अनुसूची 3
उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा नियमावली , 1979
संख्या 2188/12-सी-2-176-68

लखनऊ 18, जुलाई 1979
अधिसूचना


संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के अधीन शक्ति का प्रयोग करके और इस विषय पर समस्त विद्यमान नियमों और आदेशों का अतिक्रमण करके राज्यपाल उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तो को विनियमित करने के लिए निम्नलिखित नियमावली बनाते है-
1. संक्षिप्त नाम, और प्रारम्भ- (1) यह विनियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा नियमावली , 1979 कही जायेगी ।
(2) यह तुरन्त प्रवृत होगी ।
2. सेवा की प्रास्थिति - उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा में समूह क और ख के पद सम्मिलित है।
3. परिभाषा- जब तक विषय या संदर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस नियमावली में-

(क) नियुक्ति प्राधिकारी का तात्पर्य राज्यपाल से है;
(ख) भारत का नागरिक का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो संविधान के भाग-दो के अधीन भारत का नागरिक हो या समझा जाये ,
(ग) आयोग का तात्पर्य उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से है,

(घ) संविधान का तात्पर्य भारत के संविधान से है;
(ड़) सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है,
(च) राज्यपाल का तात्पर्य उत्तर प्रदेश राज्यपाल से है,
(छ) सेवा का सदस्य का तात्पर्य सेवा के संवर्ग में किसी पद पर इस नियमावली के या इस नियमावली के प्रारम्भ होने के पूर्व प्रवृत्त नियमों या आदेशों अधीन मौलिक रूप से नियुक्ति व्यक्ति से है,
(ज) निबन्धक का तात्पर्य निबन्धक, सहकारी समितिय, उत्तर प्रदेश से है,
(झ) सेवा का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी सेवा से है,
() भर्ती का वर्ष का तात्पर्य किसी कलैंडर वर्ष की पहली जुलाई से प्रारम्भ होने वाली बारह मास की अवधि से है,


भाग 2
संवर्ग



4. सेवा का संवर्ग- (1) सेवा की सदस्य संख्या और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या उतनी होगी, जितनी राज्यपाल द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाये ।
(2) सेवा की सदस्य संख्या और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या, जब तक कि उपनियम (1) के अधीन उसमें परिवर्तन करने के आदेश न दिये जाये, निम्न प्रकार से होगी-

पद का नाम संख्या
स्थायी अस्थायी योग
1 2 3 4
समूह क

(१) अपर निबन्धक

2 3 5
1[(1-क) संयुक्त निबन्धक 12 - 12
Note- The scale of pay of the post of joint Registrar at the time of the commencement of the Uttar Pradesh Co-operative (Amendment) Rules, 2003 is Rs 12,000-375-16,500**-
2[(2) उप निबन्धक 5 9 14
(3) प्रसंस्करण सलाहकार 1 - 1
(4) कृषि अधिकारी 1 - 1
समूह ख
(1) सहायक निबन्धक 91 6 97

1. अधिसूचना संख्या 1566/XLIX-2-2003-148(40)-90 दिनांक 4 जुलाई 2003 द्वारा अन्तः स्थापित जो उ0प्र0 असाधारण गजट भाग-4 खण्ड (ख) दिनांक 4 जुलाई 2003 को प्रकाशित हुआ।
2. अधिसूचना संख्या 1566/XLIX-2-2003-148(40)-90 दिनांक 4 जुलाई 2003 द्वारा प्रतिस्थापित ।

टिप्पणी-(1) सहायक निबन्धक के पदों के अन्तर्गत  निम्नलिखित भी है-
(i) सचिव, उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मण्डल                  
(iii) सहायक कृषि अधिकारी                             स्थायी          अस्थायी          योग


(2) भेषजीय (फर्मास्यूटिकल) विशेषज्ञ                                               1                              -                              1
(3) प्रशीतन (रेफी्रजरेशन) अभियन्ता                       -                               1                              1
(4) प्रभारी अधिकारी, सहकारी विवरणी(कोआपरेटिव रिटर्नस)         1                                 -                            1
परन्तु राज्यपाल :
(1) किसी पद को बिना भरे हुए छोड़ सकते है या उसे अस्थगित रख सकते है, जिससे कोई व्यक्ति प्रतिकर का हकदार नही होगा, या
(2) ऐसे अतिरिक्त स्थायी या अस्थायी पदो का सृजन कर सकते है जो समय-समय पर आवश्यक समझे जायें।


भाग 3
भर्ती


5. भर्ती का स्त्रोतः- सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर भर्ती निम्नलिखित स्रोतो से की जायेगी-
1[1- अपर निबन्धक- By promotion through the selection committee from amongst substantively appointed Joint Registrar who have completed two year service as such on the first day of the year of recruitment on basis of criterion laid down in the Uttar Pradesh Government Servants Criterion for recruitment by Promotion Rules, 1994, as amended from time to time, vide Rule 18 ;

Provided that if sufficient number of eligible or suitable persons are not available for   promotion , the field of eligibility may be extended to include such substantively appointed joint Registrars who, taken together, have completed five years service on the post of Joint Registrars and Deputy Registrar : 

Provided further that if sufficient number of eligible or suitable persons are also not available for   promotion under the first proviso,  the field of eligibility may further be extended to include such substantively appointed Deputy  Registrars who, have completed five years service as such on first day of year  recruitment . 

2[(1-A-). Joint Registrar- By promotion through the selection committee from amongst substantively appointed Deputy Registrar who have completed two year service as such on the first day of the year of recruitment on the basis of criterion laid down in the Uttar Pradesh Government Servants



1 अधिसूचना संख्या 1566/XLIX-2-2003-148(40)-90 दिनांक 4 जुलाई 2003 द्वारा उपधारा (1) प्रतिस्थापित तथा नई उपधारा 1-क अन्तःस्थापित हुआ।
2 अधिसूचना संख्या 1566/XLIX-2-2003-148(40)-90 दिनांक 4 जुलाई 2003 द्वारा उपधारा (1) प्रतिस्थापित तथा नई उपधारा 1-क अन्तःस्थापित हुआ।

 

Criterion for Recruitment  by promotion  Rules, 1994, as amended from time to time, vide Rule 18.
2. उप-निबन्धक- इस नियमावली के नियम 18 (1) में निर्धारित रीति से ऐसे स्थायी सहायक निबन्धकों में से जिन्होने भर्ती के वर्ष के प्रथम दिनांक को सहायक निबन्धक के रूप मे कम से कम 5 वर्षो की सेवा पूरी कर ली हो, अनुपयुक्त को अस्वीकार करते हुये ज्येष्ठता के आधार पदोन्नति द्वारा ।
3. प्रसंस्करण सलाहकार- आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा ।
4. कृषि अधिकारी- आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा।
5. सहायक निबन्धक-(1) अधीनस्थ सहकारी सेवा, समूह एक के ऐसे सदस्यों में से जिन्होने भर्ती के प्रथम दिनांक को इस रूप में कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो, योग्यता के आधार पर पदोन्नति द्वारा।
(2) आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा ।
परन्तु सहायक निबन्धक के पदों पर भर्ती इस प्रकार की जायेगी कि यथासम्भव 50 प्रतिशत पद पदोन्नति किये गये व्यक्तियों द्वारा और 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती किये गये व्यक्तियो द्वारा धृत हो ।
6 भेषजीय विशेषज्ञ- आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा ।
7. प्रशीतन अभियन्ता- आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा ।
8. प्रभारी अधिकारी सहकारी- आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा ।
विवरणी
6. आरक्षण- अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण भर्ती के समय प्रवृत्त सरकार के आदेश के अनुसार किया जायेगा।


भाग 4
अर्हतायें


7. राष्ट्रियता- सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी-
(क) भारत का नागरिक हो, या
(ख) तिब्बती शरणार्थी हो, जो भारत में स्थायी रूप से निवास करने के अभिप्राय से 1 जनवरी, 1962 के पूर्व भारत आया हो, या
(ग) भारतीय उद्भव का ऐसा व्यक्ति हो जिसने भारत में स्थायी रूप से निवास करने के अभिप्राय से पकिस्तान, वर्मा, श्रीलंका, और केनिया, यूगाण्डा और यूनाइटेड रिपब्लिक आफ तन्जानिया (पूर्ववर्ती तांगनिका और जंजीबार) के किसी पूर्वी अफ्रीकी देश से प्रवृजन किया होः
परन्तु उपर्युक्त श्रेणी (ख) या (ग) के अभ्यर्थी को ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जिसके पक्ष में राज्य सरकार द्वारा पात्रता का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है।
परन्तु यह और कि श्रेणी (ख) के अभ्यर्थी से यह भी अपेक्षा की जायेगी कि वह पुलिस उप-महानिरीक्षक, गुप्तचर शाखा, उत्तर प्रदेश से पात्रता प्राप्त कर ले।
परन्तु यह भी कि यदि कोई अभ्यर्थी उपर्युक्त श्रेणी (ग) का हो तो पात्रता का प्रमाण-पत्र एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी नही किया जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी की एक वर्ष की अवधि के आगे सेवा में इस शर्त पर रहने दिया जायेगा कि वह भारत की नागरिकता प्राप्त कर ले।
टिप्पणी- ऐसे अभ्यर्थी की जिसके मामले में पात्रता का प्रमाण-पत्र आवश्यक हो, किन्तु न तो वह जारी किया गया हो और न देने से इन्कार किया गया हो , किसी परीक्षा या साक्षात्कार में सम्मिलित किया जा सकता है और उसे इस शर्त पर अन्तिम रूप से नियुक्त भी किया जा सकता है कि आवश्यक प्रमाण-पत्र उसके द्वारा प्राप्त कर लिया जाये या उसके पक्ष में जारी कर दिया जाये।
8. शैक्षिक अर्हता और अनुभव-सेवा में विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी परिशिष्ट क में दी गई अर्हता  रखता हो ।
9. अधिमानी अर्हता-ऐसे अभ्यर्थी को जिसने-
(1) प्रदेशिक सेना में दो वर्ष की न्यूनतम अवधि तक सेवा की हो ;
(2) राष्ट्रीय कैडेट कोर का बी प्रमाण-पत्र प्राप्त किया हो, अन्य बातों के समान होने पर सीधी भर्ती के मामले में अधिमान दिया जायेगा।
10. आयु- सेवा में सीधी भर्ती के लिये अभ्यर्थी की आयु जिस वर्ष भर्ती की जानी हो उस वर्ष की पहली जनवरी को यदि पद पहली जनवरी से 30 जून की अवधि में विज्ञापित किये जाये, और पहली जुलाई को यदि पद पहली जुलाई से 31 दिसम्बर की अवधिक में विज्ञापित किये जायें, 21 वर्ष की हो जानी चाहिये , और
(1) सहायक निबन्धक के पद के लिए 27 वर्ष से अधिक
(2) कृषि अधिकारी के पद के लिए 30 वर्ष से अधिक और
(3) प्रसंस्करण सलाहकार भेषजीय विशेषज्ञ प्रशीतन अभियन्ता और प्रभारी अधिकारी सहकारी विवरणी के पद के लिए 35 वर्ष से अधिक न होनी चाहिये:
11. चरित्र- सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा होना चाहिये कि वह सरकारी सेवा में विनियोजन के लिए सभी प्रकार से उपयुक्त हो सके नियुक्ति प्राधिकारी इस सम्बन्ध में अपना समाधान करेगा।
टिप्पणी- संघ सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा या संघ सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वमित्व या नियन्त्रण में किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगे । नैतिक अधमता के किसी अपराध के लिए दोष सिद्ध  व्यक्ति भी पात्र न होगे।
12. वैवाहिक प्रास्थिति- सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए ऐसा पुरूष अभ्यर्थी पात्र न होगा जिसकी एक से अधिक पत्निय जीवित हों, या ऐसी महिला अभ्यर्थी पात्र न होगी जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो जिसकी पहले से एक पत्नी जीवित होः
परन्तु राज्यपाल किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रर्वतन से छूट दे सकते हैं यदि उनका यह समाधान हो जाये कि ऐसा करने के लिये विशेष कारण विद्यमान है।
13. शारीरिक स्वस्थता- किसी अभ्यर्थी को सेवा में किसी पद पर तब तक नियुक्ति नही किया जायेगा जब तक कि मानसिक और शारीरिक दृष्टि से उसका स्वास्थ्य अच्छा न हो और वह किसी ऐसे शारीरिक दोष से युक्त न हो जिससे उसे अपने कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने में बाधा पड़ने की सम्भावना हो । किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए अन्तिम रूप से अनुमोदित किये जाने के पूर्व उससे यह अपेक्षा की जायेगी कि वह चिकित्सा बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण करेः
परन्तु पदोन्नति द्वारा भर्ती किये गये अभ्यर्थी से स्वस्थता का प्रमाण-पत्र की अपेक्षा नहीं की जायेगी।


भाग 5
भर्ती की प्रक्रिया


14. रिक्तियों का अवधारण- नियुक्ति प्राधिकारी वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या और नियम 6 के अधीन अनुसूचित जातिय, जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित की जाने वाली रिक्तियों की संख्या भी अवधारित करेगा। वह आयोग को उसके माध्यम से भरी जाने वाली रिक्तियों की सूचना देगा।
15. सहायक निबन्धक के पद के लिए प्रतियोगिता परीक्षा द्वारा सीधी भर्ती की प्रक्रिया-(1) आयोग के माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति के लिए आवेदन-पत्र आयोग द्वारा विहित प्रपत्र में आमन्त्रित किये जायेंगे, जो आयोग के सचिव से भुगतान किये जाने पर प्राप्त किये जा सकते है।
(2) किसी अभ्यर्थी को परीक्षा में तब तक सम्मिलित नही होने दिया जायेगा जब तक कि उसके पास आयोग द्वारा जारी किया गया प्रवेश-प्रमाण पत्र न हो
(3) आयोग लिखित परीक्षा के परिणाम प्राप्त और सारणीबद्व करने के पश्चात्, नियम 6 के अधीन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के अन्य अभ्यर्थियों का समयक् प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए साक्षात्कार के लिए उतनी संख्या में अभ्यर्थियों को बुलायेगा जितने लिखित परीक्षा के परिणाम के आधार पर इस सम्बन्ध में आयोग द्वारा निर्धारित मानक तक पहुचॅ सकें हो । प्रत्येक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में दिये गये अंक लिखित परीक्षा में उसके द्वारा प्राप्त किये गये अंको में जोड़े जायेगे।
(4) आयोग अभ्यर्थियों की, उनकी प्रवीणता के क्रम में जैसा कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा प्राप्त किये अंको के कुल योग से प्रगट हो, एक सूची तैयार करेगा और उतनी संख्या में अभ्यर्थियों की सिफारिश करेगा जितने वह नियुक्ति के लिये उचित समझे । यदि दो या अधिक अभ्यर्थियों के प्राप्त अंको का कुल योग बराबर हो तो लिखित परीक्षा में अपेक्षाकृत अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी का नाम सूची में उच्चतर स्थान पर रखा जायेगा । सूची में नामों की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक ( किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नही) होगी । आयोग यह सूची नियुक्ति प्राधिकारी को अग्रसारित करेगा।
16. (1)1कृषि अधिकारी/प्रसंस्करण सलाहकार/भेषजिक/विशेषज्ञ प्रशीतन अभियन्ता प्रभारी अधिकारी सहकारी विवरणी के पद पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया - चयन के लिए विचारार्थ आवेदन-पत्र आयोग द्वारा निहित प्रपत्र में आमन्त्रित किये जायेगे जो आयोग के सचिव से भुगतान किये जाने पर प्राप्त किये जा सकते है।
(2) आयोग नियम 6 के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों का समयक् प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखत हुये साक्षात्कार के लिये उतनी संख्या में अभ्यर्थियों को बुलायेगा, जो अपेक्षित अर्हताए रखते हों ।
(3) आयोग अभ्यर्थियों की, उनकी प्रवीणता के क्रम में जैसा कि साक्षात्कार में प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा प्राप्त किये गये अंको से प्रकट हो, एक सूची तैयार करेगा। यदि दो या अधिक अभ्यर्थी सामान अंक प्राप्त करें तो आयोग उनके नाम सेवा के लिये उनकी सामान्य उपयुक्तता के आधर पर योग्यता के क्रम में रखेगा। सूची के नामों की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक (किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नही) होगी आयोग यह सूची नियुक्ति प्राधिकारी को अग्रसारित करेगा।
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1 अधिसूचना संख्या 1848/XII-C-2-90-148(40)-90 दिनांक 30 जुलाई 1990 उ0 प्र0 सरकारी गजट में दिनांक 1 सितम्बर, 1990 को प्रकाशित हुआ।


17. पाठ्य विवरण-प्रतियोगिता परीक्षा से सम्बन्धित पाठ्य-विवरण और नियम ऐसे होंगे जो आयोग द्वारा समय-समय पर राज्यपाल के अनुमोदन से निहित किये जायें।

टिप्पणी-    इस समय परीक्षा के लिए विदित पाठ्य -विवरण और नियम परिशिष्ट 'ख' मे दिये गये है।
1[18. अपर निबन्धक,संयुक्त निबन्धक और उपनिबन्धक के पद पर पदोन्नति द्वारा भर्ती-(1) पदोन्नति द्वारा भर्ती चयन समिति के माध्यम से की जायेगी, जिसमें निम्नलिखित होंगे-
(क) अपर निबन्धक के पद के लिए-
(1) मुख्य सचिव अध्यक्ष
(2) प्रमुख सचिव, कृषि तथा ग्राम विकास एवं कृषि उत्पादन आयुक्त सदस्य
(3) सचिव, सहकारिता विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार सदस्य
(4) सचिव, कार्मिक विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार सदस्य
(ख) संयुक्त सचिव और उपनिबन्धक के पद के लिए-
(1) प्रमुख सचिव, कृषि तथा ग्राम विकास एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अध्यक्ष
(2) सचिव, सहकारिता विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार सदस्य
(3) सचिव, कार्मिक विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार सदस्य
(4) निबन्धक, सहकारी समितिय, उत्तर प्रदेश सदस्य
(2) नियुक्ति प्राधिकारी, ज्येष्ठता के क्रम में अभ्यर्थियों की एक पात्रता सूची तैयार करेगा और उसे अभ्यर्थियों के चरित्र-पंजियों और उनसे सम्बन्धित ऐसे अन्य अभिलेख के साथ जो उचित समझे जायें, चयन समिति के समक्ष रखेगा ।
(3) चयन समिति उपनियम (2) में निर्दिष्ट अभिलेखों के आधार पर अभ्यर्थियों के मामलों पर विचार करेगी और यदि वह आवश्यक समझे तो वह अभ्यर्थियों के साक्षात्कार भी कर सकती है।
(4) चयन समिति चुने गये अभ्यर्थियों की ज्येष्ठता के क्रम में एक सूची तैयार करेगी और उसे नियुक्ति प्राधिकारी को अग्रसारित करेगी । ,

टिप्पणी-   चयन करते समय एकीकरण मे अनुभाग के शासनादेश संख्य15-25-74/ रा०एकी० दिनांक  20  1976  (प्रतिलिपि परिशिष्ट 'ग' के रप में संलग्न) के अनुसार कार्यवाही की जायेगी।
19. सहायक निबन्धक के पद पर पदोन्नति द्वारा भर्ती- सहायक निबन्धक के पद पर पदोन्नति द्वारा भर्ती समय-समय पर यथा संशोधित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से परामर्श चयनोन्नति (प्रक्रिया) नियमावली, 1970 के अनुसार योग्यता के आधार पर की जायेगी ।
टिप्पणी- यथा संशोधित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से परामर्श चयनोन्नति (प्रक्रिया) नियमावली , 1970 की एक प्रति परिशिष्ट (घ) में दी गयी है।
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1 अधिसूचना संख्या 1848/XII-C-2-90-148(40)-90 दिनांक 30 जुलाई, 1990, उ0 प्र0 सरकारी गजट में दिनांक 1 सितम्बर, 1990 को प्रकाशित हुआ।
20. संयुक्त सूची- यदि नियुक्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों ही प्रकार से की जानी हो तो एक संयुक्त चयन सूची तैयार की जायेगी जिसमें अभ्यर्थियों के नाम अनुक्रमतः नियम 15 और 19 के अधीन तैयार की गयी सूचियों से लिए जायेगे। पहला नाम नियम 19 के अधीन तैयार की गई सूची से होगा ।

भाग 6
नियुक्ति, परिवीक्षा स्थायीकरण और ज्येष्ठता
21. नियुक्ति- (1) मौलिक रिक्तियॉ होने पर नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थियों को उस क्रम से लेकर जिसमें उसके नाम, यथास्थिति नियम 15, 16, 18, 19, या 20 के अधीन तैयार की गई सूची में हो, नियुक्तिय करेगा।
1[(2) नियुक्ति प्राधिकारी अस्थायी और स्थानापन्न रिक्तियों में भी उपनियम (1) में निर्दिष्ट सूची से नियुक्तिय कर सकता है। यदि इन सूचियों को कई अभ्यर्थी उपलब्ध न हो तो वह इस नियमावली के अधीन नियुक्ति के लिए पात्र व्यक्तियों में से ऐसी रिक्तियों में नियुक्त कर सकता हैः
परन्तु यदि उप निबन्धक और अपर निबन्धक के पद पर पदोन्नति के लिए क्रमशः स्थायी सहायक निबन्धक या उप निबन्धक उपलब्ध न हों तो ऐसी रिक्तियों में नियुक्तिय उन व्यक्तियों में से की जा सकती हैं जिन्होंने , यथास्थिति, सहायक निबन्धक या उप निबन्धक के पद पर कम से कम पच वर्ष की सेवा की होः
परन्तु यह और कि अपर निबन्धक या उप-निबन्धक के पद पर ऐसी नियुक्ति एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए या अगला चयन किये जाने के बाद, इनमें जो भी पहले हो, नहीं चलेगी और सेवा में शेष पदों पर नियुक्त व्यक्ति उक्त पद को आयोग से परामर्श बिना कुल एक वर्ष की लगातार अवधि से अधिक धारण नही करेगा।,
22. परिवीक्षा- (1) सेवा में किसी पद पर किसी मौलिक रिक्ति में या उसके प्रति नियुक्ति किये जाने पर कोई व्यक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जायेगा।
(2) नियुक्ति प्राधिकारी ऐसे कारणों से, जो अभिलिखित किये जायेगे अलग- अलग मामलों में परिवीक्षा अवधि को बढा सकता है, जिसमें ऐसा दिनांक विनिर्दिष्ट किया जायेगा जब तक कि अवधि बढ़ायी जायेः
परन्तु आपवादिक परिस्थितियों के सिवाय परिवीक्षा अवधि एक वर्ष से अधिक और किसी भी परिस्थिति में दो वर्ष से अधिक नही बढ़ाई जायेगी।
(3) यदि परिवीक्षा अवधि या बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि के दौरान किसी भी समय या उसके अन्त में नियुक्ति प्राधिकारी को यह प्रतीत हो कि परिवीक्षाधीन व्यक्ति ने अपने अवसरों का पर्याप्त उपयोग नहीं किया है या संतोष प्रदान करने में अन्यथा विफल रहा हो तो , उसे उसके मौलिक पद पर, यदि कोई हो प्रत्यावर्तित किया जा सकता है और यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार न हो तो उसकी सेवायें समाप्त की जा सकती है।
(4) ऐसा परिवीक्षाधीन व्यक्ति जिसके उपनियम (3) के अधीन प्रत्यावर्तित किया जाये या जिसकी सेवायें समाप्त की जाये, किसी प्रतिकर का हकदार नही होगा।
(5) नियुक्ति प्राधिकारी संवर्ग में सम्मिलित किसी पद पर या किसी अन्य समकक्ष या उच्च पद पर स्थानापन्न या अस्थायी रूप से की गई निरन्तर सेवा की परिवीक्षा अवधि की संगणना करने के प्रयोजन के लिए गणना करने की अनुज्ञा दे सकता है।


2 अधिसूचना संख्या 2347/XII-X-2-232-68 दिनांक 13 मई, 1981, उ0 प्र0 सरकारी गजट में दिनांक 13 मई 1981 को प्रकाशित हुआ।


23. विभागीय परीक्षा- परिवीक्षा अवधि के दौरान समस्त अधिकारियों से ऐसी विभागीय परिक्षाएं उत्तीर्ण करने और ऐसा प्रशिक्षण पूरा करने की अपेक्षा की जायेगी, जिसे राज्यपाल समय-समय पर विहित करें ।
24. स्थायीकरण- किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति की परिवीक्षा अवधि या बढ़ायी गई परिवीक्षा अवधि के अन्त में उसकी नियुक्ति में स्थायी कर दिया जायेगा, यदि-
(क) उसने विहित विभागीय परीक्षा, यदि कोई हो उत्तीर्ण कर ली हो,
(ख) उसने विहित प्रशिक्षण, यदि कोई हो सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो,
(ग) उसका कार्य और आचरण संतोषजनक बताया गया हो,
(घ) उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित कर दी गई हो, और
(ड.) नियुक्ति प्राधिकारी का का यह समाधान हो जाये कि वह स्थायीकरण के लिए अन्यथा उपर्युक्त है।
25. ज्येष्ठता- सेवा में किसी श्रेणी के पद पर ज्येष्ठता मौलिक नियुक्ति के आदेश के दिनांक से और यदि दो या अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्ति किये जाये तो उस क्रम से जिसमें उनके नाम उक्त में रखे गये हों अवधारित की जायेगी।
परन्तु
(1) सेवा में सीधे नियुक्त किये गये व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता नहीं होगी, जो चयन के समय अवधारित की जाये।
(2) सेवा में पदोन्नति द्वारा नियुक्त किये गये व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो पदोन्नति के समय उनके द्वारा धृत मौलिक पद पर रही हो।
टिप्पणी-
(एक) जह नियुक्ति के आदेश में कोई ऐसा विशिष्ट पिछला दिनांक विनिर्दिष्ट किया जाये जब से किसी व्यक्ति को मौलिक रूप से नियुक्ति की जानी हो, वह उस दिनांक को मौलिक नियुक्ति के आदेश का दिनांक समझा जायेगा अन्य मामलों में उसका तात्पर्य आदेश जारी किये जाने के दिनांक से होगा।
(दो) सीधी भर्ती किया गया कोई अभ्यर्थी अपनी ज्येष्ठता खो सकता है यदि किसी रिक्त पद का उसे प्रस्ताव किये जाने पर वह विधिमान्य कारण के बिना कार्यभार ग्रहण करने में विफल रहे, कारण की विधिमान्यता के सम्बन्ध में जिसपर आयोग के परामर्श से विचार किया जायेगा, नियुक्ति प्राधिकारी का विनिश्चय अन्तिम होगा।



भाग 7
वेतन इत्यादि


26. वेतनमान- (1) सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर, चाहे मौलिक या स्थानापन्न रूप में या अस्थायी आधार पर नियुक्ति व्यक्तियों का अनुमान्य वेतनमान ऐसा होगा जो सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित किया जाये।

(2) इस नियमावली के प्रारम्भ के समय वेतनमान नीचे दिये गये है-

 पद का  नाम वेतनमान
(1) अपर निबन्धक 1200-50-1, 500-द0 रो0-60-1, 800रू0
(2) उप-निबन्धक  
(3) प्रसंस्करण सलाहकार 800-50-1050-द0 रो0-50-1, 300-द0 रो0-50-1, 450 रू0
(4) कृषि अधिकारी  
(5) सहायक निबन्धक  
(6) भेषजिक विशेषज्ञ  
(7) प्रशीतन अभियन्ता 550-30-7000-द0 रो0-40-900-द0 रो0-50-1, 200रू0
(8) प्रभारी अधिकारी  
सहकारी विवरणी  


27. परिवीक्षा अवधि में वेतन- (1) फण्डामेण्टल रूल्स में किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुए भी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को, यदि वह पहले से स्थायी सरकारी सेवा में न हो, समयमान में उसको प्रथम वेतनवृद्वि तभी दी जायेगी जब उसने एक वर्ष की संतोषप्रद सेवा पूरी कर ली हो और दितीय वेतनवृद्वि दो वर्ष की सेवा के पश्चात् तभी दी जायेगी जब उसने परिवीक्षा अवधि पूरी ली हों , विहित विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो और उसे स्थायी भी कर दिया गया हो।
परन्तु यदि संतोष प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढ़ाई जाये तो इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतन वृद्वि के लिए तब तक नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे।
(2) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से सरकार के अधीन कोई पद धारण कर रहा हो, परिवीक्षा अवधि में वेतन सुसंगत फण्डामेण्टल रूल्स द्वारा विनियमित होगा,
परन्तु यदि संतोष प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढ़ाई जाये तो इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतन वृद्वि के लिए तब तक नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे।
(3) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से स्थायी सहकारी सेवा में हो , परिवीक्षा अवधि में वेतन राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सामान्यतया सेवारत सरकारी सेवकों पर लागू सुसंगत नियमों द्वारा विनियमित होगा,
28. दक्षतारोक पार करने का मापदण्ड- (1) अपर निबन्धक को दक्षतारोक पार करने की अनुमति तब तक नहीं दी जायेगी जब तक कि उसने धीरतया और अपनी सर्वोत्तम योग्यता से कार्य न किया हो , उसे उच्चतर उत्तर दायित्व के पद धारण करने के लिए योग्य न पाया जायें, उसका कार्य और आचरण संतोषजनक न पाया जाये और जब तक कि उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।
(2) उप-निबन्धक, प्रसंस्करण सलाहकार और कृषि अधिकारी को-
(1) प्रथम दक्षतारोक पार करने की अनुमति तब तक नही दी जायेगी जब तक कि उसने धीरतया और अपनी सर्वोत्तम योग्यता से कार्य न किया हो, और उसे अपनी योग्यता और पूरी ईमानदारी, दनो ही प्रकार से पद के प्रभार को धारण करने में पूर्णतया समर्थ न पाया जाये, उसका कार्य और आचरण संतोषजनक न पाया जाये और जब तक कि उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।
(2) द्वितीय दक्षतारोक पार करने की अनुमति तब तक नही दी जायेगी जब तक कि उसने अपनी दक्षता को बराबर बनाये रखा हो और उसे उच्चतर उत्तरदायित्व के पद को धारण करने के योग्य न पाया जाये, उसका कार्य और आचरण संतोषजनक न पाया जाये और जब तक कि उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।
(3) सहायक निबन्धक, भेषजिक विशेषज्ञ, प्रशीतन अभियन्ता और प्रभारी अधिकारी सहकारी विवरणी को-
(1) प्रथम दक्षतारोक पार करने की अनुमति तब तक नही दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि उसने धीरता और अपनी सर्वोत्तम योग्यता से कार्य किया है , उसका कार्य और आचरण संतोषजनक न पाया जाये और जब तक कि उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।
(2) द्वितीय दक्षतारोक पार करने की अनुमति तब तक नही दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि वह उच्चतर उत्तरदायित्व के पद कार्य कर सकता है, उसका कार्य और आचरण संतोषजनक न पाया जाये और जब तक कि उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।

भाग 8
अन्य उपबन्ध


29. पक्ष समर्थन- किसी पद या सेवा पर लागू नियमों के अधीन अपेक्षित सिफारिश से भिन्न किसी अन्य सिफारिश पर, चाहे लिखित हो या मौखिक, विचार नही किया जायेगा । अभ्यर्थी की ओर से अपनी अभ्यर्थिता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन प्राप्त करने का कोई प्रयास उसे नियुक्त के लिए अनर्ह कर देगा।
30. अन्य विषयों का विनियमन्- ऐसे विषयों के सम्बन्ध में, जो विनिर्दिष्ट रूप से इस नियमावली या विशेष आदेश के अन्तर्गत  आते हो, सेवा में नियुक्त व्यक्ति राज्य के कार्य-कलापं के सम्बन्ध में सेवारत सरकारी सेवकों पर सामान्यतया लागू नियमों, विनियमों और आदेशों द्वारा नियन्त्रित होगे।
31. सेवा की शर्तो में शिथिलता-हॉ राज्य सरकार या यह सामाधान हो जाये कि सेवा में नियुक्त व्यक्ति की सेवा शर्तो की विनियमिति करने वाले किसी नियम के प्रवर्तन से किसी विशिष्ट मामले में अनुचित कठिनाई होती है वह वह उस मामले में लागू नियमों में किसी बात के होते हुए भी, आदेश द्वारा उस नियम की अपेक्षाओं की उस सीमा तक और ऐसी शर्तो के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह मामलें में न्याय संगत और साम्यपूर्ण रीति से कार्यवाही करने के लिए आवश्यक समझे, अभियुक्ति या शिथिल कर सकती है।
परन्तु जह कोई नियम आयोग के परामर्श से बनाया गया हो वह उस नियम की अपेक्षाओं को शिथिल या अभ्युक्त करने के पूर्व उस निकाय से परामर्श किया जायेगा।
32. व्यावृति- इस नियमावली में किसी बात का ऐसे आरक्षण और अन्य रियायतों पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा जिनको सरकार , द्वारा समय-समय पर जारी किये गये आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था करना अपेक्षित हो।

परिशिष्ट क