सेवानियमावली

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अनुसूची 1
1[उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियमावली, 1975
अध्याय 1

नाम, प्रारम्भ, प्रयोजयता, परिभाषा तथा प्रतिनिधायन


1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ तथा प्रयोज्यता-(1) यह विनियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी सेवा विनियमावली, 1975 कहलायेगी।
(2) यह उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रभावी होगी।
2. परिभाषाए.- जब तक कि विषय या सन्दर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस विनियमावली मे-


(1) अधिनियम का तात्पर्य समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11,1966) से है;
(2) औसत वेतन का तात्पर्य उस मास के, जिसमें ऐसी घटना हो जिससे औसत वेतन की संगणना करने की आवश्यकता पड़ी हो, ठीक पूर्व पूरे दस मास के दौरान अर्जित औसत मासिक वेतन से है;
(3) नियुक्ति अधिकारी का तात्पर्य ऐसी प्रबन्ध कमेटी या किसी अन्य प्राधिकारी से है, जो इस विनियामावली या सम्बद्व समिति की उपविधियों के अधीन नियुक्त करने के लिए सशक्त हो;
(4)मण्डल का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मण्डल से है;
(5) उपविधि का तात्पर्य सम्बद्व सहकारी समिति की तत्समय पचलित निबन्धित (रजिस्ट्रीकृत) उपविधि से है;
(6) संवर्ग का तात्पर्य किसी समिति द्वारा अनुरक्षित किसी सेवा के पदों की संख्या या एक पृथक इकाई के रूप में स्वीकृत सेवा के भाग से है;
(7) सभापति का तात्पर्य सम्बद्व सहकारी समिति के सभापति से है;
(8) निरन्तर सेवा का तात्पर्य अविच्छिन्न सेवा से है, किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसी सेवा भी है जो किसी प्राधिकृत छुट्टी के कारण या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उपमार्षित की जाने योग्य किसी अन्य अनुपस्थिति के कारण विच्छिन्न हो;
2[(9) सहकारी समिति का तात्पर्य नियमावली के नियम 389 (क) के साथ पठित, अधिनियम की धारा 122 के अधीन जारी की गई अधिसूचना द्वारा समय-समय पर यथासंशोधित सहकारी अधिसूचना संख्या 366-ग/12 ग-3-36-71, दिनांक 4 मार्च, 1972 द्वारा मण्डल के क्षेत्रान्तर्गत रखी गई सहकारी समिति से है;]


1. अधिसूचना संख्या 7515-सी/12-सी-37-74 दिनांक 6 जनवरी, 1976 द्वारा प्रतिस्थापित।
2. अधिसूचना संख्या 432/12-सी-2-85-77 दिनांक 17 मई 1983 द्वारा प्रतिस्थापित जो उत्तर प्रदेश साधारण गजट, भाग 1-क, दिनांक 30 जुलाई 1983 में प्रकाशित हुआ।


(10) किसी सहकारी समिति की प्रमुख केन्द्रीय समिति का तात्पर्य ऐसी केन्द्रीय समिति से है, जिससे सहकारी समिति (जो शीर्ष समिति न हो) सम्बद्व और जिसकी ऋणी हो और यदि सहकारी समिति एक से अधिक केन्द्रीय समिति की ऋणी तथा उनसे सम्बद्व हो तो ऐसी केन्द्रीय समिति से है, जो उसी प्रकार का कार्य तथा व्यापार करती है जैसा सहकारी समिति स्वंय करती है;
(11) कर्मचारी का तात्पर्य  ऐसी व्यक्ति से है, जो सहकारी समिति की पूर्णकालिक सेवा में हो, किन्तु इसके अन्तर्गत समिति में दैनिक मजदूरी पर सेवायोजित आकस्मिक कर्मकार या अशंकालिक सेवा मे सेवायोजित व्यक्ति नही है;
(12) प्रबन्ध कमेटी का तात्पर्य सम्बद्व सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी से है;
(13) वेतन का तात्पर्य समस्त भत्तो को छोड़कर मासिक मूल वेतन से है;
(14) निबन्धक का तात्पर्य अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन सहकारी समिति के निबन्धक के रूप में नियुक्त व्यक्ति से है और इसके अन्र्तर्गत उक्त धारा की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त व्यक्ति से भी है;
(15) छटनी का तात्पर्य अनुशासनिक कार्यवाही के रूप में दी गयी सजा से भिन्न किसी भी अन्य कारण से सहकारी समिति द्वारा अपने कर्मचारी की सेवाओं की समाप्ति से है, किन्तु इसके अन्तर्गत सेवा-निवृत्त या पद त्याग के कारण सेवा की समाप्ति नही है;
(16) नियमावली का तात्पर्य समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 से है;
1[(17) सचिव का तात्पर्य यथास्थिति सम्बद्व सहकारी समिति के सचिव या प्रबन्ध निदेशक से है];
(18) काल-वेतनमान का तात्पर्य ऐसे वेतनमान से है, जिसे पर वेतन किन्हीं विहित शर्तो के अधीन रहते हुए, कालिक वेतन वृद्वियों द्वारा न्यूनतम से अधिकतम की र बढ़ाता हो;
(19) यात्रा-भत्ता का तात्पर्य किसी कर्मचारी को किसी ऐसे व्यय के निमित्त स्वीकृत भत्ते से है, जिसे उसने सेवायोजक, सहकारी समिति के हित में यात्रा करने में किया हो;
2[(20) चिकित्सीय परिचारक का तात्पर्य ऐसे चिकित्सा व्यवसायी से है, चाहे वह सरकारी अस्पताल का हो या अन्यथा, जो सम्बद्व सहकारी समिति की प्रबन्ध कमेटी द्वारा उसके कर्मचारी वर्ग की परिचर्या के लिए नियुक्त किया गया हो।]

टिप्पणी- इस विनियमावली में प्रयुक्त और अपरिभाषित, किन्तु उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 तथा तदृधीन बनाये गये नियमों में परिभाषित सभी शब्दों तथा पदो के वही अर्थ होगें जो उक्त अधिनियम/नियमावली में उनके लिए दिये गये हों।
1. अधिसूचना संख्या 432/12-सी-2-85-77 दिनांक 17 मई, 1983 द्वारा बढ़ाया गया।
2. अधिसूचना संख्या 432/12-सी-2-85-77 दिनांक 17 मई, 1983 द्वारा बढ़ाया गया।



अध्याय 2- कर्मचारी वर्ग की संख्या, भर्ती, नियुक्ति, परिवीक्षा, स्थायीकरण, सेवा-समाप्ति तथा सेवा-निवृत्ति