अध्याय5
सदस्यता



1[38. (1) (क) धारा 26-क के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, सहकारी समिति की सदस्यता पाने के लिए प्रत्येक प्रर्थना पत्र सचिव को दिया जायेगा जो प्रार्थना पत्र को यथाशीघ्र समिति की उपविधियों के अधीन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष (जिसे आगे सक्षम प्राधिकारी कहा गया है) समिति की सदस्यता दिये जाने के प्रश्न पर निर्णय देने के लिए प्रस्तुत करेगा।
स्पष्टीकरण-नाम मात्र के या सम्बद्ध सदस्यता के रूप में सदस्यता पाने के किसी प्रार्थना पत्र के निस्तारण के लिए समिति की प्रबन्ध कमेटी द्वारा समिति के किसी अधिकारी को सक्षम प्राधिकारी होने का प्राधिकार दिया जा सकता है।,
(ख) सक्षम प्राधिकारी सदस्यता पाने के लिए दिये गये प्रार्थन पत्र पर विचार करेगा और प्रार्थी को समिति की सदस्यता दिये जाने या न दिये जाने के सम्बन्ध में अन्तिम निर्णय देया। यह निर्णय, जब तक कि किन्ही अपरिहार्य कारणों से ऐसा करना सम्भव न हो-
(1) नाम मात्र या सम्बद्ध सदस्य की दशा में समिति को प्रार्थना पत्र. प्राप्त होने के पन्द्रह दिनों के भीतर,तथा
-------------------------------------
1.अधिसूचना सं0 3851/सी-1-77(5)-1977, दिनांक 24 दिसम्बर, 1977, के द्वारा रखे गये
(2) किसी अन्य दशा में, समिति को प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के पैंतीस दिन के भीतर लिया जायेगा।
निर्णय की सूचना प्रार्थी को निर्णय लिये जाने के सात दिन के भीतर दी जायेगी।
(ग) यदि सदस्यता के लिये दिये प्रार्थना पत्र  पर कोई निर्णय न लिया गया हो ओर उसकी सूचना प्रार्थी को-
(1) नाम मात्र या सम्बद्ध सदस्य की दशा में प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर, तथा
(2) साधारण या सहानुभूतिकर सदस्य की दशा में प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के आठ दिन के भीतर, न दी जाये, तो ऐसा प्रार्थना पत्र अस्वीकृत किया गया समझा जायेगा।
(2) कोई भी व्यक्ति किसी सहकारी समिति का सदस्य उस समय तक नही बनाया जायेगा जब तक कि-
(1) वह अधिनियम, नियमावली तथा समिति की उपविधियों में सदस्यता के लिए निर्धारित अर्हताओं की पूर्ति न करता हो,
(2) उसने समिति की उपविधियों में निर्धारित रीति से समिति की सदस्यता के लिए प्रार्थना पत्र न दिया हो,
(3) उसे समिति की उपविधियों के अनुसार सदस्यता के लिए अनुमोदित न किया गया हो,
(4) नाम मात्र तथा सम्बद्ध सदस्य की दशा में सदस्यता के लिये उसका प्रार्थना पत्र समिति की प्रबन्ध कमेटी द्वारा तदर्थ प्राधिकृत समिति के किसी अधिकारी द्वारा स्वीकृत न किया जाये।
39.यदि राज्य गोदाम निगम (स्टेट वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन), कोई सहकारी समिति या सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1860 (ऐक्ट संख्या 21, 1860) के अधीन निबन्धित कोई समिति तत्समय प्रचलित किसी भी अन्य विधि के अधीन निबन्धित कोई कम्पनी या निगमित निकाय, किसी सहकारी समिति की सदस्यता के लिए प्रार्थना पत्र ऐसे व्यक्ति या प्राघिकारी द्वारा दिया जायेगा जो निकाय पर प्रयुक्त की विधि या उपविधियों के उपबन्धों के अधीन ऐसा करने के लिए सक्षम हो।
स्पष्टीकरण- शब्द उपविधि के अन्तर्गत सम्बद्ध निकाय के निगम य समवाय निगम अथवा समवाय ज्ञापिका भी होगें।
40. यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों ने, किसी समिति के मृत सदस्य के अंश या हित को संयुक्त रूप से दाय पाया हो तो ऐसे व्यक्तियों को समिति का साधारण सदस्य बनाया जा सकता है। अंश या अंशों के सम्बन्ध में मतदान के अधिकार के लिए ऐसे व्यक्ति,घोषणा द्वारा अपने में से किसी एक की धारा 20 के अधीन मतदान के अधिकार का प्रयोग करने के लिए नाम निर्दिष्ट करेगे, जिस पर समिति, अंश प्रमाणक में ऐसे व्यक्ति का नाम संयुक्त अंशधारियों में मुख्य नाम के रूप में लिखेगी।
स्पष्टीकरण-(1) यद्य‍पि मतदान के अधिकार का उपयोग केवल घोषणा में तथा अंश प्रमाणक में इस प्रकार उल्लिखित व्यक्ति द्वारा ही किया जायेगा तथापि उक्त सभी व्यक्ति अधिनियम नियमावली समिति की उपविधियों में की गयी व्यवस्था के अनुसार संयुक्त रूप से और अलग अलग सम्पूर्ण दायित्वों के भागी होगे।
(2) यह नियम केवल तब तक लागू होगा जब तक कि अंश सयुक्त रूप से धृत हो।
41.1 [ (1) कोई भी व्यक्ति, विशेष किसी सहकारी समिति का, जो अपने सदस्यों को नकदी या जिन्स अथवा दोनों ही प्रकार का ऋण देती है, सदस्य न होगा, यदि ऐसा व्यक्ति अनुपयुक्त दिवालिया है।
(2) कोई भी व्यक्ति, विशेष समिति का न तो साधारण सदस्य होगा और न बना रहेगा, यदि निबन्धक की राय में उसी प्रकार का कार्य करता हो जैसा कि समिति द्वारा किया जा रहा हो।]
42 (1) कोई भी व्यक्ति, जो व्यक्ति विशेष हो और जो पहले से ही किसी प्रारम्भिक सहकारी ऋण समिति का सदस्य हो जब तक कि उसे निबन्धक द्वारा उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे, अनुज्ञा न दी जाये, किसी अन्य सहकारी ऋण समिति का सदस्य न होगा (सिवा जब तक कि ऐसी समिति कोई सहकारी बैंक हो जिसका मुख्य कार्य अपने सदस्यों की अचल सम्पत्ति बन्धक रखकर दीर्धाविधि ऋण देना हो)
(2) यदि कोई व्यक्ति विशेष, उपनियम (1) के उल्लंघन में दो ऋण समितियों का सदस्य हो गया हो तो वह दोनों में से किसी एक समिति की सदस्यता त्याग देगा तथा सदस्यता त्यागने के लिए कहे जाने से 45 दिनों के भीतर उसके ऐसा न करने पर समिति, जिसका वह बाद में सदस्य बना हो, उसे सदस्यता से हटा देगी।
43. कोई भी व्यक्ति, जब तक कि निबन्धक द्वारा उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेगे, किसी सहकारी आवास समिति का सदस्य न होगा,यदि ऐसा व्यक्ति पहले से ही उसी शहर में किसी अन्य सहकारी आवास समिति का सदस्य हो

 

[44.(a) No person who has been expelled from the membership of a cooperative society under clause (b) of Rule 56 shall be admitted as a member of that society before lapse of a period of two years from the date the order of expulsion takes effect, as provided in sub section (s) of Section 27.

          (b) No person, who is an individual shall be admitted as on ordinary members in-

          (i) an apex society  or Central Bank ( other than UP state cooperative land development bank, an urban central bank  and Uttar Pradesh Sahkari Avas Sangh)

          (ii) a central society which includes any other central society in its ordinary membership.

          (c) if a society mentioned in sub rule (b) has on the date of coming into force of the Act, individuals as its ordinary members, the society shall within a period of one year from such date or such further period as the Registrar may for reasons to be recorded, allow for any cooperative society adjust its membership to any other class mentioned in subsection (1)  of section 18 in accordance with the bye laws of the society.

 

[45. No joint stock company shall be admitted as an ordinary member in-

          (i) an apex or Central Bank other than a Primary Urban Cooperative Bank of an Urban Central Bank.

Provided that the total membership of such companies in a Primary Urban Cooperative Bank of Urban Central Bank shall not, without the prior approval of the Registrar, exceed five percent of the total membership  of such bank.


.----------------------------------
1.उ0प्र0 गजट, भाग 1-क की अधिसूचना सं0 408-सी/12सी0ए0-5(1)69 बी, दिनांक 9 अगस्त, 1973 के द्वारा रखे गये।
 

2-Subs by Noti No 2987/XII-C-I-83-7(13) 78,dated 12-9-1983,w.e.f.1982.

3-Subs by Noti No 4410/XII-G-I-85-7(5) 84,dated 5-12-1985

 

(ii) a primary agricultural credit society)



(2)प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति का, साधारण सदस्य नही बनाया जायेगा।
46. कोई नाम मात्र या  सम्बद्ध   सदस्य केवल उतना प्रवेश शुल्क देगा जितना समिति की उपविधियों के अन्तर्गत अपेक्षित हो। प्रवेश शुल्क वापस नही किया जायेगा न उस पर कोई ब्याज देय होगा।
47. किसी सहकारी समिति का कोई  सम्बद्ध   या नाम मात्र सदस्य, भले ही समिति का दायित्व कुछ भी हो, समिति के समापित किये जाने पर उसकी परिसम्पत्तियों में अंशदान करने के लिये जिम्मेदार न होगा, सिवा किन्ही ऐसे देयों के प्रतिदान के लिये जिसका वह अकेले या किसी अन्य ऋणदाता के साथ संयुक्त रूप से समिति को देनदार हो।
48.किसी सहकारी समिति की सदस्यता के लिए स्वीकार किये जाने के पूर्व प्रत्येक सदस्य एक घोषणा पत्र पर इस आशय का हस्ताक्षर करेगा ‍ि वह समिति के वर्तमान उपविधियों और उसके किसी संशोधन को मानने के लिए बाध्य होगा। ऐसा घोषणा पत्र दो व्यक्तियों द्वारा प्रमाणित किया जायेगा।
49. कोई व्यक्ति जो सहकारी समिति के निबन्धक के लिए दिये गये प्रार्थना पत्र में सम्मिलित होने के कारण पहलें से ही सदस्य हो, उससे समिति के निबन्धक के एक माह के भीतर, ऐसी समिति द्वारा नियम 8 में निर्दिष्ट घोषणा  पत्र पर हस्ताक्षर करने की अपेक्षा की जायेग। यदि वह ऐसा न करे तो वह समिति की सदस्यता से निकाल दिये जाने की भानी होगी।
50. किसी सहकारी समिति का कोई सदस्य, सदस्यता के अधिकारों का प्रयोग करने का तब तक हकदार न होगा, जब तक ‍ि वह यथास्थिति नियम 48 या 49 में उल्लिखित धोषणा पत्र पर हस्ताक्षर न कर दे, और समिति को ऐसा भुगतान न कर दे, जो सदस्यता के सम्बन्ध में आवश्यक हो या समिति में ऐसा स्वत्व अर्जित न कर ले जो उस समिति की उपविधियों में व्यवस्थित की जाये।
51. कोई भी व्यक्ति किसी सहकारी समिति का तब तक सहानुभूतिकर सदस्य  नहीं बनाया जायेगा जब तक कि वह समिति के सचिव को लिखित रूप से इस प्रयोजन के लिए, समिति की उपविधियों मे व्यवस्थित प्रपत्र पर और रीति से प्रार्थना-पत्र न दे।
52. किसी सहकारी समिति का सहानुभूतिकर सदस्य बनाये जाने पर, ऐसे अंश खरीदेगा जिसका मूल्य और सीमा कम न होगी, जो किसी साधारण सदस्य के लिए व्यवस्थित हो।
53. किसी सहकारी समिति के सहानुभूतिपूर्वक सदस्य का दायित्व उतना होगा जितना किसी साधारण सदस्य का हो और किसी भूतपूर्व सहानुभूतिकर सदस्य या किसी मृत सहानुभूतिकर सदस्य की दशा में दायित्व वही होगा जैसा कि धारा 25 में व्यवस्थित है।
54. (1) किसी सहकारी समिति के सहानुभूतिकर सदस्य की मृत्यु हो जाने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी और उसका दायाद या नाम निर्दिष्ट व्यक्ति साधारण सदस्यता या सहानुभूतिकर सदस्यता के लिये अधिकार के रूप में दावा नही कर सकेगा।
(2) फिर भी, सहकारी समिति के किसी सहानुभूतिकर सदस्य का कोई दायाद या नाम निर्दिष्ट व्यक्ति समिति का साधारण या सहानुभूतिकर सदस्य बन सकता है, यदि वह ऐसी सदस्यता के लिये स्वयं अर्ह हो और उसके सदस्य बन जाने पर, मृत सहानुभूतिकर सदस्य के अंश या हित का संक्रमण उसे धारा 24 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार कर दिया जायेगा।
55. यदि सहकारी समिति के सहानुभूतिकर सदस्य को कोई दायाद या नाम निर्दिष्ट व्यक्ति समिति की सदसयता के लिये अनुमोदित न किया जाये तो समिति उसको धारा 24 की उपधारा (2) और (3) के अधीन व्यवस्थित भुगतान करेगी।,
56. किसी भी व्यक्ति को, नियमों में निर्धारित रीति से-
(क) सहकारी समिति की सहायता से हटाया जा सकता है यदि-
(1) वह अर्हताओं की पूर्ति न करता हो, जो समिति की सदस्यता के लिए अधिनियम, नियमों या समिति को उपविधियों में निर्धारित किये गये है;
(2) वह अधिनियम, नियमों या समिति की उपविधियों के उपविधियों के उपबन्धों का उल्लंघन करके समिति का सदस्य बनाया गया हो;या
(3) वह विकृत चित्त को हो;या
(4) समिति के सम्बन्ध में उसकी सदस्यता नियम 8 (ख) के उपबन्धों से असंगत हो।
(ख) समिति की सदस्यता से निकाला जा सकता है-
(1) यदि उसने समिति की निधि या सम्पत्ति का दुर्विनियोग किया हो अथवा समिति की सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई हो और ऐसे अपराध के लिए इण्डियन पैनल कोड, 1860 के अधीन दण्डित किया गया होः
प्रतिबन्ध यह हे ‍ि वह दण्डादेश के विरूद्धअपील में छोड़ दिये जाने के पश्चात या उक्त आदे के अधीन सजा काटने के पश्चात या अर्थदण्ड का भुगतान करने के पश्चात जैसी भी दशा हो, उक्त समिति या किसी भी अन्य समिति का सदस्य होने के लिए अर्ह होगा।
(2) यदि उसने किसी समिति की उपविधियों का उल्लंघन करके समिति के हित को हानि पहुंचाई हो;
(3) यदि समिति की उपविधियों के किसी भी उपबन्ध के अनुसरण में किसी सदस्य द्वारा की गई घोषण या तो गलत पाई जाये या घोषणा में किसी सारवान सूचना को दबाने के कारण दोषपूर्ण हो, और ऐसी गलत या दोषपूर्ण घोषणा के कारण सदस्य को समिति से अनुचित लाभ हुआ हो अथवा उससे समिति की आर्थिक या वित्तय हानि अथवा अन्य कठिनाइय हुई हो।
57.किसी ऐसे व्यक्ति से जिसे नियम 56 के अधीन हटाया या निकालना हो, प्रबन्ध कमेटी नोटिस प्राप्त होने के दिनांक से दस दिन के भीतर यह कारण बताने को कहेगी कि क्यों न उसे समिति की सदस्यता से, यथास्थिति, हटा या निकाल दिया जायें।
58. (1) यदि नियम 57 में अभिदिष्ट नोटिस का जवाब उक्त नियम में निर्दिष्ट समय के भीतर न ‍िदया जाये अथवा प्राप्त जवाब प्रबन्ध कमेटी की राय में असंतोषजनक हो तो उक्त सदस्य, प्रबन्ध कमेटी द्वारा, नोटिस की अवधि की समाप्ति के दिनांक से पन्द्रह दिन के भीतर हुई बैठक में पारित संकल्प द्वारा, यथास्थिति हटा दिया जायेगा या निकाल दिया जायेगा।
(2) उपनियम (1) में उल्लिखित प्रयोजन के लिये बुलाई गई प्रबन्ध कमेटी की बैठक की कार्यसूची की एक प्रतिलिपि उस सदस्य को भेजी जायेगी जिसे हटाना या निकालना हो और सम्बद्ध सदस्य को ऐसी बैठक के समक्ष, यदि वह ऐसा करना चाहे, स्वंय अपने मामले के बारे में कहने का अधिकार होगा।
59. नियम 58 के अधीन पारित कोई भी संकल्प तब तक प्रभावी न होगा जब तक कि वह मतदान में उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत द्वारा पारित न किया गया हो।
60. यदि किसी सहकारी समिति से किसी सदस्य को हटाने या निकालने का कोई आदेश धारा 27 की उपधारा (2) खण्ड क के अधीन निबन्धक से प्राप्त हो तो, प्रबन्ध कमेटी उक्त आदेश की प्राप्ति के दिनांक से तीन दिन के भीतर नियम 57 और 58 में निर्धारित रीति से सदस्य को यथास्थिति हटा देगी या निकाल देगी।
61. नियम 58 या नियम 60 में अभिदिष्ट बैठक के संकल्प की एक प्रति, अथवा धारा 27 की उपधारा (2) क अधीन हटाये या निकाले जाने के लिये निबन्धक द्वारा दिये गये आदेश की एक प्रति, जैसी भी दशा हो, सम्बद्ध को रजिस्ट्री डाक से भेजी जायेगी।
62. किसी व्यक्ति का जो किसी सहकारी समिति की सदस्यता से धारा 27 की उपधारा (2) के अधीन निबन्धक द्वारा या नियम 58 या नियम 60 के अधीन, किसी सहकारी समिति द्वारा हटाया जाये या निकाला जाये, इस प्रकार हटाये जाने पर या निकाले जाने पर भी, दायित्व जैसा कि धारा 25 में व्यवस्थित है, बना रहेगा और अपने ऋणों का समिति को भुगतान करने का भी दायित्व बना रहेगा।
63. किसी सहकारी समिति का को कोई सदस्य-
(1) उसकी मृत्यु होने,
(2) समिति से हटाये जाने या निकाले जाने,
(3) उसके द्वारा सदस्यता वापस लेने, या
(4) उसके निवृत् होने या स्थानान्तरण पर अथवा उसके द्वारा धृत सभी अंशो के जब् कर लिये जाने पर,
ऐसा सदस्य नही रह जायेगा।
64. कोई सहकारी समिति, लिखित रूप से अनुरोध करने पर और ऐसे शुल्क देने पर जो उसकी उपविधियों में निर्धारित किये जाये, नीचे उल्लिखित किसी एक या अधिक लेख्यों को ऐसे शुल्क दिये जाने के दिनांक से एक माह के भीतर-
(क) किसी सदस्य को-
(1 ) समिति की निबद्ध उपविधियों की एक प्रतिलिपि,
(2) प्रबन्ध कमेटी के सदस्यों की सूची,
(3) अन्तिम लेखा परीक्षित रोकड़ पत्र और वार्षिक लाभ हानि के लेखे की एक प्रतिलिपि,
(4) किसी ऋण समिति की दशा में समिति के साथ अपने लेन देन की और किसी अन्य समिति की दशा में अपने उधार ले देन की एक या अधिक अभिलेखों की दूसरी प्रतिलिपि, देगी।
(ख) किसी साधारण या सहानुभूतिकर सदस्य को-
(1) समिति के सदस्यों की एक सूची,
(2) समिति के सामान्य निकाय या प्रबन्ध कमेटी अथवा किसी अन्य की बैठक की कार्यवाहियों की एक प्रतिलिपि।