लाभ हानि का विवरण पत्र जिसमें वर्ष के दौरान समिति का लाभ तथा हानि दिखाया जायेगा;
(घ) पिछले वर्ष के शुद्ध लाभ के निस्तारण के सम्बन्ध में विवरण पत्र और
(ड) ऐसे अन्य विवरण पत्र या विवरणियां जो निबन्धक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की जाये।
368. सहकारी समिति नियम 367 में उल्लिखित विवरण पत्र तथा विवरणियां उस सहकारी वर्ष की जिससे सम्बन्धित विवरण पत्र तथा विवरणियां हो, समाप्ति से एक माह के भीतर करेंगी।
369. प्रत्येक सहकारी समिति नियम 367 और 368 में उल्लिखित विवरण पत्र तथा विवरणियों की प्रतियां निबन्धक  को ऐसे प्रपत्र और उतनी संख्या में तथा उस दिनांक तक जो निबन्धक द्वारा निश्चित किया जाये प्रस्तुत करेगी।
प्रतिबन्ध यह है कि ऐसी प्रारम्भिक सहकारी समितियों की दशा में जो केन्द्रीय बैंक की सदस्य हो उक्त विवरण पत्रों तथा विवरणियों की प्रतियां केन्द्रीय बैंक को प्रस्तुत की जायेगी। जो उन्हें निबन्धक द्वारा नियत प्रपत्र में संमेकित करेंगा और उक्त समेकन निबन्धन को प्रस्तुत करेगा।
370. पूर्ववर्ती नियमों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक सहकारी समिति प्रत्ये सहकारी वर्षो के लिये निबन्धक को ऐसे समय के भीतर जो उसके द्वारा निर्दिष्ट किया जाये, ऐसी नकद धनराशि और स्टाक की (जैसे सहकारी वर्ष की समाप्ति पर हो) निबन्धक द्वारा निर्धारित रीति से यदि कोई की गई जांच का एक विवरण पत्र प्रस्तुत करेगी।
371. सहकारी समिति, निबन्धक या ऐसे अन्य प्राधिकारी को जैसा निबन्धक समय-समय पर निदेश दे, ऐसे अन्य विवरणी पत्र प्रतिवेदन या विवरणियां ऐसे प्रपत्र में और ऐसे दिनांक तक जो निबन्धक द्वारा निश्चित किये जाये, भी प्रस्तुत करेगी।
372. किसी सहकारी समिति द्वारा पूर्ववर्ती नियमों में निर्दिष्ट किसी विवरण पत्र, प्रतिवेदन या विवरणी को उनको प्रस्तुत करने के लिये निश्चित समय के भीतर, प्रस्तुत न करने पर निबन्ध आवश्यक विवरण पत्र, प्रतिवेदन या विवरणियां तैयार करने के लिये कोई व्यक्ति तैयार कर सकता। ऐसी दशा में नियम 366 के उपबन्ध लागू होंगे।