अध्याय 6
अंश

 

65. किसी सीमित दायित्व वाली सहकारी ऋण समिति की दशा में, कोई भी व्यक्ति विशेष, धारा 22 में निर्धारित निर्बन्धनों के अधीन रहते हुये, समिति की अंश पूजी के दसवें भाग से अधिक धनराशि के अभिदत्त अंश नहीं  रखेगा।
66. धारा 25 के अधीन दायित्व तथा धारा 41 के अधीन प्रभार और मुजराई करने के लिए उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कोई सहकारी समिति धारा 23 की उपधारा(3) के अधीन-
(1) धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) से (च) तक किसी भी उल्लिखित सदस्य को सदस्य बनाये जाने के समय समिति तथा ऐसे सदस्य के बीच समस्त अंश भाग ग्रहण करने की शर्तो पर,
(2) किसी वेतन भोगी सहकारी समिति के किसी सदस्य को, उक्त समिति के कार्य संचालन के क्षेत्र से ऐसे सदस्य का स्थानान्तरण होने की दशा में या उसकी ऐसी सेवा के जिसके आधार पर वह समिति की सदस्यता धारण किये था, समाप्त हो जाने पर,
(3) किसी शिक्षा संस्था में संघटित किसी सहकारी समिति के किसी सदस्य के, उक्त संस्थका छात्र या कर्मचारी वर्ग का सदस्य, जिस पदस्थिति के कारण वह समिति की सदस्यता धारण किये था, रह जाने पर,
(4) किसी सहकारी समिति के किसी सदस्य के यदि वह, ‍िनयम 44 के उपनियम (ग) के अधीन अन्य वर्ग में उसकी सदस्यता के समायोजन के कारण अंशधारी न रह गया हो, या यदि उसे नियम 56 के उपनियम (क) के अधीन सदस्यता से हटा दिया गया हो,
अंशो को वापस कर सकती है।

67. किसी व्यक्ति का सहकारी समिति से धृत जब किसी अन्य सहकारी समिति से, जिसमें उसकी सदस्यता संक्रमित की गयी हो इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये संक्रमित किया जा सकता है।
68. सहकारी समिति किसी बहिर्गामी सदस्य के अंश को संक्रमित होने तक अपनी अंश संक्रमण निधि से यदि कोई हो, क्रय कर सकती है और बाद में वह धनराशि, उस सदस्य से वसूल कर सकती है जिसे ऐसा अंश अन्ततः संक्रमित किया जाये।
69. केन्द्रीय सहकारी समिति में किसी सहकारी समिति द्वारा धृत अंश संक्रमणीय नही होंगे, सिवा इसके जबकि-
(1) सहकारी समिति दो या दो से अधिक समितियों में विभाजित हो जाये, जिस दशा में केन्द्रीय समिति, निबन्धक के अनुमोदन से, मूल समिति द्वारा धृत अंशो को ऐसे अनुपात से नई समितियों को संक्रमित करेगा जो उचित समझा जाये, या
(2) कोई भी दो या दो से अधिक सहकारी समितिय एक समिति के रूप में समामेलित या विलीन हो जायें, जिस दशा में केन्द्रीय समिति निबन्धक के अनुमोदन से, मूल समितियों द्वारा धृत समस्त अंश, समामेलन की दशा में नई समिति को तथा विलीन होने की दशा में चालू रहने वाली समिति को संक्रमित कर सकती है, या
(3) निबन्धक की राय में किसी सहकारी समिति के पास उसकी आवश्यकता से अधिक अंश हो जिस दशा में केन्द्रीय समिति ऐसे अंश (जो आवश्यकताओं से अधिक समझे जाये) ऐसी दूसरी समिति को जो उक्त केन्द्रीय समिति की सदस्य हो ऐसी शर्तो और निबन्धनों पर जो संक्रमणकर्ता    समिति तथा संक्रमिती समिति के बीच समस्त और केन्द्रीय समिति द्वारा अनुमोदित हों, संक्रमित कर सकती है।
70. इस अधिनियम तथा नियमो के उपबन्धों के अधीन रहते हुये कोई केन्द्रीय सहकारी समिति, इस प्रयोजन के लिये विशेष रूप से बुलाई गई तथा निबन्धक द्वारा अनुमोदित और समिति के सामान्य निकाय द्वारा स्वीकृत एक विशेष योजना के अनुसार अपनी अंश पूजी कम कर सकती है। ऐसी योजना में निम्नलिखित की व्यवस्था की जा सकती है-
(1) अदत्त अंश पूजी के सम्बन्ध में, अपने किन्ही भी अंशो का दायित्व समाप्त या कम करना,या
(2) किसी भी दत्त अंशपूजी को रद्द करन, या
(3) किसी भी दत्त अंशपूजी को जो केन्द्रीय समित की आवश्यकता से अधिक हो, वापस करना।
71. निबन्धक, किसी केन्द्रीय सहकारी समिति को जो अपनी अंश पूजी कम करना चाहती हो, प्रत्येक लेनदार को रजिस्ट्री डाक से नोटिस जारी करने का निदेश दे सकता है, जिसे ऐसी नोटिस मिलने के दिनांक से एक माह के भीतर प्रस्तावित कमी करने के विरूद्ध आपत्ति करने का अधिकार होगा।
72. यदि कोई लेनदार अंश पूजी की प्रस्तावित कमी करने के लिये सहमति न दे तो निबन्धक ऐसे लेनदार की सहमति के बिना काम चला सकता है, यदि केन्द्रीय सहकार समिति ऐसे लेनदार के ऋण का भुगतान अथवा दावे की तष्टि निबन्धक द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर कर ले।
73. यदि निबन्धक का ऐसी केन्द्रीय सहकारी समिति के प्रत्येक ऐसे लेनदार के सम्बन्ध में, जिसने कमी करने के विरूद्ध आपत्ति की हो यह समाधान हो गया हो कि या तो कमी करने के लिए उसकी सहमति ले ली गयी है या जैसा कि ऊपर कहा गया है उसके ऋण या दावे का भुगतान हो चुका है या तुष्टि की जा चुकी है जैसा नियम 72 में प्राविधान है, तो वह (निबन्धक) ऐसी शर्तो पर कमी करने की स्वीकृति का आदेश दे सकता है जिसे वह उचित समझे।
74. किसी केन्द्रीय सहकारी समिति का अंश पूजी को कम करने का संकल्प उस दिनांक से प्रभावी होगा जब वह नियम 73 के अधीन निबन्ध द्वारा अनुमोदित कर लिया जाये।
75. किसी सहकारी समिति में किसी सदस्य द्वारा धृत अंशों को, उसके द्वारा उस मिति से जिसका वह सदस्य हो भिन्न किसी व्यक्ति य निकाय से लिये गये किसी ऋण के लिए प्रतिभूति के रूप में उसके द्वारा दृष्टि बन्धक नही रखा जायेगा।
76. यदि धारा 72 के अधीन किसी सदस्य समिति को समापित करने के लिये दिया गया आदेश अन्तिम हो जाये तो ऐसी समिति का अंश ऐसे देयो के साथ समायोजित कर दिया जायेगा जो समिति के ऊपर बकाया हो और शेष धनराशि, यदि कोई हो, समिति के नाम जमा कर दी जायेगी।
77. (क) किसी सहकारी समिति का कोई सदस्य ऐसे किसी व्यक्ति को नाम निर्दिष्ट कर सकता है, जिसे उसकी मृत्यु हो जाने की दशा म, समिति की पूजी से उसका अंश या हित संक्रमिति किया जायेगा अथवा उसके मूल्य का या समिति द्वारा उसे देय किसी अन्य धनराशि का भुगतान किया जायेगा। ऐसा सदस्य, ऐसे नाम निर्देशन को समय समय पर विडित कर सकता है या बदल सकता है।
(ख) जब कोई सदस्य अपने द्वारा धृत अंशो के सम्बन्ध में एक से अधिक व्यक्तियों को नाम निर्दिष्ट करे तो वह जह तक व्यवहार्य हो, सम्पूर्ण अंशों के रूप में प्रत्येक नाम निर्दिष्ट व्यक्ति को दी जाने वाली या संक्रमित की जाने वाली धनराशि उल्लिखित करेगा।
78. (क) किसी सदस्य द्वारा, नियम 77 के अधीन नाम निर्देशन, समिति द्वारा नियत प्रपत्र में घोषणा पर हस्ताक्षर करके या समिति द्वारा इस प्रयोजन के लिये रखी गई पुस्तिका में बयान दे कर, किया जायेगा। जब नाम निर्देशन घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करके किया जाये, तो ऐसा घोषणा पत्र सदस्य के जीवन काल में समिति के पास जमा कर दिया जायेगा। प्रत्येक दशा में नाम निर्देशन करने वाले सदस्य का हस्ताक्षर होगा ओर उसे दो साक्षियों द्वारा प्रमाणित किया जायेगा।
(ख) उपनियम (क) के अधीन किया गया नाम निर्देशन उपनियम (क) में निर्धारित रीति से किये गये किसी अन्य नाम-निर्देशन द्वारा  विखण्डित किया जा सकता है या बदला जा सकता है।
79. धारा 24 के प्रयोजन के लिए नाम निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति का नाम और पता ऐसे नाम निर्देशन की कोई मंसूखी या परिवर्तन, सहकारी समिति द्वारा इस प्रयोजन के लिये रखे रजिस्टर में दर्ज किया जायेगा।
80. (क) जब किसी सहकारी समिति के किसी सदस्य की, नाम निर्देन किये बिना मृत्यु हो जाये तो समिति, अपने कार्यालय से सार्वजनिक नोटिस लगाकर, नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर, मृत सदस्य के दायाद या विधिक प्रतिनिधि को उसके अंश या हित को प्रस्तावित संक्रमण अथवा अंश या हित के मूल्य का और मृत सदस्य के दायाद या विधिक प्रतिनिधि को उसके अंश या हित को प्रस्तावित संक्रमण अवा अंश या हित के मूल्य का और मृत सदस्य को देय सभी अन्य धनराशियों का भुगतान करने के लिए दावे या आपत्तियॉ आमन्त्रित करेगी।
(ख) यदि उस व्यक्ति के, जो प्रबन्ध कमेटी का मृत सदस्य का दायाद या विधिक प्रतिनिधि प्रतीत हो दावे के बारे में कोई विवाद न उठे तो प्रबन्ध कमेटी ऐसे व्यक्ति को मृत सदस्य का अंश या हित संक्रमित कर देगी अथवा अंश या हित का मूल्य और मृत सदस्य को देय सभी अन्य धनराशियों का भुगतान करेगी।
(ग) यदि उप नियम (क) में उल्लिखित नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर कोई दावा प्रस्तुत न किया जाये तो समिति धनराशि का तब तक अपने कब्जे में रखेगी जब तक कि दावे के सम्बन्ध में कोई कार्यवाही करने के लिये लिमिटेशन ऐक्ट, 1963 के अधीन अवधि काल समाप्त न हो जाये; उक्त अवधि काल समाप्त हो जाने के पश्चात समिति धनराशि को अंश संक्रमण निधि और ऐसी निधि के न होने पर, रक्षित निधि के नाम जमा कर देगी। अवधि काल के समाप्त हो जाने के पश्चात भुगतान के लिए कोई दावा ग्रहण नही किया जायेगा।
() यदि किसी व्यक्ति के इस दावे के सम्बन्ध में कोई विवाद उठे  कि वह मृत सदस्य का दायाद या विधिक प्रतिनिधि हे या नही तो समिति उत्पन्न हुये विवाद के तथ्य के बारे में दावेदरो को सूचित करेगी और सम्बद्ध  पक्षो से धारा 21 की उपधारा (1) के द्वितीय प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अनुसार विवाद निपटाने को कहेगी। यदि पक्ष समिति द्वारा उपर्युक्त सूचना के दिनांक से एक माह के भीतर अपना मामला निबन्धक  को अभिदिष्ट न करे तो समिति सवयं उक्त मामला निबन्धक को अभिदिष्ट करेगी और उक्त प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अनुसार कार्यवाही करेगी।
(ड.) मृत सदस्य के अंश या हित के मूल्य का या अन्य देय धनराशियों का भुगतान समिति द्वारा उसके दायाद या नाम निर्दिष्ट व्यक्ति अथवा विधिक प्रतिनिधि का तब तक नही किया जायेगा जब तक कि समिति को ऐसे भुगतान की रसीद, जो समिति के सदस्यों मे से दो साक्षियों के रूप में यथाविधि प्रमाणित हो गयी हो, प्राप्त न हो जाये।
81. (क) किसी भी सहकारी समिति के सदस्य द्वारा किसी व्यक्ति को अंशो का संक्रमण तब तक प्रभावी न होगा, जब तक कि-
(1) वह अधिनियम, नियम और समिति की उपविधियों के उपबन्धो के अनुसार न किया जाये,
(2) समिति को लिखित रूप से पूरे तीस दिन का नोटिस न दे दिया जाये जिसमें प्रस्तावित संक्रमिति का नाम, उसकी सहमति ओर सदस्यता के लिए प्रार्थना पत्र  हॉ आवश्यक हो, और संक्रमिति द्वारा भुगतान करने के लिये प्रस्तावित मूल्य इंगित हो,
(3) समिति को देय संक्रमणकर्ता के सभी दायित्व उन्मोचित न कर दिया जाये, और
(4) संक्रमण समिति  बहियों में निबद्ध न कर लिया जाये,
(ख) इस प्रकार संक्रमित अंश पर समिति के पक्ष में कोई प्रभार तब तक बना रहेगा जब तक कि वह अन्य प्रकार से उन्मोचित न कर दिया जाये।
82. (1)यदि सहकारी समिति का कोई सदस्य, ऐसा सदस्य न रह जाये तो उसे या उसके नाम निर्दिष्ट व्यक्ति, दायाद या विविध प्रतिनिधि की जसी भी दशा हो, समिति को अंश पूजी में उसके अंश या हित का दिया जाने वाला मूल्य, ऐसे सदस्य द्वारा समिति की भुगतान की गई वास्तविक धनराशि के बराबर होगा।
(2) जब किसी व्यक्ति को सहकारी समिति द्वारा कोई अंश प्रदिष्ट किया जाये अथवा सहकारी समिति के सदस्य द्वारा कोई अंश संक्रमित किया जाये ओर ऐसा संक्रमण समिति को प्रबन्ध कमेटी द्वारा अनुमोदित किया जाये तो ऐसे प्रदिष्ट या संक्रमित अंश के सम्बन्ध में अपेक्षित भुगतान अंश के अंकित मूल्य से अधिक न होगा।