अनुसूची 4
1[अधीनस्थ सहकारी सेवा नियमावली, 1979
भाग 1
सामान्य


1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ- (1). यह नियमावली अधीनस्थ सहकारी सेवा नियमावली, 1979 कही जायेगी।
(2). यह तुरन्त प्रवृत्त होगी
2. सेवा की प्रास्थिति- उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सहकारी सेवा एवं राजपत्रित सेवा है, जिसमें समह ग के पद सम्मिलित हैं
3. परिभाषा- जब तक विषय या सन्दर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो, इस नियमावली में-
(क). नियुक्ति प्राधिकारी का तात्पर्य निरीक्षक, समूह एक पदों के लिए निबन्धक से और निरीक्षक, समूह-दो के पदों के लिए अपर निबन्धक(प्रशासन) से है ;
(ख). अपर निबन्धक (प्रशासन) का तात्पर्य ऐसे अधिकारी से है जो सरकार द्वारा निबन्धक, सहकारी समितिय, उत्तर प्रदेश के प्रधान कार्यालय में अपर निबन्धक, सहकारी समितिय , उत्तर प्रदेश के रूप में नियुक्त किया गया हो, निबन्धक द्वारा सेवा से सम्बन्धित अधिष्ठान मामलों में कार्यवाही करने के लिए प्राधिकृत किया गया हो;
(ग). आयोग का तात्पर्य उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से है;
(घ). सहकारी पर्यवेक्षक का तात्पर्य सहकारी संस्थाओं के नियोजनके अधीन पर्यवेक्षक से है ;
(ङ). संविधान तात्पर्य भारत के संविधान से है;
(च). सीधी भर्ती का तात्पर्य नियम 16 के अधीन विहित रीति से की गयी भर्ती से है ;
(छ). राज्यपाल का तात्पर्य उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से है;
(ज). सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है ;
(झ). निरीक्षक, समूह-एक का तात्पर्य सहकारी निरीक्षक समूह-एक से और इसके अन्तर्गत जिला सहकारी अधिकारी, अपर जिला सहकारी अधिकारी, ज्येष्ठ प्रक्षेत्र निरीक्षक, कार्यपालक अधिकारी (प्रसंस्करण), सीनियर रिर्टन्स इन्सपेक्टर का पद और ऐसे अन्य अधीनस्थ कार्यपालक पद, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पद पर उस रूप में घोषित करने वाले अधिकारी भी हैं;
(). निरीक्षक, समूह-दो का तात्पर्य सहकारी निरीक्षक समूह-द से और इसके अन्तर्गत सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता), सहायक विकास अधिकारी अधिकारी(सहकारिताऔर पंचायत), और महिला निरीक्षका का पद और ऐसे अन्य पद, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पद पर उस रूप में घोषित करने वाले अधिकारी भी हैं;
(ट). निरीक्षक, समूह-तीन का तात्पर्य सहायक सहकारी निरीक्षक से है और इसके अन्तर्गत कोटिक्रम सहायक, सांख्यिकीय सहायक का पद धारण करने वाले अधिकारी और सहकारिता विभाग, के ऐसे कर्मचारी अन्य कर्मचारी भी हैं, जो उत्तर प्रदेश सहकारिता विभाग समूह तीन  अधीनस्थ सेवा, मे श्रेणी समूह तीन -क के अन्तर्गत सम्मितिलत किये जायें ;


1. अधिसूचना संख्या 2569/12-सी-2-39-12-60, दिनांक 14 मई 1979 द्वारा प्रतिस्थापित।


(ठ). सेवा का सदस्यका तात्पर्य सेवा के संवर्ग में किसी पद पर इस नियमावली या इस नियमावली के प्रारम्भ होने के पूर्व प्रवृत्त नियमों या आदेशों के उपबन्धों के अधीन मौलिक रूप से नियुक्त व्यक्ति से है।

(ड) निबन्धक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 3 (1) के अधीन यथापरिभाषित निबन्धक सहकारी समितिय  उत्तर प्रदेश से है;
(ढ). संभागीय अधिकारी का तात्पर्य किसी राजस्व प्रभाग में नियुक्त उपनिबन्धक,सहकारी समितियों से हैं;
(ण). सेवा का तात्पर्य अधीनस्थ सहकारी सेवा से हैं ;
(त). ग्राम विकास अधिकारी का तात्पर्य उत्तर  प्रदेश राज्य सामुदायिक विकास विभाग के नियोजन के अधीन समह तीन के कर्मकार से है और ;
(थ). भर्ती का वर्ष का तात्पर्य, जिस वर्ष भर्ती की जाये उस कलेण्डर वर्ष की पहली जुलाई से प्रारम्भ होने वाली बारह मास की अवधि से है।
4. सेवा की सदस्य संख्या- (1). सेवा की सदस्य संख्या औश्र उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या उतनी होगी जितनी राज्यपाल द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाये।
(2). सेवा की सदस्य संख्या और उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या जब तक कि उपनियम (1) के अधीन परिवर्तन करने का आदेश न दिये जायें, उतनी होगी जितनी इस नियमावली के परिशिष्ट क में विनिर्दिष्ट की गई है ;परन्तु-
(एक). नियुक्ति प्राधिकारी किसी रिक्त पद को बिना भरे हुए छोड़ सकता है या राज्यपाल उसे अस्थगित रख सकते हैं, जिसमें कोई व्यक्ति प्रतिकर का हकदार न होगा,
(दो). राज्यपाल समय-समय पर ऐसे अतिरिक्त अस्थायी या स्थायी पदों का सृजन का सकतें हैं, जिन्हें वह आवश्यक समझें।


भाग 3
भर्ती


2[ 5.भर्ती का स्त्रोत- नियम 6 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर भर्ती निम्नलिखित स्त्रोतों से की जायेगी:
निरीक्षक समूह-एक-
निरीक्षक-समूह दो में से, जिन्होने इस रूप में कम से कम पच वर्ष की सेवा की हो, आयोग के माध्यम से पदोन्नति द्वारा।
निरीक्षक समूह-दो-
(क). आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा;
(ख). स्थायी निरीक्षक समूह-तीन और ऐसे स्थायी सरकारी पर्यवेक्षकों और ग्राम विकास अधिकारियों में से, जिन्होने माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश

 
1. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।
2. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा प्रतिस्थापित।


प्रदेश इण्टरमीडिएट परीक्षा या राज्यपाल द्वारा उसके समकक्ष मान्यताप्राप्त कोई परीक्षा उत्तीर्ण की हो पदोन्नति द्वारा:
1[रन्तु ऐसे स्थायी सहकारी पर्यवेक्षक और ग्राम विकास अधिकारी भी , जिन्हें क्रमशः 21 जनवरी ,1975 और 7 अक्टूबर, 1980 के पूर्व भर्ती किया गया हो और जिन्होने कम से कम पच वर्ष की निरन्तर सेवा की हो, पदोन्नति के पात्र होंगे, भले ही उन्होने इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण न की हो।]
6. प्रत्येक स्त्रोत के भर्ती का अनुपात-(1) {* * *}

(2). निरीक्षक समूह-दो के पदों पर भर्ती साधारणतया इस प्रकार की जायेगी कि किसी भी समय संवर्ग की कुल संख्या में से 66 प्रतिशत पद सीधी भर्ती किये गये व्यक्तियों द्वारा और 34 प्रतिशत पद पदोन्नति व्यक्तियों द्वारा धृत होगें:
परन्तु एक ओर (ग्राम विकास अधिकारी) और दूसरी ओर निरीक्षक समूह तीन के साथ-साथ सहकारी पर्यवेक्षकों के बीच पदोन्नति को कोटा उनकी अपेक्षित संख्या अर्थात सम्बन्धित वर्ष की पहली अप्रैल को एक ओर (ग्राम विकास अधिकारी) की और दसरी ओर निरीक्षक समूह तीन के साथ-साथ सहकारी पर्यवेक्षकों की संख्या के अनुसार होगा:
परन्तु यह है कि निरीक्षक समूह-तीन और सहकारी पर्यवेक्षकों के बीच पदोन्नति कोटा सम्बन्धित वर्ष की पहली को अपेक्षित संख्या के अनुपात में होगा।
7. आरक्षण- अनुसचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण भर्ती के समय प्रवृत्त सरकार के आदेशों के अनुसार किया जायेगा।


भाग 4
अर्हताएं


8. राष्ट्रीयता- सेवा में किसी पद पर सीर्धी भर्ती के लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी-
(क). भारत का नागरिक हो ; या
(ख). तिब्बती शरणार्थी हो, जो भारत में स्थायी रूप से निवास करने के अभिप्राय से 1 जनवरी 1962 से पूर्व भारत आया हो; या
(ग). भारतीय उदभव का ऐसा व्यक्ति हो जिसने भारत में स्थायी रूप से निवास करने के अभिप्राय से पाकिस्तान,बर्मा, श्रीलंका और केनिया, युगान्डा और यूनाइटेड रिपब्लिक आफ तंजानिया (पूर्ववर्ती तांगानिका और जंजीबार) के किसी पूर्वी अफ्रीकी देश से प्रव्रजन किया किया होः
परन्तु उर्पयुक्त श्रेणी (ख) या (ग) के अभ्यर्थी को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसके पक्ष में राज्य सरकार द्वारा पात्रता का प्रमाण-पत्र जारी किया गया हो:
परन्तु यह और की श्रेणी (ख) के अभ्यर्थी से यह भी अपेक्षा की जायेगी कि वह पुलिस उप महानिरीक्षक, गुप्तचर शाखा उत्तर प्रदेश से पात्रता का प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लेः
परन्तु यह भी कि यदि कोई अभ्यर्थी उपर्युक्त श्रेणी (ग) का हो तो पात्रता का प्रमाण-पत्र एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी नहीं किया जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी को एक वर्ष की अवधि से आगे सेवा में इस शर्त पर रहने दिया जायेगा कि वह भारत की नागरिकता प्राप्त कर ले।


1. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।
2. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा निकाल दिया गया।
3. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा निकाल दिया गया।
4. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा निकाल दिया गया।


टिप्पणी- ऐसे अभ्यार्थी को जिसके मामले में पात्रता प्रमाण-पत्र आवश्यक हो, किन्तु न तो वह जारी किया गया हो और न देने से इन्कार किया गया हो, किसी परीक्षा या साक्षत्कार में सम्मिलि किया जा सकता है और उसे इस शर्त पर अनन्तिम रूप से नियुक्त भी किय जा सकता है कि आवश्यक प्रमाण-पत्र उसके द्वारा प्राप्त कर लिया जाये या उसके पक्ष में जारी कर दिया जाये।
9- आयु- सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी की आयु जिस वर्ष भर्ती की जानी हो उस वर्ष की पहली जनवरी को, यदि पद पहली जनवरी से 30 जून की अवधि में विज्ञापित किये जाये और पहली जुलाई को यदि पद पहली जुलाई से 31 दिसम्बर की अवधि में विज्ञापित किये जायें,21 वर्ष की हो जानी चाहिए और 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए:
परन्तु अनुसचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ऐसी अन्य श्रेणियों के, जो सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जायें, अभ्यर्थियों की दशा में उच्चतर आयु -सीमा उतने वर्ष अधिक होगी जितनी विनिर्दिष्ट की जाये।
1[10-शैक्षिक अर्हताएं-(1) सेवा के संवर्ग में पदों पर सीधी भर्ती के लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी इस नियमावली के परिशिष्ट ख में भिन्न-भिन्न पदों के लिए दी गयी अर्हताएं रखता हो
11-अधिमानी अर्हताएं- ऐसे अभ्यर्थी को जिसने -
(एक). प्रादेशिक सेवा में दो वर्ष की न्यनतम अवधि तक सेवा की हो ; या
(दो). राष्ट्रीय क्रेडिट कोर का ब प्रमाण-पत्र प्राप्त किया हो, अन्य बातों के समान होने पर सीधी भर्ती के मामले में अधिमान दिया जायेगा।
12. चरित्र- सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा होना चाहिए कि वह सरकारी सेवा में नियोजन के लिए सभी प्रकार से उपयुक्त हो सके। नियुक्ति प्राधिकारी इस सम्बन्ध में में अपना समसधान करेगा।


टिप्पणी- संघ सरकार किसी राज्य सरकार द्वारा या संघ सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा किसी पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगें। नैतिक अधमता के किसी अपराध के लिए दोषसिद्व व्यक्ति भी पात्र होगें।
13. शारीरिक स्वस्थ्यता- किसी अभ्यर्थी की सेवा में किसी पद पर तब तक नियुक्ति नहीं किया जायेगा जब तक कि मानसिक और शारीरिक दृष्टि से उसका स्वास्थ्य अच्छा न हो और वह किसी ऐसे शारीरिक दोष से मुक्त न हो, जिससे उसे अपने कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने में बाधा पड़नें की सम्भावना हो। किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति के लिए अन्तिम रूप से अनुमोदित किये जाने के पूर्व उससे यह अपेक्षा की जायेगी कि वह फन्डामेण्टल रूल 10 के अधीन बनाये गये फाइनेन्शियल हैंडबुक, खण्ड दो भाग तीन के अध्याय तीन में दिये गये नियमों के अनुसार स्वस्थ्यता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करे:
परन्तु पदोन्नति द्वारा भर्ती किये गये अभ्यर्थी से स्वस्थ्यता प्रमाण-पत्र की अपेक्षा नहीं की जायेगी।
14. वैवाहिक प्रास्थिति- सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के लिए ऐसा पुरूष अभ्यर्थी पात्र न होगा जिसकी एक से अधिक पत्नियां जीवित हों या ऐसी महिला अभ्यर्थी पात्र न होगी जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया जो जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित हो:
परन्तु राज्यपाल किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकतें हैं,यदि उनका समाधान हो जाये कि ऐसा करने के लिए विशेष कारण विद्यमान हैं।

 
1. अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79, दिनांक 28 मार्च 1985 द्वारा प्रतिस्थापित हुआ।


भाग 5
भर्ती की प्रक्रिया


15. रिक्तियों का अवधारण- नियुक्ति, प्राधिकारी, वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या औ नियम 7 के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित की जाने वाली रिक्तियों की संख्या भी अवधारित करेगा और उनकी सूचना आयोग को देगा।
16. सीधी भर्ती की प्रक्रिया-(1). आयोग द्वारा प्रतियोगिता परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति के लिए आवंटन-पत्र विहित प्रपत्र में आमन्त्रित किये जा जायेगें, जो आयोग के सचिव से भुगतान किये जाने पर प्राप्त किये जा सकते हैं।
(2). किसी अभ्यर्थी को परीक्ष में तब तक सम्मिलित होने नहीं दिया जायेगा जब तक कि उसके पास आयोग द्वारा जारी किया गया प्रवेश प्रमाण-पत्र न हो।
(3). आयोग, लखित परीक्षा का परिणाम प्राप्त होने और उसे सरणीबद्ध करने के पश्चात नियम 7 के अधीन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थी के अभ्यर्थियों का सम्यक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता का ध्यान में रखतें हुए साक्षात्कार के लिए उतनी संख्या में अभ्यर्थियों को बुलायेगा जितने लिखित परीक्षा के परिणाम के आधार पर इस सम्बन्ध में आयोग द्वारा निर्धारित मानक तक पहच सके हों। साक्षात्कार में प्रत्येक अभ्यर्थी को दिये गये अंक लिखित परीक्षा में उसके द्वारा प्राप्त किये गये अंको में जोड़े जायेगें।
(4). आयोग अभ्यर्थियों की प्रवीणता के क्रम में जैसा कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा प्राप्त किये गये अंको के कुल योग से प्रकट हों, एक सूची तैयार करेगा और उतनी संख्या में अभ्यर्थियों की सिफारिश करेगा, जितने वह नियुक्ति के लिए उचित समझे। यदि दो या अधिक अभ्यर्थियों के प्राप्त अंको का कुल यग बराबर हो तो लिखित परीक्षा में अपेक्षाकृत अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी का नाम सूची में उच्चतर स्थान पर रखा जायेगा। सूची में नामों की संख्यां रिक्तियों की संख्या से अधिक किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। आयोग उक्त सूची प्राधिकारी को अग्रसारित करेगा।
टिप्पणी- प्रतियोगिता परीक्षा के लिए पाठ्य-विवरण और नियम ऐसे होगें जो सरकार द्वारा समय-समय पर आयोग के परामर्श से निर्धारित किये जाये।
17. पदोन्नति द्वारा भर्ती की प्रक्रिया-पदोन्नति द्वारा समय-समय पर यथासंशोधित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग सपरामर्श चयनोन्नति (प्रक्रिया) नियमावली 1970 के भाग चार में दी गयी प्रक्रिया के अनुसार अनुपयुक्त को अस्वीकार करते हुए ज्येष्ठता के आधार पर की जायेगी।
टिप्पणी- उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग सपरामर्श चयनोन्नति (प्रक्रिया) नियमावली,1970 की एक प्रति परिशिष्ट ग में दी गयी है।
18. संयुक्त सूची- यदि नियुक्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों ही प्रकार से की जानी हो तो एक संयुक्त चयन-सूची तैयार की जायेगी, जिसमें अभ्यर्थिय के नाम नियम 16 और 17 के अधीन तैयार की गई सूचियों से ऐसी रीति से लिए जायेगें कि सीधी भर्ती और पदोन्नति के लिए विहित प्रतिशत बना रहे, पहला नाम नियम 17 के अधीन तैयार की गई सूची से होगा।


भाग 6
नियुक्ति, परिवीक्षा और स्थायीकरण


19. नियक्ति-(1). मौलिक रिक्तिय होने पर नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यार्थियों को उस क्रम से लेकर जिसमें उनके नाम, यथास्थिति, नियम 16, {16-क} 17 या 18 के अधीन तैयार की गयी सूचियों में हो, नियुक्तिय करेगा।
(2). नियक्ति प्राधिकारी, अस्थायी और स्थानापन्न रिक्तियों में भी उपनियम (1) में निर्दिष्ट सूचियों से नियुक्तिय  कर सकता है। यदि इस सूची का कोई अभ्यर्थी उपलब्ध न हो तो वह ऐसी रिक्तियों में से इस नियमावली के अधीन नियुक्ति के लिए पात्र व्यक्तियों में से नियुक्तिय  कर सकता है। ऐसी नियुक्तिय , आयोग से परामर्श किये बिना एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए नहीं की जायेगी।
20. परिवीक्षा- (1) सेवा में किसी पद पर मौलिक रिक्ति में या उसके प्रति नियुक्त किये जाने पर प्रत्येक व्यक्ति जो दो वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जायेगा।
(2). नियुक्ति प्राधिकारी ऐसे कारणों, जो अभिलिखित किये जायेगें, अलग-अलग मामलों में परिवीक्षा-अवधि बढ़ा सकता है, जिसमें ऐसा दिनांक विनिर्दिष्ट किया जायेगा जब तक कि अवधि बढ़ायी जायेः
परन्तु आपवादिक परिस्थितियों में सिवाय परिवीक्षा-अवधि एक वर्ष से अधिक और किसी भी परिस्थिति में दो वर्ष से अधिक नहीं बढ़ायी जायेगी।
(3). यदि परिवीक्षा-अवधि या बढ़ायी गयी परिवीक्षा-अवधि के दौरान किसी भी समय या उसके अन्त में नियुक्ति प्राधिकारी को यह प्रतीत हो कि परिवीक्षाधीन व्यक्ति ने अपने अवसरों का पर्याप्त उपयोग नही किया है या संतोष प्रदान करने में अन्यथा विफल रहा है तो उसके मौलिक पद पर यदि कोई हो , प्रत्यावर्तित किया जा सकता है और यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार न हो तो उसकी सेवायें समाप्त की जा सकती है।
(4) ऐसा परिवीक्षाधीन व्यक्ति, जिसे उपनियम (3) के अधीन प्रत्यावर्तित किया जाये या जिसकी सेवायें समाप्त की जायें किसी प्रतिकर का हकदार न होगा।
(5) नियुक्ति प्राधिकारी संवर्ग में सम्मिलित किसी पद पर या किसी अन्य समकक्ष या उच्च पद पर स्थानापन्न या अस्थायी रूप से की गयी निरन्तर सेवा की परिवीक्षा-अवधि की संगणना के प्रयोजन के लिए गणना करने की अनुमति दे सकता है।
21. स्थायीकरण- किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को परिवीक्षा-अवधि या बढ़ाई गयी परिवीक्षा-अवधि के अन्त में उसको नियुक्ति में स्थायी कर दिया जायेगा, यदि-
(क) उसने विहित विभागीय परीक्षा, यदि कोई हो, उत्तीर्ण कर ली हो,
(ख) उसने विहित प्रशिक्षण, यदि कोई हो, सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हो,
(ग) उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक बताया गया हो,
(घ) उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित करा दी गयी हो; और
(ड़) नियुक्ति प्राधिकारी का यह समाधान हो जाये कि वह स्थायी किये जाने के लिये अन्यथा उपयुक्त है।
 

 22. ज्येष्ठता- सेवा में किसी श्रेणी के पद पर ज्येष्ठता मौलिक नियुक्ति के आदेश के दिनांक से, और यदि दो या अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्ति किये जाये तो क्रम से, जिसमें उनके नाम नियुक्ति के आदेश में रखें दिये गये हों, अवधारित की जायेगी।


1. अधिसूचना संख्या 580/12-सी-2-39(12)-68,दिनांक 29 मई, 1980 द्वारा अन्तःस्थापित जो उत्तर प्रदेश गजट, भाग 1-क, दिनांक 7 जून, 1980 में प्रकाशित हुआ।


परन्तु-

(एक) सेवा में सीधे नियुक्त किये गये व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो चयन के समय अवधारित की गई हो ;
(दो) सेवा में पदोन्नति द्वारा नियुक्त व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो पदोन्नति के समय उनके द्वारा मौलिक पद पर रही हो ।
टिप्पणी-
(एक) जह नियुक्ति के आदेश में कोई ऐसा विशिष्ट पिछला दिनांक विनिर्दिष्ट किया जाये जब से किसी व्यक्ति को मौलिक रूप से नियुक्ति की जानी हो, वह उस दिनांक को मौलिक नियुक्ति के आदेश का दिनांक समझा जायेगा अन्य मामलों में उसका तात्पर्य आदेश जारी किये जाने के दिनांक से होगा।
(दो) सीधी भर्ती किया गया कोई अभ्यर्थी अपनी ज्येष्ठता खो सकता है यदि किसी रिक्त पद का उसे प्रस्ताव किये जाने पर वह विधिमान्य कारण के बिना कार्यभार ग्रहण करने में विफल रहे, कारणों की विधिमान्यता के सम्बन्ध में नियुक्ति प्राधिकारी का विनिश्चय अन्तिम होगा।


भाग 7
वेतन आदि



23.वेतनमान- (1) सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर, चाहे मौलिक या स्थानापन्न में अस्थायी आधार पर नियुक्ति व्यक्तियों का अनुमान्य वेतनमान ऐसा होगा, जो सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित किया जाये।

(2) इस नियमावली के प्रारम्भ के समय, सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों के अनुमन्य वेतनमान इस नियमावली की परिशिष्ट क में दिये गये है।
24.परिवीक्षा-अवधि में वेतन- (1) फन्डामेंटल रूल्स में किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुए भी, किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को, यदि वह पहले से ही स्थायी सरकारी सेवा में न हो, समयमान में उसकी प्रथम वेतन वृद्वि तभी दी जायेगी जब उसने एक वर्ष की अवधि की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली हो, विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो और प्रशिक्षण, जह विहित हो, पूरा कर लिया हो, और द्वितीय वेतन वृद्वि दो वर्ष की सेवा के पश्चात् तभी दी जायेगी जब उसने परिवीक्षा-अवधि पूरी कर ली हो और उसे स्थायी भी कर दिया गया होः
परन्तु यदि संतोषजनक परिणाम प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढ़ाई जाये तो इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतन वृद्वि के लिए तब तक नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे।
(2) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से सरकार के अधीन कोई पद धारण कर रहा हो, परिवीक्षा अवधि में वेतन सुसंगत फण्डामेण्टल रूल्स द्वारा विनियमित होगा,
परन्तु यदि संतोषजनक परिणाम प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढ़ाई जाये तो इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतन वृद्वि के लिए तब तक नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे।
(3) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से स्थायी सहकारी सेवा में हो , परिवीक्षा अवधि में वेतन राज्य के कार्य-कलाप के सम्बन्ध में सामान्यतः सेवारत सरकारी सेवकों पर लागू सुसंगत नियमों द्वारा विनियमित होगा,
25. दक्षतारोक पार करने का मानदण्ड- किसी व्यक्ति को-
(1) प्रथम दक्षता रोक पार करने की तब तक अनुमति न दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि उसने धीरतया और अपनी सर्वोत्तम योग्यता से कार्य किया है, उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक न पाया जाये और जब तक उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जाये।
(2) द्वितीय दक्षता रोक पार करने की अनुमति तब तक नहीं दी जायेगी जब तक कि यह न पाया जाये कि उसने धीरतया और अपनी सर्वोत्तम योग्यता से कार्य किया है, उसने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम और विनियमावली के उपबन्धों और विभाग के कार्य का पर्याप्त ज्ञान अर्जित कर लिया है, उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक न पाया जाये और जब तक उसकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित न कर दी जायें,


भाग 8
अन्य उपबन्ध




26.पक्ष-समर्थन- किसी पद या सेवा पर लागू नियमों के अधीन अपेक्षित सिफारिश से भिन्न किसी अन्य सिफारिश पर चाहे लिखित हो या मौखिक, विचार नहीं किया जायेगा । अभ्यर्थी की ओर स अपनी अभ्यर्थिता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, समर्थन प्राप्त करने का कोई प्रयास उसे नियुक्ति के लिए उसे अनर्ह कर देगा ।
27. अन्य विषयों का विनियम- ऐसे विषयों के सम्बन्ध में, जो विनिर्दिष्ट रूप से इस नियमावली या विशेष आदेश के अन्तर्गत न आते हो, सेवा में नियुक्त, व्यक्ति, राज्य के कार्य-कलाप के सम्बन्ध में सेवारत सरकारी सेवकों पर सामान्यतः लागू नियमों, विनियमों और आदेशों द्वारा नियन्त्रित होगें।
28. सेवा की शर्तो में शिथिलता-हॉ राज्य सरकार का सामाधान हो जाये कि सेवा में नियुक्तियों की सेवा की शर्तो को विनियमित करने वाले किसी नियम के प्रवर्तन से किसी विशिष्ट मामले में अनुचित कठिनाई होती है वह वह उस मामले में लागू नियमों में किसी बात के होते हुए भी, आदेश द्वारा उस नियम की अपेक्षाओं को उस सीमा तक और ऐसी शर्तो के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह मामलें में न्यायसंगत और साम्यपूर्ण रीति से कार्यवाही करने के लिए आवश्यक समझे, अभियुक्त या शिथिल कर सकती हैः
परन्तु जह नियम आयोग के परामर्श से बनाया गया हो तो उस नियम की अपेक्षाओं को अभियुक्त या शिथिल करने के पूर्व उस निकाय से परामर्श किया जायेगा।
29.व्यावृति- इस नियमावली की किसी बात का ऐसे आरक्षण और अन्य रियायतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिनकी सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गये आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था करना अपेक्षित हो ।



परिशिष्ट क
(नियम 4)

 
श्रेणी पद का नाम वेतनमान स्थायी अस्थायी योग
समूह-एक (एक) सहकारी निरीक्षक

एक, ज्येष्ठ प्रक्षेत्र

निरीक्षक, प्राध्यापक

 

350-15-500-द0

रो0-20-600-द0

रो0-25-700 रू0

223 75 298
(दो) सीनियर रिटर्न 350-15-500-द0

रो0-20-600-द0

रो0-25-700 रू0

 

64 - 64
(तीन) कार्यपालिका अधिकारी (प्रसंस्करण) 350-15-500-द0

रो0-20-600-द0

रो0-25-700 रू0

2 2 4
(चार) अन्य 350-15-500-द0

रो0-20-600-द0

रो0-25-700 रू0

- 9 9
समूह-दो (एक) सहकारी निरीक्षक समूह-दो 700 रू0

280-8-296-9-350-

द0 रो0-10-400-द0

रो0-12-460-रू0

 

815 -  
(दो) सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) 657 181 838
(तीन) सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता एवं पंचायत) 99 - 99
(चार) महिला निरीक्षक   1 9 10

1. नये वेतनमान के लिए कृपया नया शासनादेश देखिए ।



परिशिष्ट ख
नियम 10(1),

 
श्रेणी पद का नाम न्यूनतम अर्हतायें अधिमानी अर्हतायें
1 2 3 4
समूह-एक  1[***]    
समूह-दो (क) सहकारी निरीक्षक समूह-दो कला (अर्थशास्त्र में स्नातक या वाणिज्य या बी0एस0सी (कृषि) में स्नातक ऐसे अभ्यर्थी को अधिमान दिया जायेगा जो एम0एस-सी0,(कृषि),एम0एस -सी0, एम0काम0 या अर्थशास्त्र में एम0ए0 हो जिसमें सहकारिता और सम्बद्व विषय रह रहे हों
  (ख) सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) - जिसके पास एक वैकल्पिक विषय सहकारिता के साथ
  (ग) सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता एवं पंचायत) - वाणिज्य और अर्थशास्त्र में उपाधि हो और बी0एस0 मेहता इन्स्टीट्यूट आफ कोआपरेटिव मैनेजमेंन्ट, पूना से सहकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हो।
  (घ) महिला निरीक्षक -

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1 अधिसूचना संख्या 1283/12-सी-2-27(28)-79,दिनांक 28 मार्च, 1985 द्वारा निकाल दिया गया।
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