अनुसूची 6
सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976
भाग-6-धारा 122-क के
अन्तर्गत
उत्तर प्रदेश सरकार
सहकारिता अनुभाग-2
संख्या 3644/12-सी-2-75-76,
लखनऊ 19 अगस्त, 1976
अधिसूचना


उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11, 1966) की धारा 122-क द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल, एतद्द्वारा सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976 बनाते हे जिसे नीचे दिया गया है-
1. शीर्ष नाम और प्रारम्भ- (1) यह नियमावली सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976 कही जायेगी।
(2) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965के अधीन निबन्धित या निबन्धित समझे गये समस्त जिला /केन्द्रीय सहकारी बैंको पर लागू होंगी।
(3) यह सहकारी गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रयुक्त होगी।
2. परिभाषाएं- जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस नियमावली में-
(क). अधिनियम का तात्पर्य समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11 , 1966) से है,
(ख). शीर्ष बैंक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ से है,
(ग) प्राधिकारी का तात्पर्य नियम 4 (क) के अनुसार यथा संगठित संवर्ग प्राधिकारी से है।
(घ) कमेटी का तात्पर्य 4 (ख) के अनुसार गठित प्रशासनिक कमेटी से है।
(ड़). बैंक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 में यथा परिभाषित केन्द्रीय जिला सहकारी बैंक से है,
(च) सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है।
(छ) सदस्य का तात्पर्य इस नियमावली के अनुसार सेवा में आमेलन, पदोन्नति या सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है,

(ज) निबन्धक का तात्पर्य अधिनियम की धारा 3 (1) के अधीन उत्तर प्रदेश राज्य की सहकारी समितियों के निबन्धक के रूप में नियुक्ति व्यक्ति से है।
(झ) सचिव का तात्पर्य बैंक के मुख्य कार्यालय अधिकारी से है, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाता हो,
() सेवा का तात्पर्य नियम 3 के अधीन सृजित सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा से है।
1[3. सेवा का सृजन- उत्तर प्रदेश के सहकारी बैंको के निम्नलिखित पदों से सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा की रचना होगी-
(1) सचिव,
(2) मुख्य लेखाकार;
(3) प्रबन्धक;
(4) कार्यापालक अधिकारी; और
(5) बैंक का विकास अधिकारी,
4. कार्य निकाय का सृजन-2[(क) संवर्ग प्राधिकारी का गठन निम्नलिखित प्रकार से किया जायेगा -
(1) शीर्ष बैंक का सभापति                                           -                                         सभापति
(2) निबन्धक द्वारा नाम-निर्दिष्ट एक अपर निबन्धक                                               -                                       उपसभापति
(3) शीर्ष बैंक की प्रबन्ध कमेटी का एक नाम निर्दिष्ट व्यक्ति                  -                                          सदस्य
(4) सरकार द्वारा नाम-निर्दिष्ट बैंको के दो सभापति                        -                                          सदस्य
(5) वित्त, सहकारिता और गन्ना विभाग के प्रतिनिधित्व करने

      वाले सरकार द्वारा नाम-निर्दिष्ट तीन व्यक्ति                           -                                          सदस्य
(6) राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का एक प्रतिनिधि                 -                                          सदस्य
(7) शीर्ष बैंक का प्रबन्ध निदेशक                                                                           -                                  सदस्य सचिव
(ख) प्रशासनिक कमेटी का गठन निम्नलिखित प्रकार से किया जायेगा-
(1) निबन्धक, सहकारी समितिय उत्तर प्रदेश                                                    -                                         सभापति
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(2) शीर्ष बैंक की प्रबन्ध कमेटी का एक प्रतिनिधि                        -                                         सदस्य
(3) सरकार द्वारा नाम-निर्दिष्ट बैंक का एक प्रतिनिधि                      -                                         सदस्य
(4) राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का एक प्रतिनिधि                 -                                        सदस्य
(5) शीर्ष बैंक का प्रबन्ध निदेशक                                                                          -                                    सदस्य सचिव

1. अधिसूचना संख्या 3625/12-सी-1-83-7(26)-1978, दिनांक 12 सितम्बर, 1983 द्वारा प्रतिस्थापित ।
2. अधिसूचना संख्या 5205/49-1-98, दिनांक 23 दिसम्बर, 1998 द्वारा प्रतिस्थापित।


(ग) यदि प्राधिकारी या कमेटी के सदस्य का कोई पद किसी कारण, से बिना भरे हुये रहे तो इससे यथास्थिति, प्राधिकारी या कमेटी की किसी कार्यवाही की विधिमान्यता पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा।,
5. प्रतिनियुक्तियों पर इस नियमावली का प्रवर्तन- ऐसे कर्मचारियों की स्थिति में जिनकी सेवा निबन्धक या सरकार या किसी अन्य अभिकरण द्वारा इस सेवा के लिये उधार ली गई हो, यह नियमावली केवल उस सीमा तक लागू होगी जिस तक वह प्रतिनियुक्ति के निबन्धनों तथा शर्तो से असंगत न होः
प्रतिबन्ध यह है कि नियम 9 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सेवा में अन्तिम रूप से आमेलन के पश्चात् कोई नियम जिससे कर्मचारी ऐसे अन्तिम आमेलन के पूर्व नियन्त्रित होता हो, लागू नहीं होगा।
6. प्राधिकारी की शक्ति- प्राधिकारी की निम्नलिखित शक्ति होगी-
(क) सेवा से सम्बन्धित नीति विषयक समस्त मामलों को विनिश्चित करना,
(ख) कमेटी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक बजट का अनुमोदन करना,
(ग) समस्त विषयों में कमेटी के आदेश के विरूद्व अपील, सुनना, सिवाय उन विषय के जो पदच्युत करने, हटाये जाने या पदोन्नति करने से सम्बन्धित हो, जिनका निस्तारण अधिनियम की धारा 122 के अधीन बनाये गये विनियमों के अनुसार किया जायेगाः
7. कमेटी -
(क) सेवा के सदस्यों के सम्बन्ध में नियुक्ति प्राधिकारी होगी,
(ख) निबन्धक के पूर्वानुमोदन के अधीन रहते हुये सेवा के अनुरक्षण के लिए बैंक द्वारा देय अंशदान का निर्धारण करेगी,
(ग) निबन्धक के पूर्वानुमोदन के अधीन रहते हुये सदस्यों की भर्ती और सेवा की शर्तो से सम्बन्धित विनियम बनायेगी,
(ध) सेवा के सदस्यों पर सम्पूर्ण रूप से नियन्त्रण रखेगी और पर्यवेक्षण करेगी,
(ड़) को, ऐसी वित्तीय शक्तिय होंगी जो इस नियमावली में विनिर्दिष्ट है, और
(च) को निबन्धक के पूर्वानुमोदन से, समय-समय पर सेवा के सदस्यों की संख्या का निर्धारण और उसमें परिष्कार करने की शक्ति होगी।
8. सदस्य/सचिव के कर्तव्य- सदस्य/सचिव के निम्नलिखित कर्तव्य और दायित्व होंगे-
(क) नियम 7 के उपनियम (घ) के अधीन रहते हुये, सेवा के सदस्यों पर नियंत्रण रखना,
(ख) वह लेखों के उचित अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी होगा;
(ग) प्राधिकारी और कमेटी की बैठक बुलाना और उनकी कार्यवाहियों का अभिलेख रखना,
(घ) कमेटी के सभापति के पूर्वानुमोदन के अधीन रहते हुये, सेवा के सदस्य को एक बैंक से दूसरे बैंक में स्थानान्तरित करना;
(ड़) प्राधिकारी और कमेटी की ओर से पत्र व्यवहार करना,
(च़) सेवा के सदस्यों की श्रेणीवार सूची रखना,
(छ़) बैंक से, नियम 7 (ख) में यथानिर्दिष्ट अंशदान वसूल करना।
1[9. कर्मचारियों का अनुवीक्षण तथा आमेलन - (1) सेवा में सम्मिलित पदों पर कार्यरत बैंक के कर्मचारी अस्थायी रूप से सेवा के सदस्य समझे जायेंगे। ऐसे सदस्यो को अन्तिम रूप से सेवा में आमेलित किये जाने का प्रश्न, प्राधिकारी द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अधीन रहते हुए, कमेटी द्वारा विनिश्चित किया जायेगा।
(2) सेवा में सम्मिलित पद पर अस्थायी रूप से कार्यरत कोई कर्मचारी इस नियमावली के प्रारम्भ से तीन दिन के भीतर कमेटी के सचिव को इस निमित्त लिखित नोटिस द्वारा ऐसी सेवा के सदस्य न होने के अपने विकल्प की सूचना दे सकता है और स्थिति में उसकी सेवा ऐसी नोटिस के दिनांक से सामाप्त हो जाएगी और वह बैंक से निम्नलिखित प्रतिकर का हकदार होगा;
(क) किसी स्थायी कर्मचारी की स्थिति में, उसकी सेवा के तीन मास की अवधि के या सेवा की शेष अवधि के, जो भी कम हो, वेतन (जिसके अन्तर्गत  सभी भत्ते भी है) के बराबर धनराशि;
(ख) किसी अस्थायी कर्मचारी की स्थिति में, उसकी सेवा के एक मास की अवधि के या सेवा की शेष अवधि के, जो भी कम हो, वेतन (जिसके अन्र्तगत सभी भत्ते भी है) के बराबर धनराशि;
प्रतिबन्ध यह है कि जहॉ किसी ऐसे व्यक्ति का सेवा में सम्मिलि पद से भिन्न किसी पद पर स्वत्व (लीएन) हो, वह वह उस पद पर, जिस पर उसका स्वत्व है, प्रतिवर्तित किये जाने का हकदार होगा और यदि वह इस प्रकार प्रत्यावर्तित होता है तो वह किसी प्रतिकर का हकदार न होगा ।
(3) अन्य सदस्यों की सेवा उपनियम (4) में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित की जायेगी।
(4) प्रशासनिक कमेटी अस्थायी रूप में आमेलित ऐसे कर्मचारियों का अनुवीक्षण करेगी जिन्होने प्राधिकारी द्वारा निर्धारित अर्हताओं तथा मानक के अनुसार सेवा का सदस्य होने का विकल्प किया है। यदि ऐसे अनुवीक्षण के परिणामस्वरूप अस्थायी रूप से आमेलित कोई कर्मचारी सेवा में अन्तिम रूप से आमेलित किये जाने के लिए कमेटी द्वारा उपयुक्त न पाया जाये तो सम्बद्ध बैंक में उसकी सेवा कमेटी का विनिश्चिय संसूचित किये जाने के दिनांक से समाप्त हो जायेगी और उस दशा में वह उपर्युक्त प्रतिबन्धात्मक खण्ड में उल्लिखित प्रतिकर या परिवर्तन का हकदार होगा ।,
1[10. वेतन - (क) विभिन्न श्रेणियों की बैंक की सेवा में समाविष्ट पदों के वेतनमान, जब तक कि निबन्धक के अनुमोदन से उसका पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर न किया जाये वही होंगे जो इस नियमावली से संलग्न अनुसूची-एक से उल्लिखित है।
(ख) बैंको का प्रवर्गीकरण इस नियमावली के प्रारम्भ होने के दिनांक से पूर्ववर्ती सहकारिता वर्ष के अन्तिम कार्य-दिवस को उनकी सक्रिय पूजी के आधार पर किया जायेगा, जैसा कि नीचे निर्दिष्ट किया गया है-


1. अधिसूचना संख्या 3625/12-सी-7(27)-1978, दिनांक 12 सितम्बर, 1983 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ ।
2. अधिसूचना संख्या 3625/12-सी-7(27)-1978, दिनांक 12 सितम्बर, 1983 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ ।

 

(1) क वर्ग के बैंकों के अन्तर्गत वे बैक होंगे जिनकी सक्रिय पूंजी 5 करोड़ रुपये या इससे अधिक हो।
(2) ख वर्ग के बैंक ऐसे बैंक होंगे जिनकी पूंजी 2.50 करोड़ रुपये या इससे अधिक ,किन्तु 5 करोड़ रुपये से कम है।
(3) ग वर्ग के बैंक ऐसे बैंक होंगे जिनकी सक्रिय पूंजी 2.50 करोड़ रुपये से कम हो ।
(ग) सेवा के सदस्य ऐसे भत्तों के हकदार होंगे जो निबन्धक के पूर्वानुमोदन से प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किये जायें।
(घ) सेवा के सदस्यों को ऐसा यात्रा-भत्ता, जिसके अन्तर्गत स्थानान्तरण यात्रा-भत्ता भी है, अनुमन्य होगा जो निबन्धक के पूर्वानुमोदन से प्राधिकारी द्वारा नियत किये जायें।
11. अर्हतायें-सेवा के सदस्यों की अर्हतायें ऐसी होगी जैसी कि अधिनियम की धारा 120 के अधीन निबन्धक द्वारा नियत की जायें।
12. सेवा के प्रति वित्तीय दायित्व-(1) सेवा के सदस्यों को सवाकाल में कर्तव्य निर्वहन करने का वेतन, जिसके अन्तर्गत समस्त भत्ते भी हैं उस बैंक द्वारा दिया जायेगा जिसके लिये कर्तव्य निर्वहन किया गया है।
(2) आकस्मिक अवकाश से भिन्न अवकाश की अवधि का भत्तों सहित वेतन का भुगतान शीर्ष बैंक द्वारा किया जायेगा ।
(3) प्रशिक्षण के दौरान सदस्यों का अवकाश वेतन जिसमें भत्ते सम्मिलित हैं भविष्य निधि, उपदान, बोनस और प्रशिक्षण के दौरान वेतन और  भत्ते, अंशदान प्राधिकारी के अनुमोदन से प्रशासनिक कमेटी द्वारा सूचित दर पर सम्बद्ध बैंक द्वारा शीर्ष बैंक को किया जायेगा । ऐसा अंशदान शीर्ष द्वारा बनाई गई तथा अनुरक्षित सामान्य संवर्ग निधि में जमा किया जायेगा ।
(4) शीर्ष बैंक का सचिव अवकाश वेतन, अंशदान, उपादान, भविष्य निधि, बोनस और किसी अन्य लेखे के लिए जिसमें बैंक द्वारा सेवा के लिए अंशदान किया जाये, सामान्य संवर्ग निधि के अधीन पृथक-पृथक लेखा रखेगा और उसे परिचालित करेगा ।
(5) स्थानान्तरण यात्रा भत्ता और कार्य ग्रहण काल के वेतन का भुगतान उस बैंक द्वारा किया जायेगा जिसमें स्थानान्तरित होने पर कोई सदस्य कार्यभार ग्रहण करता है।
(6) किसी ऐसे प्रशिक्षण के दौरान जिसमें कोई सदस्य शीर्ष बैंक द्वारा प्रतिनियुक्ति किया जाये, वेतन और भत्तों का भुगतान शीर्ष बैंक द्वारा वहन किया जायेगा
(7) सेवा से सम्बन्धित दिन प्रतिदिन का कार्य करने और इस नियमावली के कार्यान्वयन के लिए संवर्ग प्राधिकारी के निदेशानुसार शीर्ष बैंक में एक सामान्य संवर्ग कोष्ठक का सृजन किया जायेगा और उस पर होने वाला समस्त व्यय शीर्ष बैंक द्वारा वहन किया जायेगा ।
(8) सेवा के सदस्य उस समय तक अपने पुराने वेतनमान में अपना वेतन और भत्ता पाते रहेगें जब तक कि उन्हें सेवा में अन्तिम रुप से आमेलित न कर लिया जाये।
13. प्रकींर्ण- बैंक की प्रबन्ध कमेटी को ऐसे पदों पर जो सेवा में सम्मिलित हैं, किसी व्यक्ति को नियुक्त करने की शक्ति नहीं होगी। जहॉ प्रशासनिक कमेटी ने सेवा के किसी सदस्य को किसी बैंक में ऐसे पद पर नियुक्त किया हो, वह सम्बद्ध बैंक की प्रबन्ध कमेटी उस सदस्य पर एंव नियन्त्रण रखेगी जैसा नियम 7 (ग) के अधीन बनाये गये विनियम में निर्दिष्ट हैं ।
14. निर्वचन-यदि किसी समय इस नियमाली के निर्वचन या उसके प्रवर्तन के सम्बद्ध में कोई विवा उत्पन्न हो तो मामला निबन्धक को निर्दिष्ट किया जायेगा जिस पर उस विनिश्चय अन्तिम होगा ।


1 [अनुसूची-एक]
[नियम 10(क) देखिये]

विभिन्न श्रेणियों के बैंकों की सेवा में समाविष्ट
विभिन्न पदों के वेतनमान

पद का नाम श्रेणी-क श्रेणी-ख श्रेणी-ग
सचिव रु0

550-30-700-द0रो0

40-900-द0

रो0-50-1200

रु0

 350-20-550-द0रो0

30-850

रु0

300-20-500-द0रो0

25-750

मुख्य लेखाकार 350-20-550-द0रो0 30-850 300-18-480-द0रो0 27-750 250-15-400-द0रो0 20-600
प्रबन्ध तदैव तदैव तदैव
कार्यपालक अधिकारी तदैव तदैव तदैव
विकास अधिकारी तदैव तदैव तदैव

अनुसूची 7
 उत्तर प्रदेश प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति
 केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976