अध्याय 7
सहकारी समितियों के सामान्य निकाय का संगठन



1[83. किसी सहकारी समिति के साधारण या सहानुभूतिकर सदस्य-
(1) यदि ऐसे व्यक्ति हों जिसमें धारा 80 और धारा 81 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट पागल सदस्यों के अभिभावक और अव्यस्क सदस्यों के विधिक संरक्षक भी सम्मिलित ह तो समिति के सामान्य निकाय में या तो स्वयं या नियमों के उपनिबन्धों के अनुसार प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रतिनिधित्तव करेगे।
(2)यदि व्यक्ति से भिन्न हो तो समिति के सामान्य निकाय में धारा 20 के खण्ड (ख) और (ग) के उपबन्धों के अनुसार प्रतिनिधित्व करेगें।
84.2[ * * * ]
3[84क. सहकारी समिति का सामान्य निकाय निम्नलिखित स्थिति में गठित किया जायेगा-
(1) उसके सदस्यों के प्रतिनिधियों द्वारा-
(क) जह समिति की सदस्य संख्या में व्यक्ति हों और अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) से (च) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति, यदि कोई हो, और समिति के कार्य क्षेत्र का एक से अधिक राजस्व जिले में विस्तार हो;
(ख) जह  समिति की सदस्य संख्या में सहकारी समितिय हों और अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) से (च) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति, हो;
(2) उसके समस्त अलग अलग सदस्यों और समिति के अन्य सदस्यों के किन्ही प्रतिनिधियों द्वारा किया जायेगा-
(क) जह  समिति की सदस्य संख्या में-
(1) व्यक्ति हो; और
(2) कम से कम एक सहकारी समिति हो;
(3) अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) से (च) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति,हो;
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1. अधिसूचना सं0 3815सी/1-77-7(5), 1977 दिनांक 24 दिसम्बर,1977 के द्वारा रखे गये।
2. अधिसूचना सं0 2700/49-1-94-7(1), दिनांक 15.7.94 द्वारा निकाला गया।
3. अधिसूचना सं0 3849/49-1-98-7(11)-97-लखनऊ दिनांक 31 अक्टूबर 1998 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।


(ख) जह सहकारी समिति की सदस्य संख्या में व्यक्ति और अधिनियम की धारा 17 उपधारा (1) के ण्ड (ग) से (च) में निर्दिष्ट कोई अन्य व्यक्ति, हो;
(3) उपभोक्ता सहकारी समितियों, गन्ना सहकारी समितियों और सहकारी चीनी कारखाना समितियों की स्थिति में , उनके सदस्यों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जायेगा, जह  अलग अलग सदस्यों और अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) से (च) में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की, यदि कोई हो, संख्या 1500 या इससे अधिक हो;
(4) जह समिति की सदस्य संख्या में व्यक्ति हो, जिनकी संख्या 1500(एक हजार पांच सौ) से अधिक हो और समिति के कार्य क्षेत्र का विस्तार एक से अधिक राजस्व जिले में हो, वह उसके सदस्यों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जायेगाः
प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे प्रतिनिधियों की संख्या, किसी भी दशा में, एक सौ से अधिक नही होगी।
स्पष्टीकरण- इस नियम में प्रयुक्त शब्द सदस्य के अन्तर्गत कोई साधारण सदस्य और सहानुभूतिकर सदस्य भी होगा किन्तु उनमें कोई नाम मात्र या सहयुक्त सदस्य सम्मिलित नही होगा।
1[85. जह  कोई सहकारी समिति किसी अन्य समिति से सम्बद्व हो वह पूर्वतर्ती समिति नियम 85-क में निर्दिष्ट समितियों के सिवाय पश्चावर्ती समिति के सामान्य निकाय में प्रतिनिधियों के रूप में अपना प्रतिनिधित्तव करने के लिए किसी एक या अधिक व्यक्तियों को जैसा कि सम्बद्धकारी समिति की उपविधियों में विनिर्दिष्ट किया जाये नियुक्त कर सकती हैः
प्रतिबन्ध यह है कि प्रतिनिधि के रूप में कोई व्यक्ति नियुक्त नही किया जायेगा, जब तक कि वह पूर्वतर्वी समिति के सामान्य निकाय का सदस्य न हो और उसके नियमों में और समिति की उपविधियों मे प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित कोई अनर्हता न होः
अग्रेतर प्रतिबन्ध यह ह कि जह पश्चातवर्ती सहकारी समिति प्रबन्ध कमेटी में निर्बल वर्गो/महिलाओं के लिए स्थानों के आरक्षण की व्यवस्था करती है, वह पूर्ववर्ती समिति पश्चातवर्ती एक समिति के सामान्य निकाय में नियुक्त किये जाने वाले प्रतिनि‍धियों की संख्या मे से कम से कम एक प्रतिनिधि, यथास्थिति, निर्बल वर्ग महिला में से नियुक्त करेगी,
2[85क. निम्नलिखित समितिय निम्नलिखित रूप से प्रतिनिधि रख सकती है-
(क) जिला/केन्द्रीय सहकारी बैंक अपने सामान्य निकाय में प्रत्येक सदस्य से निम्नलिखित रूप से प्रतिनिधि रख सकती है-
(1) प्रारम्भिक कृषि ऋण समिति छः
(2) ब्लाक यूनियन चार
(3) क्रय विक्रय समिति चार
(4) जिला सहकारी फेडरेशन दो
(5) जिला/थोक उपभोक्ता स्टोर दो
(6) कई अन्य समिति दो
प्रतिबन्ध यह ह कि उपर्युक्त (1) से (6) तक में प्रत्येक से कम से कम एक प्रतिनिधि अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन जातियों का होगा-
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1. अधिसूचना सं0 3815सी-1-77-7(5), 1977 दिनांक 24 दिसम्बर,1977 के द्वारा रखे गये।
2. अधिसूचना सं0 2700/49-1-94-7(1)-94, दिनांक 15 जुलाई 1994 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।

(ख) जिला सहकारी फेडरेशन अपने सामान्य निकाय में निम्नलिखित रूप से प्रतिनिधि रख सकता है-
(1) क्रय विक्रय समिति चार
(2) ब्लाक यूनियन चार
(3) प्रक्रिया समिति चार
(4) कोई अन्य समिति दो
प्रतिबन्ध यह ह कि प्रत्येक का कम से कम एक प्रतिनिधि अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन जातियों का होगा-
(ग) जिला/थोक उपभोक्ता स्टोर अपने सामान्य निकाय में प्रत्येक सदस्य समिति से तीन प्रतिनिधि रख सकता है परन्तु प्रारम्भिक उपभोक्ता भण्डार की स्थिति में प्रतिनिधियों में कम से कम एक महिला होगी।
(घ) क्रय विक्रय या प्रक्रिया समितिय अपने सामान्य निकाय में प्रत्येक सदस्य समिति से निम्नलिखित रूप में प्रतिनिधि रख सकती है।
(1) प्रारम्भिक ऋण समिति छः
(2) कोई अन्य समिति दो
प्रतिबन्ध यह ह कि एक प्रतिनिधि अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन जातियों का होगा।
(घघ) ब्लाक यूनियन अपने सामान्य निकाय में प्रत्येक  सदस्य समिति के कार्य क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाली ग्राम सभाओं की संख्या के बराबर प्रतिनिधि रख सकती है।
(ड.) खण्ड (क) से (घघ) के अन्तर्गत न आने वाली सहकारी समिति प्रत्येक सदस्य समिति से समिति की उपविधियों के अनुसार प्रतिनिध रख सकती ह और समिति की उपविधियों मे कोई ऐसी व्यवस्था न होन पर, प्रतिनि‍धियों की संख्या निबन्धक के निदेशानुसार होगीं।
(च) जह किसी सहकारी समिति के सामान्य निकाय से अलग अलग सदस्यों के प्रतिनिधि सम्मिलित हों वहअलग अलग सदस्यों के प्रतिनिधियों की संख्या उतनी होगी जितनी समिति की उपविधियों में उपबन्धित की गयी है और समिति की उपविधियों में ऐसा कोई उपबन्ध होने पर, निबन्धक के निदेशानुसार होगी,
86. कोई भी सहकारी समिति, प्रतिनिधि रूप में किसी दूसरी सहकारी समिति में प्रतिनिधत्व करने के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति नही करेगी, यदि उस व्यक्ति में नियम 453 के किसी भी उप नियम (क) (ख) (ग) (घ) (ड) (च) (छ) (झ) () (ट) (ड) (ढ) और (ण) में निर्धारित कोई भी अनर्हता हो।
1[86-क.[ * * * ]
87. कोई व्यक्ति जो किसी सहकारी समिति का पहले से ही प्रतिनिधि हो, ऐसा प्रतिनिधि नही रह जायेगा, यदि-
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1.अधिसूचना सं0 2700/49-1-94-7(1)-94, दिनांक 15 जुलाई, 1994 द्वारा नियम 86-क निकाल दिया गया।
(1) वह नियम 89 में निर्दिष्ट  कोई  अनर्हता अर्जित करे ले,
(2) वह उस समिति का जिसका वह प्रतिनिधि हो, सदस्य न रह जाये, या
(3) वह समिति, जिसका वह प्रतिनिधि हो, उस समिति का जिसमें उसका प्रतिनिधितव हो, सदस्य न रह जाये, या
(4) वह उस समिति का सदस्य न रह जाये जो ऐसी समिति का सदस्य था जिसने उसे किसी दूसरी सहकारी समिति में अपने प्रतिनिधि के रूप में चुना हो, या
(5) वह उस पद पर न रह जाये जिसके कारण वह समिति की उपविधियों की शर्तो के अनुसार समिति का प्रतिनिधि था, या
(6) वह समिति, जिसका वह प्रतिनिधि था, धारा 72 के अधीन समापित कर दी जाये, या
(7) वह धारा 35 के अधीन निबन्धक द्वारा नियुक्त कमेटी, प्रशासक या प्रशासकों द्वारा वापस बुला लिया जाये, या
(8) वह समिति जिसका वह प्रतिनिधित्व करता हो, किसी अन्य सहकारी समिति या समितियों के साथ सम्मिलित कर दी जाये, या
(9) वह समिति जिसका वह प्रतिनिधित्व करता हो, एक या अधिक समितियों में विभाजित कर दी जाये, या
(10) वहसे प्रतिनिधि के पद से त्यागपत्र दे दे।
[87.क (1) कोई व्यक्ति जो किसी सहकारी समिति का पहले से ही प्रतिनिधि हो, ऐसा प्रतिनिधि नही रह जायेगा, यदि-
(एक) वह प्रबन्ध कमेटी द्वारा वापस बुला लिया जाए; या
(दो) नियम 453 में उल्लिखित किसी निरर्हता के कारण निबन्धक द्वारा उसका प्रतिनिधित्व रद्द कर दिया जाय; या
(तीन) वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अधीन उल्लिखित कोई निरर्हता उपगत करता है,
(2) यदि कोई व्यक्ति उपनियम (1) के किसी उपबन्ध के अधीन प्रतिनिधि नही रह जाता है तो प्रबन्ध कमेटी उसके स्थान पर किसी नये व्यक्ति क प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त कर सती है।
88. यदि राज्य सरकार, केन्द्रीय सरकार, राज्य गोदाम निगम, सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन ऐक्ट, 1860 के अधीन निबद्ध कोई समिति, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन निबद्ध या निगमित कोई कम्पनी या अन्य नियमित निकाय, किसी सहकारी समिति का सदस्य हो तो वह समिति के सामान्य निकाय में अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने प्रतिनिधि के रूप में, सक्षम प्राधिकारी के आदेश से या सामान्य निकाय, कार्यकारिणी समिति के किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के, जैसी भी दशा हो, संकल्प से किसी एक व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है।
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1. नई नियमावल 87-क धिसूचना सं0 965/49-1-2003-500(24)/2003 दिनांक 28 मई, 2003 द्वारा बढ़ायी गयी जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4 ख्ण्ड (ख) दिनांक 28 मई, 2003 को प्रकाशित हुआ और अब यह नियमावली अधिसूचना सं0 3029/49-1-2005-500(24)-03, दिनांक 1 दिसम्बर, 2005 द्वारा निकाल दी गयी जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4 ख्ण्ड (ख) दिनांक 1 दिसम्बर 2005 को प्रकाशित हुआ (1-12-2005 से प्रभावी)
89. कोई प्रतिनिधि जो एक बार किसी सहकारी समिति के सामान्य निकाय मे नियुक्त किया जाये, उस पद पर जब तक बना रहेगा जब तक कि या तो वह निकाय, जिनका वह प्रतिनिधित्व करता हो, उसके स्थान पर दूसरा प्रतिनिधि नियुक्त न कर दे, या वह धारा 87 में उल्लिखित कोई अनर्हता अर्जित न कर ले या उक्त पद धारण करने के लिये उस सहकारी समिति की, जिसका वह प्रतिनिधित्व करता हो या जिमें उसका प्रतिनिधित्व किया जाये, उपविधियों के उपबन्धों के आधार पर अपना अधिकार न खो बैठे।