अध्याय 4
उपविधियों का संशोधन के सम्बन्ध में प्रक्रिया


24. किसी सहकारी समिति की उपविधियों में संशोधन करने के प्रयोजन के लिए बुलायी गयी किसी सामान्य बैठक में उपस्थित कम से कम दो तिहाई सदस्यों के मत से पारित संकल्प द्वारा सहकारी समिति की उपविधियों में संशोधन किया जा सकता है जिसके अन्तर्गत सम्पूर्ण उपविधियों को नवीन उपविधियों से प्रतिस्थापित करना भी हैः
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक द्वारा पहले से अनुमोदित प्रतिमान उपविधियों या संशोधन की दशा में अथवा ऐसे संशोधन जिन्हें करने के लिए निबन्धक धारा 14 की उपधारा के अधीन अपेक्षा करें, संकल्प केवल साधारण बहुमत द्वारा पारित किया जा सकता है।
1[25. उपविधियों के संशोधन पर विचार करने के निमित्त सामान्य निकाय की एक सामान्य बैठक बुलाने के लिए सदस्यों को तीस दिन की नोटिस, जिसके साथ प्रस्तावित संशोधन की एक प्रति भी हगी दी जायेगीः
प्रतिबन्ध यह है कि यदि नई उपविधियों द्वारा सम्पूर्ण उपविधियों को प्रतिस्थापित करके संशोधित करना हो या धारा 14 की उपधारा (1) के अधन निबन्धक से प्राप्त किसी आदेश के अनुसरण में संशोधन करना हो तो समिति के लिये यह आवश्यक न होगा ‍ि वह सदस्यों को बैठक की नोटिस के साथ प्रस्तावित संशोधन की एक प्रति भेजे किन्तु प्रस्तावित संशोधन नोटिस जारी किये जाने के दिनांक से समिति और उसके शाखा कार्यालयों में, यदि कोई हो, कार्यालय समय के भीतर निरीक्षण के लिए उपबन्ध रहेगा और इस तथ्य की सूचना को नोटिस द्वारा या उसके माध्यम से दी जायेगीः
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1.अधिसूचना सं0 1107-सी/12-सी0ए0-5(1)-69 दिनांक 24 फरवरी, 1969, उत्तर प्रदेश गजट, भाग -1-क, दिनांक 2 अगस्त, 1969 के द्वारा रखे गये।
अग्रेतर प्रतिबन्ध यह है कि यदि बैठक धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन निबन्धक से प्राप्त किसी आदेश के अनुसरण में बुलायी जाये तो पन्द्रह दिन की नोटिस पर्याप्त होगीः
प्रतिबन्ध यह भी है कि यदि नियम 26 के प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अधीन निबन्धक की अनुज्ञा से कम की गयी गणपूर्ति वाली कोई बैठक बुलाई जाये तो ऐसी बैठक के लिए सात दिन की नोटिस पर्याप्त होगी।
26. ऐसी बैठक के लिए जिसमें किसी उपविधि के संशोधन पर विचार किया जाये, समिति दायित्व वाली समिति की दशा में सामान्य निकाय के सदस्यों की कुल संख्या के कम से कम तक तिहाई की गणपूर्ति और अन्य सभी दशाओं में दो तिहाई की गणपूर्ति अपेक्षित होगीः
प्रतिबन्ध यह है कि यदि कोई समिति दायित्व वाली समिति की बैठक में अपेक्षित गणपूर्ति न हो सके तो निबन्धक समिति क यह निदेश दे सता है ‍ि वह दूसरी बैठक बुलाये जिसमें अपेक्षित गणपर्ति कम करके 1/5 कर दी जायेगी और सदस्यों को इस तथ्य की लिखित सूचना देः
प्रतिबन्ध यह भी है कि निबन्धक द्वारा पहले से अनुमोदित प्रतिमान उपविधियों या संशोधनों की दशा में अथवा निबन्धक द्वारा धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन यह अपेक्षा किये जाने पर कि उनमें समिति द्वारा संशोधन किया जाये तो अपेक्षित गणपूर्ति को उस दशा में जब बैठक 1/5 की कम की गयी गणपूर्ति के अभाव में न ह 1/7 तक और कम करने की निबन्धक द्वारा अनुज्ञा दी जा सती है। यह तथ्य की बैठक 1/7 की और कम की गई गणपूर्ति से होगी, ऐसी बैठक को कार्य सूची के नोटिस में उल्लिखित किया जायेगा।



टिप्पणी



यदि किसी समिति की प्रबन्ध कमेटी निलम्बित भी हो और प्रशासक भी नियुक्त कर दिया गया हो तो भी समिति का साधारण निकाय बना रहता ह और प्रशासक की साधारण निकाय की बैठक बुलाने और उपविधियों का संशोधन कराने में कोई भी बात बाधक नही होत। उपविधियों का संशोधन केवल साधारण निकाय द्वारा एक संकल्प पारित करके किया जा सकता है, न कि प्रबन्ध कमेटी द्वारा। इस अधिनियम के अधीन निर्मित नियम 24 तथा 25 किसी समिति की उपविधियों में संशोधन करने की प्रणाली का उपबन्ध करते है। यह तर्क कि प्रशासक द्वारा पारित किये गये संकल्प के अनुसरण में किये गये संशोधन विधिमान्य है, स्वीकार नही किया जा सकता।
27.प्रत्येक ऐसी दशा में जिसमें किसी समिति ने उपविधिय के संशोधन के लिये संकल्पित किया हों, संशोधन के निबन्धक के लिए प्रार्थना पत्र प्रपत्र ज में निबन्धक को ऐसी बैठक के जिसमें संशोधन संकलित किया गया हो( जब तक कि निबन्धक विशेष कारणों के विलम्ब को क्षमा न कर दे) दिनांक से पन्द्रह दिन के भीतर दिया जायेगा और उसके साथ निम्नलिखित भी होगे-
(क) प्रस्तावित संशोधन की तीन प्रतिय,
(ख) संशोधन के संकल्प की तीन प्रमाणित प्रतिय जिन पर सहकारी समिति की ओर से सचिव के हस्ताक्षर तथा बैठक के सभापति के हस्ताक्षर होगे,
(ग) समिति की वर्तमान निबद्ध  उपविधिय, और
(घ) समिति के निबन्धक का प्रमाण पत्र।
28. (1) उपविधि के किसी संशोधन का निबन्धन करने के प्रस्ताव की परिनिरीक्षा करने पर, यदि निबन्धक का यह समाधान हो जाये कि-
(i) समिति की उपविधियों के संशोधन के लिए नियत प्रक्रिया का उचित रूप से
पालन किया गया है, और
(ii) प्रस्ताव-
(क)धारा 12 की उपधारा (2) की अपेक्षाओं के अनुरूप है;
(ख) समिति की उपविधियों के  किसी अन्य अपबन्ध से असंगत नही है;
(ग) यदि समिति के नाम में परिवर्तन करने से सम्बन्धित हो तो वह ऐसा नही है जिससे ‍ि वह समिति के उद्देश्यो, कार्य कलापो या कार्यक्षेत्र के सम्बन्ध में भ्रामक हो;
(घ) अन्य रूप उसे समिति के हित या लोक हित के प्रतिकूल नही है तो वह संशोधन को निबद्ध कर सकता है।
(2) निबन्धक द्वारा संशोधन निबद्ध न करने का आदेश तब तक नही दिया जायेगा जब तक कि समिति को सुनवाई का अवसर न दे दिया जाये।
(3) उपविधियों का कोई भी संशोधन, उसके निबन्धन के पूर्व कार्यन्वित न होगा।
29. जब निबन्धक नियम 28 (1) के अधीन कोई संशोधन निबद्ध करे तो वह-
(क) निम्नलिखित कार्य या तो स्वयं करेगा अथवा उसे करायेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा-
(1) निबन्धक रजिस्टर के संगत स्तम्भ में संशोधन से सम्बद्ध प्रविष्टि,
(2) अपने कार्यालय में मूल उपविधि को कार्यालय प्रतिलिपि में संशोधन से सम्बद्ध पृष्ठांकन,
(ख) अपने कार्यालय के अभिलेख के लिये इस प्रकार निबद्ध की एक प्रतिलिपि रख लेगा,
(ग) निबद्ध संशोधन की एक प्रमाणित प्रति-
(1) सम्बद्ध सहकारी समिति को,
(2) ऐसी केन्द्रीय समिति को, यदि कोई हो, जिसमें सम्बन्धित समिति सम्बद्ध हो, यदि उसकी राय में उक्त संशोधन केन्द्रीय समिति के लिए किसी प्रकार महत्वपूर्ण हो,
(घ) समिति को;
(1) निबन्धन प्रमाण पत्र पर उपविधि के संशोधन के निबन्धन के दिनांक को लिखकर उसे, और
(2) संशोधन के सम्बन्ध में पृष्ठांकन सहित मूल उपविधियां लौटा देगा या लौटवा देगा।
1[29-क. जह किसी सहकारी समिति की उपविधि किसी नई उपविधि द्वारा प्रतिस्थापित की जायें, वह  ‍िनबन्धक, सभापति और उप सभापति सहित प्रथम प्रबन्ध कमेटी को नामनिर्दिष्ट कर सकता है, नामनिर्दिष्ट प्रबन्ध कमेटी तब तक पदधारण करेगी जब तक प्रबन्ध कमेटी का सम्यक गठन न हो जायेः
प्रतिबन्ध यह है कि निबन्धक,केवल उन्ही समितियों की प्रबन्ध कमेटी को नानिर्दिष्ट करेगा जह  निर्वाचित प्रबन्ध कमेटी विद्यमान न हो, ऐसी समितियों के मामलों में जह उपविधि किसी नयी उपविधि द्वारा प्रतिस्थापित की गयी हो, किन्तु निर्वाचित प्रबन्ध कमेटी अब भी विद्यामान हो, वह निबन्धक को यह शक्ति होगी ‍ि वह निर्वाचित प्रबन्ध कमेटी के कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात ही प्रबन्ध कमेटी को नानिर्दिष्ट करें।
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1. नई नियमावली 29-क अधिसूचना सं0 965/49-1-2003-500(24)/2003 दिनांक 28 मई 2003 द्वारा बढ़ायी गयी जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4 खण्ड (ख) दिनांक 28 मई 2003 को प्रकाशित हुआ।

30. निबन्धक जैसा कि धारा 14 में व्यवस्थित है, किसी सहकारी समिति से अपनी उपविधियों में निम्नलिखित परिस्थितियों में संशोधन करने की अपेक्षा कर सकता है-
(क) यदि समिति का निबद्ध नाम, उनके कार्य कलाप, सदस्यता का कार्य क्षेत्र के सम्बन्ध में भ्रामक हो अथवा नियम 8 (घ) के उपबन्धों से असंगत हो;
(ख) यदि समिति की प्रबन्ध कमेटी ने स्वयं कोई संशोधन प्रस्तावित किया हो, किन्तु अपेक्षित गणपूर्ति के अभाव में सामान्य निकाय की बैक न होने के कारण सामान्य बैठक में उस पर विचार न किया जा सका हो;
(ग) यदि संशोधन अपविधियों, अधिनियम, नियम अथवा विनियमों के किन्ही उपबन्धों की किन्ही असंगतता को दूर करने के लिए आवश्यक हो;
(घ) यदि संशोधन अधिनियम और नियमों के उपबन्धों के अनुसार समिति के संगठन में किसी दोष से बचने के लिये आवश्यक हो;
(ड.) यदि संशोधन ऐसे सहकारी कार्य कलापों के सम्बन्ध में जिससे समिति सम्बद्व हो भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी नीति को कार्यान्वित करने के लिये आवश्यक हो;
(च) यदि संशोधन सहकारी समितियों के निर्वाचन की प्रक्रिया में सुधार करने या उसके सुव्यवस्थीकरण के लिए आवश्यक हो;
(छ) यदि समिति के कार्य कलापों के सम्बन्ध में उसकी सदस्यता या उसके कार्य क्षेत्र के सुव्यवस्थाकरण के लिए आवश्यक हो;
(ज) यदि कई संशोधन उसी वर्ग या श्रेणी जिसकी समिति हो, की अन्य सहकारी समितियों द्वारा पहले से ही अंगीकार कर लिया गया हो;
(झ) यदि संशोधन समिति के सामान्य निकाय द्वारा पहले ही प्रस्तावित किया जा चुका है, किन्तु जो निबन्धन के लिये निबन्धक को प्रस्तुत न किया गया हो ओर निबन्धक संशोधन को लोकहित में या समिति के हित में आवश्यक समझे,
() यदि निबन्धक की राय में समिति में विशेष वर्ग का आधिपत्य हो अथवा उसमें दलबन्दी हो और संशोधन समिति को अपना कार्य उचित रूप से करने के लिये तथा उसे इस प्रकार के आधिपत्य अथवा दलबन्दी से बचाने के लिए, आवश्यक हो,
31. यदि निबन्धक धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन किसी उपविधि का संशोंधन करने के लिये आदेश जारी करे तो आदेश में निम्नलिखित बातें होगी-
(क) प्रस्तावित संशोधन कल पाठ,
(ख) अवधि के भीतर ऐसा संशोधन समिति द्वारा अंगीकार किया जाना अपेक्षित हो,
(ग) संशोधन का प्रस्ताव करने के कारण।
32. यदि समिति प्रस्तावित संशोधन करने के सम्बन्ध में आपत्ति करे तो निबन्धक, समिति की आपत्तियों पर विचार करेगा और यदि उसका यह समाधान हो जाये कि समिति की आपत्तियां ठीक है तो वह आगे की कार्यवाहियां बन्द कर देगऔर यदि उसका समाधान न हो तो वह धारा 14 की उपधारा (2) में व्यवस्थित आगे की कार्यवाही करेगा।
33. जब धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन कोई संशोधन निबद्ध किया गया हो तो उसकी प्रविष्टि इस प्रयोजन के लिए पत्र झ में रखे गये रजिस्टर में प्रविष्ट की जायेगी और इस प्रकार निबद्ध संशोधन की एक प्रति सम्बद्व सहकारी समिति को भेजी जायेगीः संशोधन के सम्बन्ध में नियम 29 के उपनियम (क), (ख) और (ग) में व्यवस्थित कार्यवाही भी की जायेगी
यदि समिति ने निबन्धन प्रमाण पत्र तथा मूल निबद्व उपविधिय निबन्धक को भेजी जायेगी। यदि समिति ने निबन्धन प्रमाण पत्र तथा मूल निबद्ध उपविधिय  निबन्धक को भेजी हो तो नियम 29 के उपनियम (घ) के अनुसार भी कार्यवाही की जायेगी।
34. निबन्धक प्रत्येक सहकारी समिति का नाम और पता नियम 10 में निर्दिष्ट निबन्धन रजिस्टर में रखेगा।
35. (क) प्रत्येक सहकारी समिति अपना पूरा पता निबन्धक को लिखित रूप से सूचित करेगी जो समिति की निबद्ध उपविधियों के संगत उपबन्धों से असंगत न होगा। समिति द्वारा इस प्रकार सूचित पते में जिले और ग्राम टाउन, नगर म्युनिसिपिल बोर्ड, मुहल्ला, सड़क गृह संख्या और डाक सर्किल के भी नाम होंगे जो सभी प्रकार से पूरे पते के लिए आवश्यक हों। उस पत्र पर जो पते में किसी परिवर्तन के लिए धारा 107 की अधीन निबन्धक को भेजा जाये, सचिव द्वारा हस्ताक्षर तथा सभापति द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किया जायेगा।
(ख)निबन्धक उपनियम (क) के अधीन समिति से पत्र प्राप्त होने पर पुस्तकों में पहले से निबद्ध पते में संशोधन करेगा और यदि वह समिति के कार्य कलापों, सदस्यता या व्यवसाय सम्बन्ध को ध्यान में रखते हुये विज्ञापित कराना आवश्यक समझे तो वह समिति के उ क्षेत्र के प्रमुख समाचार पत्र मे उक्त संशोधन विज्ञापित करने की अपेक्षा कर सकता है।
36. जब तक कि समिति द्वारा निबन्धक को नियम 35 के उपनियम (क) में निर्धारित रीति से पते में परिवर्तन की सूचना न दे दी जाये तब तक समिति के सचिव की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि समिति के अतिम ज्ञात पते पर सम्बोधित प्रत्येक पत्र समिति को प्राप्त हो जाये।
37. यदि कोई दो या अधिक सहकारी समितिय धारा 15 के अधीन समामेलन या विलयन के लिए प्रस्ताव करें अथवा यदि कोई सहकारी समिति धारा 16 के अधीन अपने विभाजन का प्रस्ताव करे तो उक्त प्रयोजन के लिए बुलायी जाने वाली सामान्य बैठक के दिनांक से पूर्व पूरे पन्द्रह दिन की सूचना निबन्धक को प्रपत्र य में रजिस्ट्री डाक द्वारा भेजी जायेगी अथवा अभिस्वीकृति के अधीन व्यक्तिगत रूप से दी जायेगी।