अध्याय 28
विविध


390. राज्य सरकार, राज्य की समस्त शीर्ष स्तर की सहकारी समितियों के सभापतियों से परामर्श करने के पश्चात् धारा 123 के प्रयोजन के लिए गजट विज्ञप्ति द्वारा -
(क) प्रत्येक ऐसी शीर्ष स्तर समिति को उन समितियों के सम्बन्ध में जो शीर्ष समिति से (या ऐसी समिति से सम्बद्ध हो जो शीर्ष समिति से सम्बद्ध हो) और जो राज्य सरकार की राय में उसी प्रकार का कारोबार या कार्य करती हो जैसा शीर्ष समिति का हो, सहकारी संघ प्राधिकारी के रूप में,
(ख) (1) उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन (यू0पी0सी0यू0) को समस्त कृषि ऋण समितियों (जिसके अन्तर्गत उनके केन्द्रीय बैंक भी है) के लिए और ऐसी अन्य समितियों या समितियों के वर्ग के लिए भी जो विज्ञप्ति में उल्लिखित की जाये, सहकारी संघ प्राधिकारी के रूप में, और
(2) एक या अधिक समुचित शीर्ष स्तर की समितियों को सहकारी संघ प्राधिकारी या प्राधिकारियों के रूप में,
मान्यता दे सकती है।
391. (क) निबन्धक, धारा 123 की उपधारा (2) के अधीन, समितियों के पर्यवेक्षण के सम्बन्ध में व्यय के लिये सहकारी समितियों द्वारा दिया जाने वाला अंशदान निश्चित कर सकता है यदि ऐसा अंशदान (जिसे आगे अंशदान शुल्क कहा गया है) किसी केन्द्रीय सहकारी बैंक से सम्बद्ध सहकारी समितियों द्वारा किया जाये तो निबन्धक केन्द्रीय बैंक को सम्बद्ध समितियों की ओर से पर्यवेक्षण शुल्क का आदेश दे सकता है, तदुपरान्त बैंक ऐसे शुल्क को भुगतान करेगा।
(ख) यदि कोई केन्द्रीय सहकारी बैंक उपनियम (क) के अधीन ऐसी सहकारी समितियों की ओर से जो उससे सम्बद्ध हो, पर्यवेक्षण शुल्क दे तो ऐसा बैंक सम्बद्ध सहकारी समितियों से निम्नलिखित शर्तो के अधीन हुये उसे वसूल करने का हकदार होगा-
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1. अधिसूचना संख्या-3885 सी0 1/12 सर0ए-5(1)-69-बी, दिनांक 31 अगस्त 1971 के द्वारा बढ़ाया गया।


(1) किसी ऐसी समिति से, जिसकी पिछले 30 जून को स्वाधिकृत पूंजी अपनी चालू पूंजी के 60 प्रतिशत से कम हो, कोई भी पर्यवेक्षण शुल्क नहीं लिया जायेगा।
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक आदेश द्वारा और उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे ऐसी अवधि के लिये जैसा वह आदेश में निर्दिष्ट करें, ऐसी समितियों से पर्यवेक्षण शुल्क वसूल करने की अनुज्ञा दे सकता है जिसकी स्वाधिकृत पूंजी अपनी कार्यवाहिक पूंजी के 30 प्रतिशत से कम न हो।
(2) लिये जाने वाले पर्यवेक्षण शुल्क की दर, पिछले सहकारी वर्ष के दौरान में ऐसी समिति द्वारा अर्जित ब्याज के बीसवें भाग से अधिक न होगी; और
(3) ली गयी धनराशि बैंक द्वारा गयी धनराशि से अधिक न होगी।
(ग) निबन्धक उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे किसी सहकारी समिति या सहकारी समितियों के वर्ग पर लगाये गये पर्यवेक्षण शुल्क का पूर्ण या आंशिक रूप से भुगतान करने से मुक्ति दे सकता है, तदुपरान्त बैंक मुक्त की गई धनराशि वसूल नहीं करेंगा।
392. (क) यदि कोई सहकारी समिति धारा 131 की उपधारा (7) के अधीन प्रबन्ध कमेटी का पुनः संगठन न करे तो निबन्धक समिति को उसके द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर अपनी प्रबन्ध कमेटी का पुनः संगठन करने का अवसर देने के पश्चात् ऐसे व्यक्तियों में से जो नियमों तथा समिति की उपविधियों के अधीन प्रबन्ध कमेटी की सदस्यता के लिए अर्ह हों, नाम निर्देशन द्वारा समिति की प्रबन्ध कमेटी संघठित कर सकता है।
(ख) यदि प्रबन्ध कमेटी उपनियम (क) के अधीन निबन्धक द्वारा नाम निर्दिष्ट की जाये तो निबन्धक ऐसे नाम निर्देशन के छः माह के भीतर समिति के लिए उतनी संख्या में सदस्य के जितने समिति की उपविधियों के अधीन निर्वाचित किये जाने के लिए अपेक्षित हों, निर्वाचन के लिए समिति के सामान्य निकाय की सामान्य बैठक बुलायेग। इस प्रकार हुए निर्वाचन के परिणामस्वरूप पुनः संघठित कमेटी उपनियम (क) के अधीन निबन्धक द्वारा नाम निर्दिष्ट कमेटी का स्थान लेगी।
(ग) उपनियम (क) के नाम निर्दिष्ट प्रबन्ध कमेटी नियम 437 में निर्धारित रीति से अपनी प्रथम बैठक में अपने में से समिति का एक सभापति तथा उप सभापति निर्वाचित करेगी। इस प्रकार निर्वाचित सभापति तथा उप सभापति का कार्य उतना ही होगा जितना नाम निर्दिष्ट प्रबन्ध कमेटी का हो।
1[393 (1) किसी शीर्ष समिति से भिन्न कोई सहकारी समिति अपनी प्रबन्ध कमेटी में उतने सदस्य रख सकती है जितने के लिये उसकी उपविधियों में व्यवस्था की गयी हो, किन्तु अधिक से अधिक पन्द्रह व्यक्ति हो सकते है। किसी शीर्ष समिति के मामले में अधिकतम सत्रह व्यक्ति हो सकते है। समिति की कोई अन्य कमेटी या उप कमेटी  उसकी प्रबन्ध कमेटी से छोटी होगी और किसी भी स्थिति में ऐसी कमेटी या उप कमेटी में सात से अधिक सदस्य नहीं होगी।
प्रतिबन्ध यह है कि प्रत्येक सहकारी समिति के प्रबन्ध कमेटी में तीन स्थान, जिनमें से एक अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिये एवं नागरिकों के अन्य पिछडे वर्गो और एक महिला के लिये आरक्षित होंगे;
अग्रेत्तर प्रतिबन्ध यह है कि उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ, केन्द्रीय और प्रारम्भिक उपभोक्ता सहकारी समितियों की स्थिति में तीन स्थान जिनमें से दो महिलाओं के लिए और एक अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों या नागरिकों के अन्य पिछडे वर्गो के लिये आरक्षित होगा।
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1. अधिसूचना संख्या-1028/49-1-99-7(11)-97 लखनऊ दिनांक 26 फरवरी 1999 द्वारा बदला गया।


 

(2) Where a co-operative society referred to in sub-rule (1) for any reasons, whatsoever, fails to elect in the committee of management, such number of persons for whom seats are reserved or the vacancy occurs amongst them the vacancy or the deficiency may be filled or made good as the case may be, by the 1[Joint Registrar-in-charge or Deputy Registrar-in-charge] or by an officer authorised by it, in this behalf by nominating persons belonging to such class in the committee of management of such society.


(3) उपनियम (2) के अधीन नाम निर्दिष्ट कोई व्यक्ति राज्य सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा।


2[393क . इस नियमावली या समिति की उपविधियों में किसी बात के होते हुये भी, किन्तु नियम 453 के अधीन रहते हुये, यदि नियम 393 के उपनियम (1) के प्रतिबन्धात्मक खण्ड में निर्दिष्ट किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी में इस नियमावली के प्रारम्भ होने के दिनांक पर, यथास्थिति, निर्बल वर्ग के उतने व्यक्ति या उतनी महिलायें नहीं है जितना उपर्युक्त नियम में निर्दिष्ट किया गया है तो राज्य सरकार ऐसी समितियों की प्रबन्ध कमेटी में उतने व्यक्ति नाम-निर्दिष्ट करेगी जितने नियम 393 के उपनियम (1) के उक्त प्रतिबन्धात्मक खण्ड में निर्दिष्ट सीमा तक प्रतिनिधित्व करने के लिए आवश्यक हो और इस प्रकार नाम निर्देशन कर दिये जाने पर सम्बद्ध समिति की प्रबन्ध कमेटी निबन्धक के प्राधिकार से पर्ची डालकर संख्या में व्यक्तियों को निवृत्त (रिटायर) करेगी जिससे कि प्रबन्ध कमेटी के ऐसे नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों को स्थान दिया जा सके।
394ख. यदि किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल इस नियमावली के प्रारम्भ होने के दिनांक को समाप्त न हुआ हो और ऐसी समिति की प्रबन्ध कमेटी में उतनी संख्या में व्यक्ति नहीं है जितने की व्यवस्था उपर्युक्त नियमावली में की गई है तो राज्य सरकार ऐसी समिति की उपविधियों में किसी बात के होते हुये भी, उसकी प्रबन्ध कमेटी में उतनी संख्या में व्यक्तियों को नाम निर्दिष्ट करेगी जितने ऊपर निर्दिष्ट नियम से विनिर्दिष्ट सीमा तक ऐसे व्यक्तियों का प्रतिनिधत्व करने के लिए आवश्यक हों और इस प्रकार नाम निर्देशन कर दिये जाने पर सम्बद्ध समिति की प्रबन्ध कमेटी पर्ची डाल कर अपेक्षित संख्या में व्यक्तियों को निवृत्त करेगी जिसके कि नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों को स्थान दिया जा सके।
393 ग.3[* * *]
4[394. किसी सहकारी समिति की सामान्य निकाय या प्रबन्ध कमेटी द्वारा पारित कोई भी संकल्प, यथास्थिति, ऐसी सामान्य निकाय या प्रबन्ध कमेटी द्वारा उक्त संकल्प पारित होने के दिनांक से छः माह महीने के भीतर, निबन्धक की पूर्व स्वीकृति के बिना विखण्डित, परिवर्तित या संशोधित नहीं किया जायेगा।
395. अधिनियम या नियमावली के अधीन किसी भी प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया प्रत्येक नोटिस या आदेशिका लिखित होगी तथा ऐसे प्राधिकारी द्वारा या उक्त प्राधिकारी द्वारा यथाविधि तदर्थ प्राधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित और उसे जारी करने वाले प्राधिकारी की मुहर आदि को ही, लगाकर प्रमाणित की जायेगी।
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1. अधिसूचना संख्या-1035/49-1-99-7(11)-97 टी0सी0 दिनांक 27 फरवरी 1999 द्वारा प्रतिस्थापित।
2. अधिसूचना सं0 3815/सी-1-77-7-(5)-1977, दिनांक 24 दिसम्बर 1977 के द्वारा रखे गये।
3. अधिसूचना सं0 3815/सी-1-77-7-(5)-1977, दिनांक 24 दिसम्बर 1977 के द्वारा रखे गये।
4. अधिसूचना सं0 196/सी-12 सी0ए0 5(1)-69-बी0 दिनांक 15 जून 1972 के द्वारा रखे गये।


396. कोई भी सहकारी समिति, समिति के किसी भी भू-गृहादि या उसके भाग को जो समिति के कारोबार के लिए हो ऐसे कारोबार या उससे सम्बद्ध कार्यो से भिन्न किसी भी अन्य प्रयोजन के लिये न तो प्रयुक्त करेगी और न प्रयुक्त करने की अनुमति देगी।
397. कोई भी सहकारी समिति निबन्धक की पूर्व स्वीकृति बिना किसी सहकारी समिति से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति के साथ भागीदारी नहीं करेगी। भागीदारी की शर्ते भी अनुबन्ध निष्पादित करने के पूर्व निबन्धक से अनुमोदित करानी होगी। निष्पादित भागीदारी अनुबन्ध की एक प्रतिलिपि निबन्धक को प्रस्तुत की जायेगी।
1[398. धारा 103 की उपधारा (1) के खण्ड (8) से अधीन, एतद्द्वारा, घोषित किया जाता है कि अधिनियम के अधीन यह एक अपराध होगा, यदि-
(क) किसी सहकारी समिति का कोई अधिकारी या प्रबन्ध कमेटी का सदस्य किसी उपविधि के प्रस्तावित संशोधन पर नियम 28 के उपनियम (ख) का उल्लंघन करके कार्य करें।
(ख) किसी सहकारी समिति द्वारा पता बदल दिये जाने की स्थिति में समिति का सचिव नियम 35 के उपनियम (क) या (ख) के अधीन अपेक्षित कार्यवाही करने में विफल रहे;
(ग) कोई व्यक्ति नियम 337 के उपनियम (1) के अधीन वसूली अधिकारी (रिकवर आफीसर) द्वारा दिये आदेशों का पालन न करें;
(घ) सहकारी समिति का कोई अधिकारी या सदस्य नियम 440 के उपनियम (3) और नियम 416 के खण्ड (ख) के अधीन देने में विफल रहें;
(ड) कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी सहकारी समिति का निर्वाचन करना चाहे, कपट या दुव्यर्पदेशन से नामांकन पत्र दाखिल करे;
(च) समिति का कोई अधिकारी निर्वाचन के सम्बन्ध में उपगत व्यय का भुगतान करने में विफल रहे,
(छ) सचिव व प्रबन्ध निदेशक या नियम 441 के उपनियम (4) के अधीन निर्वाचन अधिकारी द्वारा यथानिदेशित विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्वाचन से सम्बन्धित सूची तैयार करने में विफल रहे।
399. किसी सहकारी ऋण समिति का कोई सदस्य अथवा कोई व्यक्ति जो किसी सहकारी ऋण समिति की सदस्यता के लिए प्रार्थी हो, ऐसी समिति को अपनी वित्तीय स्थिति की सूचना प्रपत्र में प्रस्तुत करेगा जो निबन्धक द्वारा निय किया जाये और जब कभी वह अपनी अचल सम्पत्ति सवंमित या हस्तान्तरित करे उसकी सूचना भी तुरन्त समिति को देगा।
400. कोई भी समिति अपने उद्देश्य में या विचारार्थ अथवा विमर्श हेतु विषय को सम्मिलित न करेगी जिसमें समिति या उसके सदस्यों के बीच या समिति तथा सदस्य के बीच कोई साम्प्रदायिक, धार्मिक या राजनैतिक विवाद उत्पन्न हो जाने की सम्भावना हो।
401. (1) कोई भी सहकारी समिति किसी भी कार्यवाही या वाद के जिसमें वह स्वयं कोई पक्ष न हो, व्ययों को वहन न करेगी और
(2) इस प्रकार की कार्यवाहियों और वाद के फलस्वरूप समिति के हितों पर इनका प्रभाव पड़ने की सम्भावना हो।
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1. अधिसूचना सं0 3815/सी-1-77-7-(5)-1977, दिनांक 24 दिसम्बर 1977 के द्वारा रखे गये।