अनुसूची 2
1[उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग लिपिक वर्ग सेवा नियमावली, 1977
भाग 1
सामान्य


1. प्रस्तावना, संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ- (1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग लिपिक वर्ग सेवा नियमावली ,1977 कही जायेगी।
(2) तुरन्त लागू होगी
2. सेवा की प्रास्थितिः- उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग लिपिक वर्ग सेवा अराजपत्रित लिपिक वर्ग सेवा से है जिसमें वर्ग गके पद सम्मिलित है।
3. परिभाषायें- जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस नियमावली में-
(क) अपर निबन्धक (प्रशासन) का तात्पर्य निबन्धक , सहकारी समितियॉ, उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यालय में सरकार द्वारा अपर निबन्धक सहकारी समितियॉ, उत्तर प्रदेश के रूप में नियुक्त ऐसे अधिकारी से है, जो सेवा से सम्बन्धित अधिष्ठान विषयक मामलों में कार्यवाही करने के लिए निबनधक द्वारा प्राधिकृत हो;
(ख) नियुक्ति प्राधिकारी का तात्पर्य अपर निबन्धक (प्रशासन) से है;
(ग) भारत का नागरिक का तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो संविधान के भाग-2 के अधीन भारत का नागरिक हो या समझा जाये ;
(घ) संविधान का तात्पर्य भारत के संविधान से है;
(ड़) विभाग का तात्पर्य सहकारिता विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार से है;
(च) उप निबन्धक (मुख्यावास) का तात्पर्य निबन्धक , सहकारी समितियों के मुख्य कार्यालय में अधिष्ठान और  कार्यालय से सम्बन्धित अन्य मामलों में कार्यवाही करने वाले उप निबन्धक सहकारी समितियों से है;


(छ) सीधी भर्ती का तात्पर्य इस नियमावली के नियम 14 और 15 में विहित रीति से भर्ती से है;
(ज) सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है;
(झ) राज्यपाल का तात्पर्य उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से है;
() मुख्य कार्यालय का तात्पर्य निबन्धक , सहकारी समितियॉ, उत्तर प्रदेश के कार्यालय से है;
(ट) सेवा का सदस्य का तात्पर्य इस नियमावली के या इस नियमावली के प्रारम्भ होने के पूर्व प्रवृत्त किसी नियम या आदेश के उपबन्धों के अधीन सेवा के संवर्ग में किसी पद पर मौलिक रूप से नियुक्ति व्यक्ति से है;
(ठ) निबन्धक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश समिति अधिनियम, 1965 की धारा 3 (1) में यथा परिभाषित निबन्धक, सहकारी समितियॉ, उत्तर प्रदेश से है;
 

1 अधिसूचना संख्या 6531/12-सी-2-39 (ii)-68, दिनांक 15 नवम्बर, 1977 द्वारा प्रतिस्थापित जो उ0प्र0 गजट, दिनांक 24 मार्च, 1979 में प्रकाशित हुआ।


(ड़) सेवा का तात्पर्य निबन्धक, सहकारी समितियॉ, उत्तर प्रदेश के प्रशासकीय नियंत्रण में उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग लिपिक वर्ग, सेवा से है;
(ढ़) कर्मचारी वर्गका तात्पर्य विभाग के लिपिक वर्ग के कर्मचारियों से है; और
(ण) भर्ती का वर्ष का तात्पर्य उस कलेण्डर वर्ष से है, जिसमें भर्ती की जाये।


भाग 2
संवर्ग


4. सेवा की सदस्य संख्या - (1) सेवा के सदस्यों की और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या उतनी होगी, जितनी राज्यपाल द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाये ।
(2) सेवा के सदस्यों की और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या, जब तक कि उपनियम (1) के अधीन उसमें परिवर्तन करने का आदेश न दिया जाये, उतनी होगी, जितनी इस नियमावली के परिशिष्ट क में विनिर्दिष्ट हैः
परन्तु -
(क) राज्यपाल समय-समय पर ऐसे अतिरिक्त स्थायी या अस्थायी पद सृजित कर सकते है, जिन्हे वह आवश्यक समझे;
(ख) नियुक्ति प्राधिकारी किसी रिक्त पद को बिना भरे हुए छोड़ सकता है या राज्यपाल उसे आस्थगित रख सकते है; किन्तु ऐसा करने से कोई व्यक्ति प्रतिकर का हकदार न होगा।
भाग 3
भर्ती

5. भर्ती के स्त्रोत - सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर भर्ती चाहे वह मौलिक, अस्थायी या स्थानापन्न रूप में हों निम्नलिखित स्त्रोतों से की जायेगी ।
(1) मुख्य सहायक (मुख्य कार्यालय)- मुख्य कार्यालय के मुख्य लिपिकों में से पदोन्नति द्वारा ।
(2) मुख्य लिपिक (मुख्य कार्यालय)- मुख्य कार्यालय के आलेखक एवं प्रालेखक और अधीनस्थ कार्यालयों के मुख्य लिपिकों में से पदोन्नति द्वारा ।
(3) मुख्य कार्यालय के आलेखक एवं प्रालेखक तथा अधीनस्थ कार्यालयों के मुख्य लिपिक, मुख्य एवं अधीनस्थ कार्यालयों के ज्येष्ठ लिपिकों में से पदोन्नति द्वारा ।
(4) मुख्य एवं अधीनस्थ कार्यालयों के ज्येष्ठ लिपिक -ऐसे कनिष्ठ लिपिकों, जिसमें नैत्यक लिपिक और टंकक भी सम्मिलित है, में से पदोन्नति द्वारा ।
(5) कनिष्ठ लिपिक जिसमें नैत्यक लिपिक और टंकक भी सम्मिलित है,
(1) वैतनिक शिशिक्षु (अप्रैन्टिस) की नियुक्ति करके,
(2) समय-समय पर जारी किये गये सरकारी आदेशों के अनुसार हाईस्कूल परीक्षा में उत्तीर्ण चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों में से पदोन्नति करके ।
टिप्पणी- इस नियमावली के प्रारम्भ होने के समय प्रवृत्त आदेश परिशिष्ट ख में दिये गये है।

(6) वैतनिक शिशिक्षु (अप्रैन्टिस) अधीनस्थ कार्यालय लिपिक वर्ग (सीधी भर्ती) नियमावली, 1975 के अनुसार , सीधी भर्ती द्वारा ।
(7) सेलेक्शन ग्रेड के आशुलिपिक- ज्येष्ठ श्रेणी के आशुलिपिकों में से पदोन्नति द्वारा।
(8) ज्येष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक- कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिकों में से पदोन्नति द्वारा।
(9) कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक- इस नियमावली के नियम 15 के उपबन्धों के अनुसार सीधी भर्ती द्वारा।
6. अनुसूचित जाति आदि के लिए आरक्षण- अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियो और अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण भर्ती के समय प्रवृत्त सरकारी आदेशों के अनुसार किया जयेगा।
टिप्पणी- इस समय प्रवृत्त आदेश की एक प्रतिलिपि परिशिष्ट ग में दी गई है।
7. राष्ट्रीयता- सेवा में भर्ती के लिए अभ्यर्थी को-
(क) भरत का नागरिक, या
(ख) तिब्बती शरणार्थी, जो भारत में स्थायी रूप से निवास करने के अभिप्राय से एक जनवरी १९६२ के पूर्व भारत आया हो या,

() भारतीय उदभव का व्यक्ति, जो भारत मे स्थायी  रूप से निवास करने के अभिप्राय से पाकिस्तान, वर्मा, श्रीलंका या किसी पूर्व अफ्रीकी देश- केन्या, युगान्डा और यूनाईटेड रिपब्लिक फ तन्जानिया (जिसका पहले तांगानीका और जन्जीबार नाम था) से प्रवजन किया हो, होना आवश्यक हैः


परन्तु उपर्युक्त श्रेणी (ख) या (ग) का अभ्यर्थी ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जिसके पक्ष में राज्य सरकार द्वारा पात्रता का प्रमाण-पत्र जारी किया गया हो:
परन्तु यह और कि श्रेणी (ख) के अभ्यर्थी से यह भी अपेक्षा की जायेगी कि वह पुलिस उप महानिरीक्षक, इंटेलिजेन्स विभाग, उत्तर प्रदेश से पात्रता का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लेः
           परन्तु यह भी कि यदि कोई अभ्यर्थी उपर्युक्त श्रेणी (ग) का हो तो पात्रता प्रमाण-पत्र एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी नही किया जायेगा और ऐसा अभ्यर्थी एक वर्ष की अवधि के पश्चात् सेवा में तब ही रखा जायेगा जबकि उसने भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली हो ।
          टिप्पणी- ऐसे अभ्यर्थी को, जिसके मामलें में पात्रता का प्रमाण-पत्र आवश्यक हो, किन्तु न तो वह जारी किया गया हो और न देने से इन्कार किया गया हो , किसी परीक्षा या साक्षात्कार में सम्मिलित किया जा सकता है और उसे इस शर्त पर अस्थायी रूप से नियुक्त भी किया जा सकता है कि वह बाद में आवश्यक प्रमाण -प़त्र प्राप्त कर ले या उसके पक्ष में जारी कर दिया जाये।
8. आयु- सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का आयु पहली जनवरी को यदि आवेदन-पत्र 1 जनवरी से 30 जून की अवधि में आमन्त्रित किये जायें और पहली जुलाई को, यदि आवेदन-पत्र 1 जुलाई से 31 दिसम्बर की अवधि में आमन्त्रित किये जायें, 18 वर्ष होना चाहिये, किन्तु 27 वर्ष से अधिक आयु नहीं होना चाहियें
परन्तु अधिकतम आयु सीमा-
(एक) उन व्यक्तियों के मामले में जो पहले से ही सहकारी सेवा में हों, पच वर्ष अधि होगी।
(दो) अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ऐसी अन्य श्रेणियों के, जिन्हे सरकार समय-समय पर अधिसूचित करें, अभ्यर्थियों के मामले में उतने वर्ष अधिक होगी, जितनी विनिर्दिष्ट की जायें।
टिप्पणी- आयु के शिथिलीकरण से सम्बन्धित सरकारी आदेशों की प्रतिलिपिय परिशिष्ट घ में दी गई है।
9. शैक्षिक अर्हता- (1) पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का-
(क) माध्यमिक शिक्षा परिषद की इण्टरमीडिएट परीक्षा या उसके समकक्ष घोषित किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होना ,
(ख) हिन्दी टंकण में 30 शब्द प्रति मिनट की न्यूनतम गति होना आवश्यक है।
(2) कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक के पद के लिए भी अभ्यर्थी का हिन्दी आशुलेखन में 80 शब्द प्रति मिनट की न्यूनतम गति होना आवश्यक है।
(3) कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक के पद पर भर्ती में अधिमानता उन अभ्यर्थीयों को दी जायेगी, जिन्हें अंग्रेजी आशुलेखन और टंकण का ज्ञान हो ।
10. चरित्र- सेवा में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र अवश्य ऐसा होना चाहिए कि वह सरकारी सेवा सेवायोजन के लिए सभी प्रकार से उर्पयुक्त हो। नियुक्ति प्राधिकारी इस सम्बन्ध में अपना समाधान करेंगे।
टिप्पणी- संघ या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या संघ सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व या नियन्त्रण में किसी निकाय, निगम, या उपक्रम द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नही होंगे नैतिक पतन सम्बन्धित अपराध के लिए सिद्वदोष व्यक्ति भी पात्र नही होंगे ।
11. वैवाहिक प्रास्थितिं- सेवा में भर्ती के लिए कोई पुरूष अभ्यर्थी पात्र न होगा जिसकी एक से अधिक पत्नी जीवित हो और ऐसी कोई महिला अभ्यर्थी पात्र न होगी जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित  होः

     परन्तु राज्यपाल किसी  अभ्यर्थी  को इस नियम के  प्रर्वतन  से मुक्त कर सकते है य‍दि उनका समाधान हो जाये कि ऐसा करने का विशेष कारण है।


12. स्वस्थता- कोई व्यक्ति सेवा के सदस्य के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जायेगा जब तक कि मानसिक और शारीरिक दृष्टि से उसका स्वास्थ्य अच्छा न हो और वह हर ऐसे शारीरिक दोष से मुक्त न हो जिससे उसे सेवा के सदस्य के रूप में अपने कर्तब्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने में बाधा पड़ने की सम्भावना हो । ऐसे व्यक्ति से, जो सीधी भर्ती द्वारा चयन किया गया हो , जब तक कि वह पहले से ही सरकार के अधीन किसी स्थायी पद पर न हो सेवा में नियुक्ति के लिए अन्तिम रूप से अनुमोदित किये जाने के पूर्व, यह अपेक्षा की जायेगी कि वह फाइनेन्शियल हैण्डबुक खण्ड 2, भाग 2 से 4 के अघ्याय 3 के अनुसार स्वस्थता का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करे।

भाग 5
भर्ती की प्रक्रिया


13. रिक्तियों का अवधारण - नियुक्ति प्राधिकारी वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या और नियम 6 के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित की जाने वाली रिक्तियों की संख्या भी अवधारित करेगा ।
14. कनिष्ठ लिपिक /नैत्यक श्रेणी लिपिक/टंकक/वैतनिक शिशिक्षु के पद पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया - नियम 5 के उपबन्ध के अधीन रहते हुए, कनिष्ठ लिपिक के जिसमें नैत्यक और टंकक और वैतनिक शिशिक्षु (अप्रैन्टिस) भी सम्मिलित है, पद पर भर्ती अधीनस्थ कार्यालय लिपिक वर्ग (सीधी भती) नियमावली, 1975 में दिये गये उपबन्धों के अनुसार जिला चयन समिति के माध्यम से की जायेगी । समिति चुने गये अभ्यर्थियों की सूची नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेगी।
15. कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक के पद पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया - (1) नियुक्ति प्राधिकारी कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिकों की सीधी भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या से सेवायोजन कार्यालय को सूचित करेगा और उनके माध्यम से अपेक्षित अर्हताओं को पूरा करने वाले अभ्यर्थियों के आवेदन-पत्र आमन्त्रित करेगा। नियुक्ति प्राधिकारी उन विभागीय अभ्यर्थियों से, यदि कोई हो, जो अपेक्षित अर्हताए पूरी करते हो , आवेदन-पत्र ग्रहण कर सकता है।
(2) कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिकों के पद पर सीधी भर्ती के प्रयोजनार्थ एक चयन समिति का गठन किया जायेगा, जिसमें निम्नलिखित होगेः
(एक) नियुक्ति प्राधिकारी या उसके नामनिर्दिष्ट अधिकारी जो उपनिबन्धक, सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश के पद से नीचे के पद का न हो ।
(दो) नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा नामनिर्दिष्ट दो उपनिबन्धक, सहकारी समितियॉ
(3) उपनियम (2) में निर्दिष्ट चयन समिति आवेदित पद के लिए अभ्यर्थियों को उपयुक्त्तता की परीक्षा करने के लिए इस नियमावली के अधीन विहित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करेगी। परीक्षा लिखित और मौखिक होगी।
टिप्पणी- प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया और उसका पाठ्यक्रम परिशिष्ट ड में दिया गया है।
(4) लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंको का सारणीबद्ध  किये जाने के पश्चात् चयन समिति नियम 6 के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों का सम्यक् प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उतनी संख्या में अभ्यर्थियों को जितने लिखित परीक्षा के परिणाम पर इस सम्बन्ध में समिति द्वारा नियत स्तर के हो, साक्षात्कार के लिए बुलायेगी । साक्षात्कार में प्रत्येक अभ्यर्थी को दिये गये अंक में जोड़ दिया जायेगा।
(5) चयन समिति अभ्यर्थियों की , उनके द्वारा प्राप्त कुल अंको के आधार पर योग्यता क्रम में एक सूची तैयार करेगी । यदि दो या अधिक अभ्यर्थियों ने बराबर अंक प्राप्त किये हो तो लिखित परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी को उच्चतर स्थान पर रखा जायेगा। सूची में नाम की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक (किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नही) होगी । चयन समिति सूची को नियुक्ति प्राधिकारी को अग्रसारित करेगी।
16. पदोन्नति द्वारा भर्ती - (1) पदोन्नति द्वारा भर्ती नियम 15 के अधीन गठित चयन समिति द्वारा अनुपयुक्त को अस्वीकार करते हुए, ज्येष्ठता के आधार पर की जायेगी।
(2) नियुक्ति प्राधिकारी पात्र अभ्यर्थियों की एक सूची ज्येष्ठता-क्रम में तैयार करेगा और उसे अभ्यर्थियों की चरित्र-पंजिका और उससे सम्बन्धित ऐसे अन्य अभिलेख सहित, जो सुसंगत समझो जायें, चयन समिति को अग्रसारित करेगा।
(3) चयन समिति अभ्यर्थियों के मामलों पर उपनियम (2) में निर्दिष्ट अभिलेखों के आधार पर विचार करेगी और यदि वह आवश्यक समझे तो अभ्यर्थियों का साक्षात्कार भी कर सकती है।
(4) चयन समिति चुने गये अभ्यर्थियों की एक सूची ज्येष्ठता -क्रम में तैयार करेगी और उसे नियुक्ति प्राधिकारी को अग्रसारित करेगी।


भाग 6

नियुक्ति, परिवीक्षा, स्थायीकरण और ज्येष्ठता


17. नियुक्ति- (1) मौलिक रिक्तिय होने पर नियुक्ति प्राधिकारी सेवा में विभिन्न पदों पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति उसी क्रम में करेगा जिस क्रम में उनके नाम, यथास्थिति नियम 14,15 या 16 के अधीन तैयार की गयी सूची में आये हों ।
(2) नियुक्ति प्राधिकारी अस्थायी और स्थानापन्न रिक्तियों में भी नियुक्ति उपर्युक्त उपनियम (1) में निर्दिष्ट सूचियों से कर सकता है। यदि इन सूचियों का कोई अभ्यर्थी उपलब्ध न हो तो वह, जब तक नियमित चयन न हो जाये, तब तक ऐसी रिक्तियों में इस नियमावली के अधीन पात्र व्यक्तियों में से ऐसी रिक्तियों में नियुक्ति कर सकता है।
18. परिवीक्षा -(1) मौलिक रिक्ति में या उसके प्रति-नियुक्ति किये जाने पर सभी व्यक्तियों को दो वर्ष के लिए परिवीक्षा पर रखा जायेगा।
(2) किसी समकक्ष या उच्चतर पद पर स्थानापन्न या अस्थायी रूप में की गयी सेवा की परिवीक्षा अवधि की संगणना करने में विचार किया जा सकता है।
(3) नियुक्ति प्राधिकारी अभिलिखित किये जाने वाले कारणों में से किसी विनिर्दिष्ट दिनांक तक परिवीक्षा अवधि को बढ़ा सकता है।
(4) यदि परिवीक्षा अवधि या बढ़ायी गयी परिवीक्षा-अवधि के दौरान या अन्त में किसी समय यह प्रतीत हो कि परिवीक्षाधीन व्यक्ति ने अपने अवसरों का पर्याप्त उपयोग नही किया है या यदि वह अन्यथा सन्तोष प्रदान करने विफल रहा है तो उसे उसके मौलिक पद पर, यदि को हो, प्रत्यावर्तित किया जा सकता है और यदि उसका किसी ऐसे पद पर धारणाधिकार नहो, तो उसकी सेवायें सामाप्त की जा सकती है, जिसके लिए वह किसी प्रतिकर का हकदार न होगा ।
19. स्थायीकरण- किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को परिवीक्षा-अवधि या बढ़ायी गई परिवीक्षा-अवधि के अन्त में उसके पद पर स्थायी किया जा सकता है यदि उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक बताया जाये और नियुक्ति प्राधिकारी का समाधान हो जाये कि वह अन्यथा स्थायी किये जाने के लिए उपयुक्त है।
20. ज्येष्ठता-(1) सेवा में प्रत्येक श्रेणी के पदों के लिए एक पृथक् पदक्रम सूची रखी जायेगी ।
(2) किसी श्रेणी के पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की ज्येष्ठता मौलिक नियुक्ति के दिनांक से अवधारित की जायेगी, और यदि दो या अधिक अभ्यर्थी एक ही दिनांक को नियुक्ति किये जाये तो उनकी ज्येष्ठता उस क्रम में अवधारित की जायेगी, जिस क्रम में उनके नाम नियुक्ति के आदेश में दिये गये हों-
परन्तु
(एक) सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो चयन के समय अवधारित की जाये।
(दो) पदोन्नति द्वारा नियुक्त व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो पदोन्नति के समय उनके द्वारा धृत मौलिक पद पर थी ।
भाग 7
वेतन
21. वेतनमान-(1) सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर मौलिक या स्थानापन्न या अस्थायी रूप में नियुक्त व्यक्तियों का अनुमन्य वेतनमान वही होगा, जो सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित किया जाये ।
(2) इस नियमावली के प्रारम्भ होने के समय वेतनमान परिशिष्ट च में दिया गया है।
22. परिवीक्षा अवधि में वेतन- (1) फन्डामेंटल रूल्स में किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुए भी, किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को, यदि वह पहले से ही स्थायी सरकारी सेवा में न हो, परिवीक्षा-अवधि में वेतन वृद्धि इस शर्त पर मिलेगी कि उसका कार्य संतोषजनक बताया जायेः
परन्तु यदि सन्तोषजनक कार्य न करने के कारण परिवीक्षा-अवधि बढ़ायी जाये तो बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतन वृद्धि के लिए तब तक नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे ।
(2) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से सरकार की स्थायी सेवा में हो, परिवीक्षा अवधि में वेतन नियम 25 में निर्दिष्ट सुसंगत नियमों द्वारा विनियमित होगा ।
23. दक्षता रोक पार करने का मापदण्ड - किसी व्यक्ति को-
(1) प्रथम दक्षता रोक पार करने की तब तक अनुमति न दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक रहा है और जब तक उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न की जायें, और
(2) द्वितीय दक्षता रोक पार करने की तब तक अनुमति न दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि उसने दृढ़ता और अपनी यथायोग्यता से कार्य किया है, उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक न पाया जाये और जब तक उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जायें, और आशुलिपिकों से भिन्न व्यक्तियों की स्थिति में, जब तक उसने कार्यालय विनियम और प्रक्रिया का पर्याप्त ज्ञान न अर्जित कर लिया हो।
24. पक्ष-समर्थन- इन नियमावली के अधीन अपेक्षित संस्तुतियों से भिन्न किसी संस्तुति पर, चाहे वह लिखित हो या मौखिक, विचार नहीं किया जायेगा । अभ्यर्थी की ओर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अन्य उपायों द्वारा अपनी अभ्यर्थिता के लिए समर्थन प्राप्त करने का कोई प्रयास नियुक्त किये जाने के लिए उसे अनर्ह कर देगा ।
25. अन्य विषयों का विनियम- उन विषयों के सम्बन्ध में, जो इस नियमावली या विशेष आदेश के अन्तर्गत  विशिष्ट रूप से न आते हो, सेवा में नियुक्त व्यक्ति उन नियमों, विनियमों और आदेशों द्वारा नियन्त्रित होगे, जो राज्य के कार्य-कलापों के सम्बन्ध में सेवारत सरकारी सेवकों पर सामान्यतः लागू होते हों ।
26. सेवा की शर्तो में शिथिलता-हॉ राज्य सरकार का सामाधान हो जाये कि सेवा में नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तो की विनियमित करने वाले किसी नियम के प्रवर्तन से किसी विशिष्ट मामले में अनुचित कठिनाई होती है तो वह उस मामले में प्रयोज्य नियमों में किसी बात के होते हुए भी, आदेश द्वारा उस नियम की अपेक्षाओं से उस सीमा तक और ऐसी शर्तो के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह उन मामलों को न्यायसंगत और साम्यपूर्ण ढ़ग से निपटाने के लिए आवश्यक समझे, अभिमुक्त या शिथिल कर सकती है।
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परिशिष्ट क
[नियम 4 (2) देखिये]


सेवा के सदस्यों की और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदो की स्थायी संख्या

क्रम0 संख्या पदनाम पदो की संख्या कुल पद
स्थायी अस्थायी
1 मुख्य सहायक 5 - 5
2 मुख्य कार्यालय के मुख्य लिपिक 16 - 16
3 मुख्य कार्यालय के आलेखक और प्रालेखक 59 1 60
4 मुख्य लिपिक (सम्भागीय और अन्य अधीनस्थ कार्यालय) 12 1 13
5 ज्येष्ठ लिपिक 95 7 102
6 कनिष्ठ लिपिक(जिसमें नैत्यक श्रेणी लिपिक और टंकक भी सम्मिलित है) 161 8 169
7 वैतनिक शिशिक्षु (अप्रैन्टिस) 10 - 10
8 (क) सेलेक्शन ग्रेड के आशुलिपिक 400-600 रू0

(ख) 300-500 रू0 के वेतनमान में ज्येष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक

2

19

-

1

2

20

9 250-425 रू0 के वेतनमान में कनिष्ठ श्रेणी के आशुलिपिक 6 1 7


टिप्पणी- उपर्युक्त अस्थायी पदों को सम्बन्धित श्रेणी में सम्मिलित समझा जायेगा जब भी इन पदों को सरकार द्वारा स्थायी घोषित किया जाये ।


परिशिष्ट ख
[नियम 5 देखिये]


नियुक्ति (ख) विभाग , शासनादेश संख्या 37/1/69-नियुक्ति ,
दिनांक 1 जनवरी, 1970
विषय- वर्ग-4 के कर्मचारियों के लिए वर्ग-3 के निम्नतम श्रेणी के लिपिक वर्गीय पदों में आरक्षण ।
शासन ने यह निर्णय लिया है कि किसी कार्यालय में प्रत्येक वर्ष वर्ग-3 के निम्नतम श्रेणी के लिपिक वर्गीय पदों में होने वाली स्थायी एवं एक वर्ष से अधिक अवधि तक चलती रहने वाली अस्थायी रिक्तिय में वर्ग-4 के हाईस्कूल अथवा उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त परीक्षा पास स्थायी कर्मचारियों के लिए, जिनकी आयु 45 वर्ष से अधिक न हो , पदोन्नति द्वारा दस प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जायेगा, ऐसी पदोन्नति के निमित्त वर्ग-3 के पदों पर भर्ती जिस कार्यालय में होनी हो उसी कार्यालय में काम करने वाले वर्ग-4 के कर्मचारियों के मामलों में विचार किया जायेगा । किन्तु यदि किसी जिले में कोई नये कार्यालय को खोला जाये तो उस कार्यालय में वर्ग-3 के निम्नतम श्रेणी के 10 प्रतिशत पदों पर भर्ती के लिए उपरिलिखित शर्तो के अधीन वर्ग-4 के सभी स्थानीय कर्मचारियों के मामलों में विचार किया जायेगा। रिक्तियों के कम होने की दशा में पदोन्नति का क्रम यह रहेगा कि प्रत्येक 9 नियुक्तियों के बाद एक नियुक्ति पदोन्नति द्वारा की जायेगी।
2. आरक्षित रिक्तियों के लिए चुनाव श्रेष्ठता के आधार पर एक साधारण परीक्षा लेकर तथा साक्षात्कार करके किया जायेगा। परीक्षा में केवल एक प्रश्न-पत्र होगा, जिसमें दो सवाल होगे एक किसी सरल विषय पर हिन्दी निबन्ध और दूसरा सामान्य ज्ञान । चुनाव के लिए 50 अंक होगे, जिनका विवरण निम्नलिखित हैः
(क) लिखित परीक्षा 30 अंक (प्रत्येक प्रश्न के 15 अंक)
(ख) साक्षात्कार 10 अंक
(ख) चरित्र-पंजी 10 अंक
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कुल 50 अंक
जह तक केवल टंकक (टाइपिस्टों) के संवर्ग में ही भर्ती की जानी हो, वह पर टाइप की भी परीक्षा की जायेगी ।
3. यह आदेश मन्त्रिपरिषद की स्वीकृति से जारी किये जा रहे है। अतः वर्तमान नियमों में , यदि कोई हो, मन्त्रिपरिषद की पुनः स्वीकृति लिए बिना तदनुसार संशोधन कर लिया जाये।