अध्याय 3
उपविधियॉ



13.निबन्धक समिति या समितियों के प्रत्येक वर्ग के लिए, प्रतिमान उपविधियॉ  बना सकता है और समय समय पर उसमें ऐसे परिवर्तन कर सकता हजिन्हें वह आवश्यक समझे।
14. प्रतिमान उपविधियॉ जो निबन्धक की ओर से किसी समिति के लिए समुपयुक्त हों, ऐसे संशोधन के साथ, यदि कोई हों, समिति द्वारा अंगीकार की जा सकती हैं, जिन्हें समिति अपनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुये आवश्यक समझें।
15. सहकारी समिति की उपविधियों में अधिनियम और नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, निम्नलिखित बातें होंगी अर्थात-
(1) समिति का नाम और मुख्यालय,
(2) उसका कार्य-क्षेत्र,
(3) समिति के मुख्य उद्देश्य,
(4) समिति के गौण उद्देश्य
(5) निधि लेने की सीमा, रीति और शर्ते तथा अंशपूजी की न्यूनतम और
अधिकतम धनराशि जिसे कोई सदस्य रख सकता है,
(6) प्रयोजन जिसके लिये उसकी निधियों का प्रयोग किया जा सकेगा,
(7) सदस्यता की अनुमति, उनकी शर्ते और अर्हतायें,
(8) सदस्य के लिए अनर्हतायें,
(9) सदस्यता के अधिकार के प्रयोग करने के पूर्व शर्त के रू में किया जाने वाला भुगतान और अर्जित होने वाला हित और तत्पश्चात  किया जाने वाला भुगतान, यदि कोई हो,
(10) नाम मात्र, सम्बद्ध  और सहानुभूतिकर सदस्यों सहित सदस्यों के विशेषाधिकार, अधिकार,कर्तव्य और दायित्व,
(11) किसी सदस्य द्वारा किसी देय धनराशि का भुगतान न करने के परिणाम,
(12) सदस्यों द्वारा उपविधियों का उल्लंघन करने के परिणाम,
(13) समिति सामान्य निकाय का संघटन,
(14) सदस्यता वापस लेना, उससे हटाया जान और निष्कासन,
(15) प्रबन्ध कमेटी और उन कमेटियों का भी, यदि कोई हों, संघटन,
(16) सामान्य निकाय, प्रबन्ध कमेटी और अन्य उप कमेटियों की, यदि कोई हो, बैठक बुलाना ऐसी बैठकों के लिए नोटिस, कार्य और गणपूर्ति, ऐसी बैठकों को प्रास्थागित तथा स्थगित करने की शर्त और रीति,
(17) समिति की प्रबन्ध कमेटी, उप कमेटियों, सभापति, उप सभापति, स्चिव, और अन्य अवैतनिक या वैतनिक अधिकारियों के कृत्य अधिकार तथा कर्तव्य,
(18) धारा 121 और 122 के अधीन बनाये गये विनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति,उनका निलम्बन, हटाया जाना और शास्ति,
(19) दूसरी समिति की सदस्यता के लिए अनुमति और सम्बद्ध  विषय,
(20) लेखा बहियॉ और रजिस्टर रखना, विवरणियॉ तथा अपेक्षित विवरण पत्र तैयार करना और प्रस्तुत करना,,
(21) नकद धनराशि और महत्वपूर्ण लेख्यों की अभिरक्षा, अनुरक्षण और उन्हे रखना,
(22) लाभ से अन्य निधियों का सृजन,अनुरक्षण और प्रयोग,
(23) निर्वाचन से सम्बन्धित प्रक्रिया और अन्य विषय,
(24) विषय जो समिति के संघटन और कार्य प्रणाली से तथा उसके कार्य के प्रबन्ध से आनुषडगिक हो,
(25) कोई अन्य विषय जिसके लिये समिति को अधिनियम या नियमों के उपबन्धों के अधीन उपविधियॉ बनाना अपेक्षित हो।
16.(क) सहकारी ऋण समिति की दशा में अधिनियम तथा नियमावली के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, उपविधियों के अन्तर्गत निम्नलिखित भी विषय होगे-
(1) ऋण स्वीकार करने के लिए प्रयोजन, प्रक्रिया, शर्ते और प्रतिभूति और वसूली की अवधि को बढ़ाना, उसे स्थगित करना और उसके वसूली की रीति तथा परिस्थितियॉ जिसमें ऋण वापस कराया जाये,
(2) सदस्यों के ऋण की सीमा निश्चित करना,
(3) किसी सदस्य को अनुज्ञेय अधिकतम ऋण,
(4) ऋण पर लिये जाने वाले ब्याज की अधिकतम दर,
(5) प्रतिभू उसके कर्तव्य   और उत्तरदायित्व,
(6) ऋण बकाया रह जाने अथवा उसका दुरूपयोग करने के परिणाम,
(7) यदि समिति अपने सदस्यों को कृषि कार्यो की सुविधायें दे और उसे राज्य सरकार से वित्तीय सहायता मिली हो तो एक निधि बनाना जो कृषि ऋण स्थिरीकरण निधि कहलायेगी,
(ख) ऋण न देने वाली सहकारी समिति की दशा में, अधिनियम तथा नियमावली के उपबन्धों के अधीन रहते हुये उपविधियों में समिति के कार्य करने की रीति, जिसके अन्तर्गत उत्पादन क्रय विक्रय, स्टाक रखना और ऐसे कार्य कलापों का संचालन यदि कोई हो, जो वाणिज्यिक न हो, भी है।
17. जब किसी सहकारी समिति द्वारा उसके दायित्वों के स्वरूप या आयति में परिवर्तन करने का प्रस्ताव हो तो संगत उपविधियों में संशोधन करने के लिए एक संकल्प नियम 24 से 27 तक में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पारित किया जायेगा। सामान्य निकाय से ऐसे सदस्यों के नाम जो संकल्प के पक्ष में या उसके विपक्ष में मत दें, बैठक की कार्यवाहियों में अलग अलग अभिलिखित किये जायेंगे और लेने वाला प्रत्येक सदस्य अपने नाम के सामने हस्ताक्षर करेगा।
18. नियम 17 के अधीन पारित संकल्प की एक प्रति और धारा 11 की उपधारा (2) में व्यवस्थित नोटिस समिति के सभी सदस्यों और ऋणदाताओं को भेजी जायेगी और संकल्प की एक प्रति तथा नोटिस समिति के सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित की जायेगी और उसकी दूसरी प्रति निबन्धक को भेजी जायेगी।
19. कोई सदस्य या ऋणदाता जो धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन अपने विकल्प का प्रयोग करना चाहे तदनुसार समिति को लिखित रूप में रजिस्ट्री डाक भेजकर या अभिस्वीकृति के अन्तर्गत व्यक्तिगत रूप से देकर सूचित करेगा, किन्तु प्रतिबन्ध यह है ‍ि वह सदस्य जो नियम 17 में अभिदिष्ट बैठक में उपस्थित रहा हो और जिसने संकल्प के पक्ष में मत दिया हो, अपने अंशों या जमा की गयी धनराशियों को वापस करने की मांग के कारण देगा।
20. धारा 11 की उपधारा (2) में उल्लिखित अवधि के भीतर समिति द्वारा विकल्प प्राप्त हो जाने के पश्चात समिति वापस लेने के विकल्पों के आधार पर दावों का क्रमबद्ध   भुगतान करने के लिए प्रपत्र छ में एक  योजना तैयार करेगी। समिति दायित्व से सम्बन्धित उपविधियों में प्रस्तावित परिवर्तन के साथ योजना निबन्धक को प्रस्तुत करेगी। निबन्धक योजना और उपविधियों संशोधन के प्रस्ताव पर जच करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखेगा-
(क) विकल्प सद्भावना से किये गये है,
(ख) योजना से समिति के अस्तित्व या उचित रूप से कार्य करने पर प्रतिकूल प्रभाव नही पडता है।
(ग) समिति के पास योजना के अन्तर्गत भुगतान करने के ‍िलए पर्याप्त निधि है,
(घ) समिति के हि में कोई अन्य संगत तथ्य।
21. जब निबन्धक योजना का अनुमोदन कर दे तब समिति इस प्रकार अनुमोदित योजना के अनुसार ऋणदाताओं तथा सदस्यों को भुगतान करेगी और इस आशय की सूची निबन्धक को देगी।
22. अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उपविधियों में संशोधन का प्रस्ताव तब तक स्वीकर नही किया जायेगा ब तक कि निबन्धक को यह समाधान न हो जाये कि धारा 11 और 12 और नियम 17 से 21 तक की अपेक्षाओं का पालन कर दिया गया है और समिति ने योजना के अनुसार भुगतान कर दिया है।
23. उपविधियों में संशोधन करने पर निबन्धक तदनुसार निबन्धन रजिस्टर के दायित्व स्तम्भ मे दर्ज करेगा और नियम 29 में की गयी व्यवस्था के अनुसार कार्यवाही भी करेगा।