अनुसूची 7
उत्तर प्रदेश प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति
केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976
संख्या सी/91-12 सी-2-76 लखनऊ
19 अगस्त,1976
अधिसूचना

 


उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11,1966) की धारा 122-क द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल एतद्द्वारा निम्नलिखित उत्तर प्रदेश प्ररम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976 बनाते हैं:


भाग 1
प्रारम्भिक


1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भः-(1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976 की जायेगी ।
(2) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11, 1966) के अधीन निबन्धित या निबन्धित समझी गयी समस्त प्रारम्भिक सहकारी ऋण समितियों पर, जिनके अन्तर्गत  कृषक सहकारी ऋण भी है, लागू होगी ।
(3) यह नियमावली सरकारी गजट में प्रकाशित होने में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रवृत्त होगी ।
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1.अधिसूचना संख्या 3635/12-सी-1-83(2) दिनांक 12 सितम्बर, 1983 द्वारा बढ़ाया गया ।

2. परिभाषायें-जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो, इस नियमावली में-
(क) प्राधिकारी का तात्पर्य प्रारम्भिक कृषि सहकारी समितियों के लिए राज्य संवर्ग प्राधिकारी से है,
(ख) बैक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 2 के खण्ड (क) और () में यथा परिभाषित जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक से है,
(ग) केन्द्रीयित सेवा सहकारी का तात्पर्य ऐसी सेवा से है जिसमें नियम 3 में उल्लिखित पद सम्मिलित है,
(घ) जिला कमेटी का तात्पर्य नियम 6 के उपनियम(4) के अधीन गठित जिला प्रशासनिक कमेटी से है,
(ङ) कर्मचारी का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समितियों की पूर्णकालिक सेवा में हो और केन्द्रीयित सेवा में सम्मिलित पदो पर कार्य करता हो,
(च) सदस्य का तात्पर्य केन्द्रीयित सेवा में सम्मिलित पद पर नियुक्त या आमेलित व्यक्ति से है,
[(चच)] प्रबन्ध निदेशक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के अधीन निबन्धित या निबन्धित समझी गयी कृषक सेवा सहकारी समिति के प्रबन्ध निदेशक से है,
(चचच) सम्भाग का तात्पर्य ऐसे सम्भाग से है, जिनमें किसी सम्भागीय उपनिबन्धक, सहकारी समिति की अधिकारिता के अधीन आने वाले जिले समाविष्ट हो।,
(छ) सम्भागीय कमेटी का तात्पर्य नियम 6 (3) के अधीन गठित सम्भागीय प्रशासनिक कमेटी से है,
(ज) नियमावली का तात्पर्य उत्तर प्रदेश प्रारम्भिक कृषि सहकारी समिति केन्द्रीयित सेवा नियमावली 1976 से है,
(झ) समिति का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के अधीन निबन्धित या निबन्धित समझी गयी प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति से है, और
() राज्य संवर्ग प्राधिकारी का तात्पर्य नियम 7 के उपनियम(2) के अधीन गठित कमेटी से है।
इस नियम में प्रयुक्त और यहॉ पर अपरिभाषित, किन्तु उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 और उसके अधीन बनाये गये नियमों में परिभाषित शब्दों और पदों के वही अर्थ होंगे जो उक्त अधिनियम और नियमावली में उनके लिए दिये गये है।


भाग 2
संवर्ग और सदस्य-संख्या


2[3.  केन्द्रीयित  सेवा की रचनाः-(1) केन्द्रीयित सेवा में कृषक सेवा सहकारी समितियों के प्रबन्ध निदेशक और प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समितियों के सचिव के पद समाविष्ट होंगे ।
(2) कृषक सेवा सहकारी समितिय/ प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति / प्रबन्ध निदेशक/ सचिव अस्थानान्तरणीय होंगे ।
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1. अधिसूचना संख्या 1636/XII-C-1-.84-7(10)-1976 दिनांक 8 जून,1984 जो उ0प0 असाधारण गजट में दिनांक 8 जून, 1984 को प्रकाशित हुआ ।
2. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा प्रतिस्थापित (20-6-2004 से प्रभावी ) ।


1[4. वेतनमान -सचिवों का वेतनमान वह होगा जो निबन्धक, सहकारी समितिय, उ0प्र0 द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाये, संवर्ग के सचिवों का वेतन का भुगतान उस समिति द्वारा किया जायेगा जह वे कार्यरत हो
5.अर्हता- कोई व्यक्ति किसी समिति का प्रबन्ध निदेशक/ सचिव तब तक नियुक्त नही किया जायेगा, जब तक कि वह निम्नलिखित न्यूनतम शैक्षिक अर्हताएं और ऐसी अन्य शर्ते उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 ( उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11,1966) की धारा 120 और इसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन निबन्धक द्वारा निर्धारित की गई हो, पूरी न करता होः

समितियों का संवर्ग न्यूनतम शैक्षिक अर्हताएं
प्रवर्ग एक और दो किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय का स्नतक और किसी मान्यताप्राप्त प्रशिक्षण केन्द्र पर सहकारी प्रशिक्षण में प्रशिक्षित हो या इन्टरमीडिएट और किसी मान्यताप्राप्त प्रशिक्षण केन्द्र पर सहकारी प्रशिक्षण में प्रशिक्षित हो और किसी सहकारी समिति में या उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन के सहकारी पर्यवेक्षक के रुप में या सहकारी निरीक्षक के रुप में निरन्तर कार्य करने का कम से कम पच वर्ष का अनुभव हो।
प्रवर्ग तीन वाणिज्य या कृषि या अर्थशास्त्र विषय मे इन्टरमीडिएट।


6.केन्द्रीयित सेवा के प्रवर्ग एक, दो और तीन के पदों की संख्या समय-समय पर, प्राधिकारी के अनुमोदन से, जिला कमेटी द्वारा प्रवर्गवार निर्धारित की जायेगी ।



भाग 3
कार्यपालक प्राधिकारी


2[7. (1)    केन्द्रीयित सेवा का पर्यवेक्षण और नियंत्रण जैसा कि आगे विनिर्दिष्ट है, निम्नलिखित में निहित होगा-
(एक) राज्य संवर्ग प्राधिकारी
(दो) निकाला गया
(तीन) जिला प्रशासनिक कमेटी
(2) उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड की प्रबन्ध समिति ही राज्य संवर्ग प्राधिकारी होगी तथा उक्त बैंक के प्रबन्ध निदेशक सदस्य-सचिव होंगे ।
प्रबन्ध कमेटी(राज्य संवर्ग प्राधिकारी) अपने समस्त या किन्हीं अधिकारों की ऐसी उपसमिति को प्रतिनिधानित कर सकती है, जो उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 393 तथा उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक लिमिटड की उपविधयों के प्राविधानों अन्तर्गत इस प्रयोजन हेतु गठित की गई हो।
(3) प्रत्येक सम्भाग में एक सम्भागीय प्रशासनिक कमेटी होगी जिसमें निम्न्लिखित होंगेः
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1. अधिसूचना संख्या 699/49-1-03-500(1)-03 दिनांक 4 जून, 2003 द्वारा प्रतिस्थापित जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग -4 खण्ड(ख)में दिनांक 4 जून, 2003 को प्रकाशित हुआ ।
2. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा प्रतिस्थापित (30-6-2004 से प्रभावी ) ।


(एक) सम्भाग का उप निबन्ध, सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश                                                                                                                      सभापति

1[(दो) सम्भाग में जिलों के नामों के हिन्दी वर्गमाला-क्रम में ,चक्रानुक्रम से एक सहकारी वर्ष के लिए बैंक का सभापति             सदस्य

(तीन) सम्भाग में जिलों के नामों के हिन्दी वर्गमाला-क्रम में ,चक्रानुक्रम से एक सहकारी

वर्ष के लिए जिला सहायक निबन्धक सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश, किन्तु वह उस जिले से

भिन्न का हो जिसका प्रतिनिधित्व बैंक का सभापति करता हो                                                       सदस्य

(चार) सम्भाग में जिलों के नामों के हिन्दी वर्गमाला-क्रम में ,चक्रानुक्रम से एक सहकारी वर्ष

के लिए बैंक का एक सचिव, किन्तु वह उस जिले से भिन्न जिसे का हो जिसका

प्रतिनिधित्व बैंक का सभापति और सहायक निबन्धक, सहकारी समिति उत्तर प्रदेश करता हो                               सदस्य

(पच) सम्भाग के उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक का सम्भागीय अधिकारी                                               सदस्य/सचिव

2[(4) संबन्धित जिला सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति ही जिला प्रशासनिक कमेटी होगी तथा इस बैंक के सचिव/महा प्रबन्धक सदस्य सचिव होंगे ।
प्रबन्ध समिति (जिला प्रशासनिक कमेटी) अपने समस्त या किन्हीं अधिकारों को ऐसी उपसिमिति को प्रतिनिधानित कर सकती है, जो उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 393 तथा संबन्धित जिला सहकारी बैंक की उपविधियों के प्राविधानों के अन्तर्गत इस प्रयोजन हेतु गठित की गयी हो।
(5) ऐसे जिले के मामले में जहॉ जिला सहकारी बैंक विद्यमान नहीं है और जिला एक से अधिक जिला सहकारी बैंक का संचालन क्षेत्र आच्छादित कर रहा है, ऐसी स्थिति में सम्बन्धित जिला सहकारी बैंक से आच्छादित संचलन क्षेत्र के लिए पृथक जिला प्रशासनिक कमेटी होगी, जिसका गठन निम्न रीति से होगाः


1. अधिसूचना संख्या 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून,2004 द्वारा निकाल दिया गया जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग -4 खण्ड(ख)में दिनांक 30 जून, 2004 को प्रकाशित हुआ (30-6-2004से प्रभावी)।
2. उ0प्र0 अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा प्रतिस्थापित (30-6-2004 से प्रभावी ) ।


(एक) सम्बन्धित बैंक जिसका संचालन क्षेत्र जिले में आ रहा हो, का यथास्थिति सभापति या प्रशासक                            सभापति(पदेन)

(दो) जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितिय, और पंचायते                                            सदस्य

(तीन) जिला का जिला सहायक निबन्धक, सहकारी समितिय,उत्तर प्रदेश                                                                        सदस्य/सचिव

नोट- ऐसे जिले में जिला प्रशासनिक कमेटी की कार्यालय व्यवस्था प्राधिकारी द्वारा जारी किये गये निर्देशों के अनुसार होगी ।



भाग 4
राज्य संवर्ग प्राधिकारी की शक्ति और उसके कर्तव्य


1[8. (1)केन्द्रीयित सेवा के लिए प्राधिकारी मुख्य नीति निर्धारक निकाय होगा । प्राधिकारी की निम्नलिखित शक्तियॉ, कर्तव्य औ उत्तरदायित्व होंगे।
(एक) जिला प्रशासनिक कमेटी पर सामान्य नियन्त्रण और पर्यवेक्षण रखना,
(दो) केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों के कर्तव्य औ उत्तरदायित्व अधिकथित करना,
(तीन) केवल नीति विषयक मामलों के सम्बन्ध में जिला प्रशासनिक कमेटी को उनके समुचित रुप से कार्य करने के लिए निर्देश देना और उनका पथ प्रदर्शन करना
(चार) निकाला गया ।
(पच) केन्द्रीयित सेवा से सम्बद्ध नीति विषयक मामलों पर राज्य सरकार और निबन्धक, सहकारी समिति ,उत्तर प्रदेश को सलाह देना,
(छः) निकाला गया ।
(सात) सदस्य सचिव को प्राधिकारी की ऐसी शक्तिय प्रत्योजित करना, जैसा उचित समझे,
(आठ) निकाला गया ।
(नौ) ऐसे अन्य कर्तव्यों और कृत्यों का सम्पादन करना जो राज्य सरकार द्वारा उसे सौंपे जायें ।
(दस) जिला प्रशासनिक कमेटी द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपील सुनना ।
(2) सदस्य सचिव जब कभी उचित समझें और सभापति से इस आशय का निदेश प्राप्त होने पर वह प्राधिकारी की बैठक बुलायेगा। ऐसी बैठक एक वर्ष में कम से कम एक बार बुलायी जायेगी । बैठक की गणपूर्ति तीन से होगी ।
(3) सभापति जब उपस्थित हों, बैठक का सभापतित्व करेगा । उसकी अनुपस्थिति में उपसभापति और दोनों की अनुपस्थिति में बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा निर्वाचित एक सदस्य, बैठक का सभापतित्व करेगा ।
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1. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा प्रतिस्थापित (30-6-2004 से प्रभावी ) ।

9. प्राधिकारी के सदस्य सचिव की शक्ति और कर्तव्यः- प्राधिकारी का सदस्य सचिव प्राधिकारी का मुख्य कार्यपाल अधिकारी होगा और उसके नियन्त्रण और पर्यवेक्षण के अधीन करते हुए वहः
(1) प्राधिकरी के लेखा-बहियों और अभिलेखों को समुचित रुप से रखने और नियतकालिक विवरण-पत्रों और विवरणियों को ठीक-ठाक तैयार कने और जब अपेक्षा की जाये, ठीक समय पर उन्हें निबन्धक और राज्य सरकार को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होगाः
(2) प्राधिकारी की बैठक बुलायेगा और ऐसी बैठकों का सुचित अभिलेख रखेगाः
(3) प्राधिकारी की र से पत्र-व्यवहार की व्यवस्था करेगाः
(4) ऐसे अन्य कर्तव्यं का पालन और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जो प्राधिकारी द्वारा उसे आरोपित या उसे प्रदत्त की जायें ।
10. प्राधिकारी का कार्यालय उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ के भूगृहादि में स्थित होगा और उसका कार्य उक्त बैंक के कर्मचारी वर्ग की सहायता और संसाधनों से चलाया जायेगा ।
1[11. सम्भागीय प्रशासनिक कमेटी की शक्ति औ कर्तव्य-प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नीति और निर्ग मार्ग निर्देशन और अनुदेशों के अधीन रहते हुए, सम्भागीय कमेटी सम्भाग में केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों पर सामान्य पर्यवेक्षण और नियन्त्रण के लिए उत्तरदायी होगी । सम्भागीय कमेटी के निम्नलिखित कर्तव्य और उत्तरदायित्व भी होंगे-
(1) जिला प्रशासनिक कमेटी पर समान्य नियन्त्रण और पर्यवेक्षण रखनाः
(2) जिला कमेटियों को उनके समुचित कार्य-संचालन के लिए निदेश देना और उनका मार्गदर्शन करनाः
(3) केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए प्रबन्ध करना और प्राधिकरी के अनुमोदन से ऐसे प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम विहित करनाः
(4) जिला कमेटी द्वारा दिये गये बड़ा दण्ड( जैसे पदच्युति, हटाया जाना या पदावनति) सम्बन्धी शासकीय आदेश से उत्पन्न अपीलों की सुनवाई और विनिश्चय करनाः
(5) केन्द्रीयित सेवा के अनुरक्षण के लिए समिति पर उद्गृहीत अंशदान की वसूली में सहायता करना:
(6) वार्षिक बजट तैयार करना उसे प्राधिकारी को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करना;
(7) प्राधिकरी द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों का सम्भाग के भीतर एक जिले से दूसरे जिले में स्थानान्तरण करना; और
(8) ऐसे अन्य कर्तव्यो का पलन और कृत्यों का सम्पादन करना जो प्राधिकारी द्वारा उसे सौंपा जाये।]
(2) सदस्य/सचिव जब उचित समझे तब और सभापति से इस आशय का निदेश प्राप्त होने पर सम्भागीय कमेटी की बैठक बुलायेगा । ऐसी बैठक छः मास में कम से कम एक बार बुलाई जायेगी । बैठक की गणपूर्ति तीन से होगी ।
(3) सभापति जब उपस्थित हो, सम्भागीय कमेटी की बैठक का सभापतित्व करेगा ।
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1 अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 11 और 12 निकाल दिया गया (30-6-2004 से प्रभावी ) ।


1[12. सम्भागीय कमेटी क सदस्य सचिव की शक्ति और कर्तव्यः-(1) सम्भागीय कमेटी के सभापति के नियन्त्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुये सम्भागीय कमेटी का सदस्य सचिव-
(1) सम्भागीय कमेटी के लेखा-बहियों और अभिलेखों को समुचित रुप से रखने और नियतकालिक विवरण पत्रों और विवरणियों को ठीक-ठीक तैयार कने और ठीक समय पर उन्हें प्राधिकारी और निबन्धक को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(2) कमेटी की बैठक बुलायेगा और ऐसी बैठकों का समुचित अभिलेख रखेगा ,
(3) सम्भागीय कमेटी की ओर से विभिन्न पत्र-व्यवहार की व्यवस्थ करेगा, ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जो सम्भागीय कमेटी उसके सभापति या प्राधिकारी द्वारा उस पर आरोपित या उसे प्रदत्तकी जाये ।
(2) सम्भागीय कमेटी का कार्यालय सम्भागीय उप निबन्धक, सहकारी समिति के कार्यालय में स्थित होगा और उसका कार्य ऐसे आवश्यक कर्मचारियों की सहायता से किया जायेगा जिसकी व्यवस्था अपर निबन्धक, सहकारी समिति ,उत्तर प्रदेश के अनुमोदन से की जाये ।
2[13.जिला प्रशासनिक कमेटी की शक्ति और कर्तव्यः-(1) जिला प्रशासनिक कमेटी जिले में केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की नियुक्ति प्राधिकारी होगी और प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नीति एवं जारी किये गये मार्गदर्शनों के अधीन रहते हुए, जिले में केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों के पर्यवेक्षण और नियन्त्रण के लिए उत्तरदायी होगी और उसके निम्नलिखित कर्तव्य और उत्तरदायित्व भी होंगे-
(एक) जिले में केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों पर नियन्त्रण और पर्यवेक्षण रखनाः
(दो) केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की प्रवर्गवार ठीक-ठाक ज्येष्ठता सूची रखनाः
(तीन) ऐसे अन्य कर्तव्यों का पाल और कृत्यों का सम्पदन करना जिन्हें प्राधिकारी द्वारा उसे सौंपा जाय ।
(2) सदस्य-सचिव जब कभी उचित समझें तब और सभापति से इस आशय का निदेश प्राप्त होने पर जिला कमेटी बैठक बुलायेगा। ऐसी बैठक तीन माह में कम से कम एक बार बुलायी जायेगी । बैठक की गणपूर्ति तीन से होगी।
(3) सभापति, जब उपस्थित हो, जिला कमेटी की बैठक का सभापतित्व करेगा, उसकी अनुपस्थिति में उपसभापति तथा दोनों की अनुपस्थिति में बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा निर्वाचित एक सदस्य बैठक का सभापतित्व करेगा।
(4) जिला कमेटी का कार्यालय जिला कोआपरेटिव बैंक मे स्थित होग। कार्यालय और कर्मचारी वर्ग के सम्बन्ध में सभी व्ययों को बैंक द्वारा वहन किया जायेगा ।
(5) कर्मचारी वर्ग की व्यवस्था प्राधिकारी द्वारा जारी किये गये निदेश के अनुसार होगी और कर्मचारी वर्ग जिला प्रशासनिक कमेटी क सदस्य-सचिव के पूर्ण प्रशासनिक नियन्त्रण में होंगे।
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1. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 11 और 12 निकाल दिया गया (30-6-2004 से प्रभावी )।
2. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा प्रतिस्थापित (30-6-2004 से प्रभावी )।


1[14. जिला कमेटी के सदस्य/सचिव की शक्ति और कर्तव्यः-जिला कमेटी के सभापति के नियन्त्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए जिला कमेटी का सदस्य/सचिव-
(1) जिला कमेटी की लेखा बहियों और अन्य अभिलेखों को समुचित रुप से रखने और नियतकालिक विवरण-पत्रों और विवरणियों को ठीक-ठीक तैयार करके और ठीक समय पर जब अपेक्षा की जाये, उन्हें सम्भागीय कमेटी और प्राधिकारी को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होगाः
(2) कमेटी की बैठक बुलायेगा और ऐसी बैठकों का समुचित अभिलेख रखेगा;
(3) जिला कमेटी की ओर से पत्र व्यवहार करने का प्रबन्ध करेगा;
(4) केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों पर प्रभावी पर्यवेक्षण करने को सुनिश्चित करेगा;
(5) सहायक निबन्धक की पूर्व सहमति से केन्द्रीयित सेवा के किसी सदस्य को निलम्बित करने की शक्ति होगी;
(6) जिले में केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की सेवा-पुस्तिका, चरित्र-पंजी और वैयक्तिक पत्रावली को समु‍चित और अद्यावधिक रखे जाने को सुनिश्चित करेगा;
(7) केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की सेवा-विषयक समस्त मामलों का शीघ्र निस्तारण किये जाने को सुनिश्चित करेगा;
(8) नियम 15 के अधीन बनाई गयी राज्य प्रारम्भिक केन्द्रीयित सेवा निधि में किये गये अंशदान में से केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों के वेतन के वितरण का प्रबन्ध करेगा;
(9) जिला कमेटी के कार्यालय को समुचित ढंग से रखने और सुचारु रुप से कार्य करने को सुनिश्चित करेगा; और
(10) ऐसे अन्य  कर्तव्यों का पालन और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, ज जिला कमटी द्वारा उस पर आरोपित या उसे प्रदत्त किये जायें]



भाग 5
अंशदान



2[15 से 22. तक निकाल दिया गया।
पुराना नियम नीचे विद्यमान हैः
3[15. प्रत्येक समिति, निबन्धक सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश के पूर्वानुमोदन से प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर पर और रीति से जिला प्रारम्भिक केन्द्रीयित सेवा निधि नाम निधि में अंशदान करेगी ।
प्रतिबन्ध यह है कि अंशदान पूर्ववर्ती सहकारी वर्ष में जिला सहकारी बैंक या वाणिज्य बैंक से समिति द्वारा कुल उधार ली गयी धनराशि पर उद्गृहित किया जायेगा और जह उक्त उधार कुछ भी न हो, वह अंशदान समिति के सदस्यों पर, पूर्ववर्ती सहकारी वर्ष के अन्त में कुल ऋण की धनराशि पर उद्गृहित किया जायेगा:
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1. अधिसूचना सं0 1636/12-सी-1-84-7(10)-1976 दिनांक 8 जून, 1984 द्वारा प्रतिस्थापित ।
2. नियम 16,16,17,18,19,20,21,22 अधिसूचना सं0 699/49-1-03-500(1)-03 दिनांक 4 जून, 2003 द्वारा निकाल दिया गया जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4(ख) दिनाक 4 जून 2003 प्रकाशित हुआ।
3. अधिसूचना सं0 1636/12-सी-1-84-7(10)-1976 दिनांक 8 जून, 1984 द्वारा प्रतिस्थापित ।


अग्रेतर प्रतिबन्ध यह है कि जब तक समितियों के प्रबन्ध निदेशकों/सचिवों से भिन्न कर्मचारी वर्ग केन्द्रीय सेवा में सम्मिलित नहीं किये जाते, तक तक अंशदान की दर कुल उधार ली गई धनराशि या बकाया या कुल ऋण की धनराशि के 1.5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।,
16. नियम 14 के अनुसार उद्धग्रहित अंशदान पहली जुलाई और पहली जनवरी को दो समान किस्तोमें समिति द्वारा देय होगी । यह सम्बद्ध समिति की परिसम्पत्तियों पर प्रथ प्रभार होगा। किसी समिति द्वार नियत दिनांकों तक ऐसे अंशदान की भुगतान न करने की दशा में वह जिला सहायक निबन्धक, सहकारी समिति द्वारा जारी किये गये इस आशय का प्रमाण-पत्र  परी भू-राजस्व की बकाया की भांति वसूलीय होगा ।
17.नियम 14 के अधीन समिति द्वारा देय अंशदान सम्बद्ध समिति की ओर से जिले के बैंक द्वारा जमा किया जा सकता है और ऐसी दशा में बैंक द्वारा जमा की गई राशि सम्बद्ध समिति के नाम उसके लेखे में डाली जायेगी ।
1[18.जिला प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधि जिले के जिला सहकारी बैंक के एक पृथक लेखे में रखी जायेगी और उसका संचाल जिला प्रशासनिक कमेटी के सदस्य/सचिव और सभापति के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।]
2[19.यदि समितियों द्वारा .जिला प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधि में किया गया अंशदान किसी सहकारी वर्ष में केन्द्रीयित सेवा के अनुरक्षण व्यय से कम पड़े तो इस कमी को राज्य प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधि के जिसे राज्य स्तर पर प्राधिकारी द्वारा रखा जायेगा, अनुदान से पूरा किया जायेगा।
(2) राज्य प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधि उत्तर प्रदेश कोआपरेटव बैंक लिमिटेड, लखनऊ के एक पृथक लेखा में रखी जायेगी और उसका संचालन निबन्धक द्वारा समय-समय पर जारी किये गये अनुदेशों के अनुसार राज्य संवर्ग प्राधिकारी द्वारा किया जायेगा ।
(3) केन्द्रीय/राज्य सरकार और अन्य स्त्रोतो से यदि कोई हो, प्राप्त अनुदान और राज्य सहायता की सम्पूर्ण धनराशि प्राधिकारी द्वारा राज्य प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधि में जमा की जायेगी। इसके अतिरिक्त ,निबन्धक, उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक, अन्य शीर्ष सहकारी संस्थाओं और जिला/ केन्द्रीय सहकारी बैंक को जिला प्रारम्भिक केन्द्रीयित सेवा निधि मे किये गये अंशदान में जो केन्द्रीयित सेवा के अनुरक्षण व्यय में कमी है, उसे पूरा करने में लिए उपर्युक्त निधि मे समय-समय पर इस प्रयोजन के लिये उसके द्वार अवधारित दर पर सहकारी वर्ष में अंशदान करने के लिए निदेश दे सकता है।
(4) प्राधिकारी जिला/ केन्द्रीय सहकारी बैं को केन्द्रीयित सेवा के अनुरक्षण व्यय के लिए समितियो से प्राप्त अंशदान में अतिरिक्त धनराशि को किसी सहकारी वर्ष में राज्य प्रारम्भिक केन्द्रीय सेवा निधिमें जमा करने के लिए प्राधिकारी को अन्तरित करने का निदेश देने के लिए सक्षम होगा।]




भाग 6
कर्मचारियों का आमेलन


20. इस नियमावली के प्रारम्भ के समय समितियों के वर्तमान कर्मचारियों को केन्द्रीयित सेवा में अस्थायी रुप से आमेलित किया गया समझा जायेगाः
प्रतिबन्ध यह है कि अस्थाई रुप से आमेलित कर्मचारी सम्बद्ध समितियों से अपने-अपन पुराने वेतनमान में अपना वेतन और भत्ते पाते रहेंगे ।
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1.Rules 18,19, Subs.by Noti. No. 1636/XII-C-1-84-7(10)- 1976 Dated  8.6.1984
2. Rules 18,19, Subs.by Noti. No. 1636/XII-C-1-84-7(10)- 1976 Dated  8.6.1984

21.केन्द्रीयित सेवा मे पदों की संख्या के आधार पर अस्थाई रुप से लिये गये समितियों के वर्तमान कर्मचारियों की निबन्धक सहकारी समिति द्वारा इस निमित्त जारी किये गये अनुदेशों के अनुसार उनका अनवीक्षण करने के पश्चात् उक्त सेवा में अन्तिम रुप से आमेलित कर लिया जायेगा।
22.केन्द्रीयित सेवा में अस्थाई रुप से सम्मिलित समिति का कोई कर्मचारी इस नियमावली के प्रारम्भ् होने के दिनांक से तीस दिन के भीतर इस निमित्त जिला कमेटी के सचिव को लिखित  नोटिस देकर ऐसी सेवा का सदस्य न होने के अपने विकल्प की सूचना देगा और इस स्थिति में उनकी सेवायें ऐसी नोटिस के दिनांक से समाप्त समझी जायेगी और वह सम्बद्ध समिति से निम्नलिखित प्रतिकर का हकदार होगा जो-
(1) किसी स्थायी कर्मचारी की स्थिति में उसकी सेवा के तीन मास की अवधि के या सेवा की शेष अवधि के जो भी कम हो, उसके वेतन( ‍िजसके अन्तर्गत सभी भत्ते भी हैं) के बराबर होगा,

किसी स्थायी कर्मचारी की स्थिति में उसकी सेवा के एक मास की अवधि के या सेवा की शेष अवधि के, उसके वेतन( ‍िजसके अन्तर्गत सभी भी भत्ते हैं) के बराबर होग:
प्रतिबन्ध यह है कि जब किसी ऐसे कर्मचारी का इस सेवा में सम्मिलित पद से भिन्न किसी पद पर स्वत्व(लीएन) हो तो वह उस पद पर जिस पर उसका स्वत्व है, प्रत्यावर्तित  किये जाने का हकदार होगा और यदि वह इस प्रकार प्रत्यावर्तित   होता है तो वह किसी प्रतिकर का हकदार न होगा ।


भाग 7
भर्ती


1[23. उत्तर प्रदेश कृषि सहकारी ऋण समिति सेवा संवर्ग को एतद्द्वार मृत संवर्ग घोषित किया जाता है। केन्द्रीयित सेवा संवर्ग मे अब किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जायेगी ।
2[24. केन्द्रीयित सेवा में किसी पद पर नियुक्ति निम्नलिखित रीति से की जायेगी-
(एक) नियम 21 के अनुसार आमेलन द्वारा,
(दो) उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन के सहकारी पर्यवेक्षकों और सहकारिता विभाग के निरीक्षक समूह-एक और दो के संवर्गो के प्रतिनियुक्ति पर लेकर जैसा कि नियम 4 और 26(2) में व्यवस्थित है;
(तीन) सीधी भर्ती द्वारा;
(चार) पदोन्नति द्वारा ।
3[25. सीधी भर्तीः-(1) प्रवर्ग तीन की समस्त रिक्तिय और प्रवर्ग एक और दो की बीस प्रतिशत रिक्तिय सम्भागीय कमेटी द्वारा सीधी भर्ती द्वारा भरी जायेंगी । इस प्रयोजन के लिए कमेटी सम्भाके समस्त जिलों के जिला सेवायोजन कार्यालयों से पद के लिए नियत आवश्यक शर्ते पूरी करने वाल उपयुक्त अभ्यर्थियों के नाम मांगेगी। जिला सेवायोजन कार्यालयों से मांगे जाने वाले नामों की संख्या भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या की तीन गुनी होगी। कमेटी सम्भाग के समस्त जिलों के जिला सहायक निबन्धक, सहकारी समिति के माध्यम से सहकारी समितियों के कर्मचारियों और उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन के छटनी किये गये ऐसे सहकारी पर्यवेक्षकों और कामदारों के जो नियम 28 के अधीन नियत शर्ते पूरी करते हों और पद के लिए अन्यथा पात्र हों और राज्य के कम से कम दो प्रमुख समाचार-पत्रों में रिक्तियों को विज्ञापित करके भी आवेदन-पत्र आमन्त्रित कर सकती है।
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1. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 23 प्रतिस्थापित (30-6-2004 से प्रभावी)।
2. अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 24 ,25,26,27 और 28 निकाल दिया गया (30-6-2004 से प्रभावी)।
3. अधिसूचना सं0 1636/12-सी-1-84-7(10)-1976 दिनांक 8 जून, 1984 द्वारा प्रतिस्थापित ।



(2) सम्भागीय कमेटी लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्ष आयोजित करके, जैसा निबन्धक सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा नियत किया जाये, भर्ती करेगी। अभ्यर्थियों की भर्ती सरकारी सेवा में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और रक्षा बल के भूतपूर्व सैनिकों के प्रतिनिधित्व के सम्बन्ध में समय-समय पर सरकार द्वारा जारी किये गये आदेशों के अनुसार उनके प्रतिनिधत्व क सम्यक् रुप से ध्यान में रखते हुए की जायेगीः
प्रतिबन्ध यह है कि ऊपर निर्धारित रीति से भर्ती एक चयन समिति द्वारा की जायेगी जिसमें निम्नलिखित होंगेः
(एक) सम्भाग का उपनिबन्ध                                                                                                                                      सभापति

(दो) मुख्य विकास अधिकारी/ जिला विकास अधिकारी                                                 सदस्य                         
 
(तीन) निबन्धक सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश का एक नामनिर्देशित                                                                            सदस्य ]

1[26.पदोन्नति द्वारा भर्तीः-निबन्धक के अनुमोदन से प्राधिकारी द्वारा बनाये गये विनियमों के अनुसार प्रवर्ग एक और दो के अस्सी प्रतिशत पद ऐसे प्रवर्ग के, जिसके पदों को भरा जाना है, ठीक नीचे के प्रवर्ग के सदस्यों को पदोन्नति करके जिला कमेटी द्वारा भरे जायेंगे। पदोन्नति आयोग्य व्यक्तियों को अस्वीकार करते हुए, ज्येष्ठता के सिद्धांत पर की जायेगी ।
(2) प्रवर्ग एक औ दो की समितियों में रिक्तिय, जह आवश्यक हो उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव यूनियन द्वारा उपलब्ध किये गये सहकारी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करके या निबन्धक, सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा उपलब्ध किये गये सहकारी निरीक्षक समूह-एक और दो की नियुक्ति करके जिला कमेटी द्वारा भरी जायेंगी।
27. परिवीक्षाः- केन्द्रीयित सेवा में सीधी भर्ती द्वारा या पदोन्नति द्वारा भर्ती किये गये व्यक्ति को दो वर्ष की अवधि के लिए परीवीक्षा पर रखा जायेगा। इस अवधि को जिला कमेटी छः मास की अग्रेतर अवधि के लिए बढ़ा सकता है।
2[28.सीधी भर्ती के लिए आयुः-किसी व्यक्ति को, जो 21 वर्ष से कम औ 30 वर्ष से अधिक आयु का हो, केन्द्रीयित सेवा में सीधी भर्ती नहीं किया जायेगा:
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1. नियम 24,25 और 26 अधिसूचना संख्या 1636XII-C-1-15-7(10)-.1970 दिनांक 8.6.1984 द्वारा प्रतिस्थापित ।
नोट: अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 24 ,25,26,27 और 28 निकाल दिया गया (30-6-2004 से प्रभावी)।
2. अधिसूचना संख्या 1636/XII-C-84-7(10)-1970 दिनांक 8.6.1984 द्वारा प्रतिस्थापित ।
नोट: अधिसूचना सं0 848/49-1-2004-500(1)-2003 टी0सी0 दिनांक 30 जून, 2004 द्वारा नियम 24 ,25,26,27 और 28 निकाल दिया गया (30-6-2004 से प्रभावी)।

प्रतिबन्ध यह है अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो के आश्रितों की स्थित में सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष होगीः
अग्रेतर प्रतिबन्ध यह है कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों, छटनी किये गये सहकारी पर्यवेक्षकों और कामदारों और रक्षा बल के भूतपूर्व सैनिकों की स्थिति में सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु उतने वर्ष बढ़ दी जायेगी, जितने वर्ष तक उन पदों पर कार्य किया हो। किन्तु शर्त यह है कि अधिकतम आयु 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी।]
29. सेवा निवृत्त की आयुः-केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों की अधिवर्षिता की आयु 58 वर्ष होगी:
प्रतिबन्ध यह है कि नियुक्ति प्राधिकारी लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझें तो वह केन्द्रीयित सेवा के किसी सदस्य को 50 वर्ष की आयु का हो जाने पर तीन मास की अवधि का लिखित नोटिस देकर या उसके बदले में वेतन देकर अनिवार्य रुप से सेवा निवृत्त कर सकता है।
30. प्रकीर्ण:-(1) इस नियमावली के उपबन्धो के अधीन रहते हुए, प्राधिकारी निबन्धक सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश के पूर्वनुमान से केन्द्रीयित सेवा के सदस्यों के लिए उनकी सेवा सम्बन्धी मामलों के निमित्त विनियम बनायेगा जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित भी हो सकता है-
(1) पदोन्नति, नियुक्ति,परिवीक्षा, स्थायीकरण और सेवा समाप्ति की रीति।
(2) सेवा अभिलेख, ज्येष्ठता, प्रतिवर्तन छटनी और पद त्याग।
(3) वेतनमान क्रम भत्ते, वेतनवृद्धि कार्य-भार ग्रहण करने का समय, अवकाश दक्षता रोक आदि ।
(4) आचरण और अनुशासन, शास्ति अनुशासनिक कार्यवाही और अपील।
(5) भविष्य निधि, उपदान प्रतिभूति और अग्रिम।
(2) जब तक उपनियम(1) में निर्दिष्ट विनियम न बनाये जाये तक तक उसमें निर्देष्ट सभी या कोई मामला ऐसे आदेश या निदेश द्वारा नियन्त्रित होगा जिसे निबन्धक के अनुमोदन से प्राधिकारी दें ।
(3) इस नियमावली के अन्तर्गत न आने वाला कोई मामले ऐसे निदेशों द्वारा नियन्त्रित होगा जिसे निबन्धक के अनुमोदन से प्राधिकारी दें।
(4) यदि इस नियमावली के लागू किये जाने कोई शंका या विवाद उत्पन्न हो ता उसे निबन्धक को निर्दिष्ट किया जायेगा जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा और समस्त सम्बद्ध व्यक्तियों पर बन्धनकारी होगा ।