अध्याय 9
प्रबन्ध कमेटी



113. किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी के ऐसे अधिकार और कर्तव्य   होगे जो अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये समिति की उपविधियों में निर्धारित किये जाये।
114.किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी के कोई भी तीन सदस्य उक्त कमेटी की बैठक बुलाने के लिए अधियाचन कर सकते है।
115. किसी सहकारी समिति के कार्य कलापों के संचालन में प्रबन्ध कमेटी का प्रत्येक सदस्य साधारण व्यवसायी की तरह बुद्विमानी और मेहनत से कार्य करेगा, कोई ऐसा कार्य नही करेगा जो अधिनियम, नियमों या समिति की उपविधियों के उपबन्धों के प्रतिकूल हो और अधिनियम, नियमों या समिति की उपविधियों के कर्तव्यो   का पालन करने मे चूक नही करेगा।
116. (क) किसी सहकारी समिति के किसी अधिकारी का, सिवा समिति की उपविधियों द्वारा दी गई अनुज्ञा के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से-
(1) समिति के साथ की गई किसी संविदा में,
(2) समिति द्वारा बेची गई या खरीदी गई किसी सम्पत्ति में,
(3) समिति के किसी वैतनिक कर्मचारी के लिये , यदि अधिकारी स्वयं वैतनिक कर्मचारी हो,
समिति द्वारा निवास स्थान की व्यवस्था से भिन्न, सहकारी समिति के किसी व्यवहार, में कोई हित नही होगा।
(ख) किसी सहकारी समिति का कोई वैतनिक अधिकारी सहकारी समिति के देयों की वसूली में सहकारी समिति के किसी सदस्य को बेची जाने वाली किसी सम्पत्ति को न तो खरीदेगा ओर न अपने किसी आश्रित को खरीदने की अनुज्ञा देगा।
117. (क) यदि कोई सरकारी सेवक, किसी सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी का कोई नाम निर्दिष्ट या पदेन सदस्य हो तो वह समिति के किसी पदाधिकारी या किसी प्रतिनिधि के चुनाव सम्बन्धी मामले मे मतदान नही करेगा।
(ख) यदि प्रबन्ध कमेटी का कोई सदस्य बहुमत की राय से असहमत हो तो वह बैठक की कार्यवाहियों में अपनी असहमति की टिप्पणी लिखने को कह सकता है और बैठक की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति उक्त असहमति को कार्यवाहियों में उचित रूप से लिखवायेगा।
118. धारा 35 की उपधारा (1) के अधीन किसी सहकारी समिति के सामान्य निकाय की राय प्राप्त करने के लिए, निबन्धक समिति के सामान्य निकाय की एक सामान्य बैठक बुलायेगा और इस प्रयोग के लिये वह सामान्य निकाय के उन सदस्यों को एक नोटिस भेजेगा जिनके नाम उसे समिति द्वारा सूचित किये गये हो अथवा जिन्हे उसने अभिलेखों से सुनिश्चित किया हो। किसी सदस्य को नोटिस प्राप्त न होने से ऐसी बैठक की कार्यवाहियां अवैध न होगी।
119. नियम 118 के अधीन सामान्य निकाय की सामान्य बैठक की अध्यक्षता निबन्धक करेगा और इस सामान्य बैठक की कार्यवाहिंयां एक अलग कागज पर लिखी जायेगी तथा वह उस पर हस्ताक्षर करेगा।
120. (1) इस नियमावाली में दी गई किसी बात के होते हुए भी नियम के अधीन किसी बैठक की गणपूर्ति सामान्य निकाय के कुल सदस्यों के आधे से अधिक होगी और निबन्धक का प्रस्ताव तभी पारित माना जोयगा जबकि उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत उसे समर्थन मिला हों,
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1.अधिसूचना संख्या 2311/49-1-97-7(10)-1995 टी0सी0 दिनांक 13.11.1997 द्वारा बदला गया।


(2) निबन्धक के लिए निम्न परिस्थितियों में धरा 35 की उपधारा (1) के प्रतिबन्धत्मक खण्ड के अधीन किसी सहकारी समिति के सामान्य निकाय की राय लेना आवश्यक नही होगा-
(क) यदि सदस्यता के सम्बन्ध में समिति के अभिलेख पूरे न हों या उपलब्ध न हो,
(ख) यदि कोई बैठक बुलाई गई हो, किन्तु गणपूर्ति के अभाव में बैठक न हो सकी हो,
(ग) यदि समिति के पास सामान्य बैठक आयोजित करने के व्यय को पूरा करने के लिए पर्याप्त निधि न हो,
(घ) यदि बैठक बुलाई गई हो किन्तु गड़बडी होने के कारण अपनी कार्यवाही आगे न कर सकी हो,
(3) यदि निबन्धक उपनियम (2) के अधीन समिति के सामान्य निकाय की राय न लें, तो वह इस तथ्य को सामान्य निकाय की राय न लेने के लिए कारणों सहित अभिलिखित करेगा।
121. यदि धारा 35 की उप धारा (3) या उपधारा (4) के अधीन कोई प्रशासक नियुक्त किया जाये तो वह अधिनियम, नियमों या उपविधियों के अधीन सभापति के अधिकारो का प्रयोग करेगा।

 122. धारा 35 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन नियुक्त कमेटी, प्रशासक या प्रशासकों को देय पारिश्रमिक उतना होगा जितना निबन्धक, समय-समय पर अवधारित करे और वह समिति की निधियों से देय होगा।
123. धारा 35 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन नियुक्त कमेटी, प्रशासक या प्रशासकों द्वारा समिति का प्रबन्ध करने के सम्बन्ध में किया जाने वाला व्यय समिति की निधियों से देय होगा।