अनुसूची 8
उत्तर प्रदेश सहकारी उपभोक्ता भण्डार केन्द्रीयित
सेवा नियमावली, 1979
सहकारिता
अनुभाग संख्या 650/12-सी-3-10(96)-77-उ0प्र0
अधिनियम-1/66-नियमावली,1971
लखनऊ,26 मई,1979

अधिसूचना


उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम,1965 (अधिनियम संख्या 11,1966) की धारा 122-क के अधीन शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल निम्नलिखित नियमावली बनाते है-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भः-(1) यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहकारी उपभोक्ता भण्डार केन्द्रीयित सेवा नियमावली,1979 कही जायेगी।
(2) यह नियमावली गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रवृत्त होगी ।
2. परिभाषाय - जब तक सन्दर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो; इस नियमावली में-
(क) अधिनियम का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम,1965(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 11,1966) से है,
(ख) प्राधिकारी का तात्पर्य नियम 5(ख) के अनुसार संघटित संवर्ग प्राधिकारी से हैः
(ग) कमेटी का तात्पर्य नियम 5(ख) के अनुसार संघटित प्रशासनिक कमेटी से हैः
(घ) सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है;
(ड.) सदस्य का तात्पर्य सेवा में इस नियमावली के अनुसार आमेलन, पदन्नति या सीधी नियुक्ति द्वारा नियुक्त किये गये व्यक्ति से है;
(च) निबन्धक का तात्पर्य उक्त अधिनियम की धारा (3) की उपधारा(1) के अधीन उत्तर प्रदेश राज्य की सहकारी समितियों के निबन्धक के रुप में तत्समय नियुक्त व्यक्ति से है;
(छ) संघ का तात्पर्य उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड, लखनऊ से है;
(ज) सचिव का तात्पर्य भण्डार के मुख्य कायर्यपाल अधिकारी, चाहे वह किसी भी नाम से कहा जाये, से है;
(झ) सेवा का तात्पर्य नियम 4 के अधीन सृजित सहकरी थोक उपभोक्ता भण्डार केन्दीयित सेवा से है;
() भण्डार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 2 (य)(चच) में यथा परिभाषित थोक उपभोक्ता स्टोर से है और इसमें पर्तवीय संभाग की निम्नलिखित समितिय भी सम्मिलित है-
(1) जिला सहकारी और क्रय-विक्रय संघ उत्तरकाशी;
(2) जिला सहकारी उपभोक्ता औ क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड, चमोली; और
(3) जिला सहकारी उपभोक्ता एव क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड, पिथौरागढ़।
3. प्रसार-यह नियमावली भण्डारों पर लागू होगी ।
4. सेवा का सृजन- भण्डारों के सचिवों के पदों के उत्तर प्रदेश सहकारी उपभोक्ता भण्डार केन्द्रीयित सेवा का संगठन होगा ।
5. संवर्ग प्राधिकारी और प्रशासनिक कमेटी का संघटनः-(क) संवर्ग प्राधिकारी संघटन निम्न् प्रकार से किया जायेगा-


(1) संघ का सभापति                                                               सभापति

(2) निबन्धक द्वारा नाम-निर्दिष्ट कोई व्यक्ति                                            सदस्य                                
 
 (3) संघ के निदेशक मण्डल का एक प्रतिनिधि                                           सदस्य

(4) भण्डार का एक सभापति जो निबन्ध द्वारा नाम-निर्दिष्ट किया जायेगा                    सदस्य        

(5) सरकार के दो नाम-निर्दिष्ट व्यक्ति जो सहकारिता और वित्त विभाग का प्रतिनिधित्व करेंगे       सदस्य

(6)संघ  के प्रबन्ध निदेशक                                                                                                             सदस्य-सचिव

(ख) प्रशासनिक कमेटी का संघटन निम्न् प्रकार से किया जायेगा-
(1) अपर निबन्धक(उपभोक्ता) सहकारी समिति, उत्तर प्रदेश, लखनऊ                                                   सभापति

(2) संघ के मण्डल का एक प्रतिनिधि                                                  सदस्य

 (3) भण्डार का एक प्रतिनिधि जो निबन्धक द्वारा नाम-निर्दिष्ट किया जायेगा                   सदस्य 

(4) उप निबन्धक(उपभोक्ता) सहकारी समिति,उत्तर प्रदेश,लखनऊ                                                          सदस्य 

(5) संघ का प्रबन्ध निदेशक                                                                                                            सदस्य-सचिव

(ग) प्राधिकारी के या कमेटी के किसी सदस्य को कोई पद किसी कारण से भरा न रहने की दशा में यथास्थिति प्राधिकारी के कमेटी के किसी कार्यवाही की विधिमान्यता पर उसका कोई प्रभाव नही पडेगा।
(घ) संवर्ग प्राधिकारी या प्रशासनिक कमेटी की बैठक के लिए कम से कम तीन सदस्यों की उपस्थिति गणपूर्ति के लिए आवश्यक होगी ।
(ड.) संवर्ग प्राधिकारी या यथास्थिति कमेटी द्वारा साधारण बहुमत से विनिश्चत किया जायेगा ।
6. प्रतिनियुक्ति व्यक्तियों पर इस नियमावली का लागू होनाः-ऐसे कर्मचारियों की दशा में जिनकी सेवायें निबन्धक या सरकार या किसी अन्य अधिकरण द्वारा उक्त सेवा के लिये उधार दी गई हों, यह नियमावली केवल उस सीमा तक लागू होगी, जहॉ तक कि व प्रतिनियुक्ति के निबन्धक और शर्तो से असंगत न हों:
परन्तु सेवा नियम 10 मे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सेवा में अन्ति रुप से आमेलित हो जाने के पश्चात् कोई ऐसे नियम, जिनसे कोई कर्मचारी ऐसे अन्तिम आमेलन के पूर्व नियन्त्रित होता, लागू नहीं होंगे।
7.प्राधिकारी की शक्तिः-संवर्ग प्राधिकरी की निम्नलिखित शक्तिय होंगी-

(क) सेवा से सम्बन्धित सभी नीति के विषय का विनिश्चय करनाः
(ख) कमेटी द्वारा प्रस्तुत किये गये वार्षिक बजट को अनुमोदित करना;
(ग) सभी विषयों पर कमेटी के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करना, और
(घ) भर्ती, परिलब्धिय, सेवा के निबन्धन और शर्तो के सम्बन्ध में जिनके अन्तर्गत सदस्यों का अनुशासनिक नियन्त्रण भी है, राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन से विनियम बनाना ।
8. कमेट की शक्तियॉ-कमेटी-
(क) सेवा के सदस्यों के सम्बन्ध में नियुक्ति प्राधिकारी होगी,
(ख) निबन्धक के पूर्वानुमोदन के अधीन रहते हुये सेवा के अनुरक्षण् के लिए भण्डारों द्वारा देय अंशदान अवधारित करेगी,
(ग) नियम 7 के उपनियम (घ) के अधीन बनाये गये विनियमों के अधीन रहते हुये सेवा के सदस्यों पर समग्र रुप से नियन्त्रण रखेगी और उनका पर्यवेक्षण करेगी ,
(घ) की ऐसी वित्तीय शक्तिय होंगी जो इस नियमावली में निर्दिष्ट की गई है; और
(ड.) को निबन्धक के पूर्वानुमोदन से सेवा की सदस्य संख्या को समय-समय पर अवधारित करने और उनमें परिष्कार करने की शक्ति होगी ।

1[9. सदस्य-सचिव के कर्तव्य :-सदस्य-सचिव के निम्नलिखित कर्तव्य और उत्तरदायित्व हगे-
(क) नियम 7 के उपनियम (घ) के अधीन बनाये गये विनियमों के अधीन रहते हुये सेवा के सदस्यों पर नियन्त्रण रखनाः
(ख) उचित रुप से लेखे रखने का उत्तरदायी होगा;
(ग) प्राधिकारी और कमेटी की बैठक बुलाना और उसकी कार्यवाहियों का अभिलेख रखना;
(घ) सेवा के सदस्यों को एक भण्डार से दूसरे भण्डार में 2[ मेटी के सभापति के पूर्व अनुमोदन के बाद] स्थानान्तरित करना;
(ड.) कमेटी/प्राधिकारी के विनिश्चयों को कार्यन्वित करना और प्राधिकरी और कमेटी की ओर से पत्र-व्यवहार करना;
(च) सेवा के सदस्यों की श्रेणीवार सूची रखना; और
(छ) भण्डारों से अंशदान वसूल करना; जैसा कि नियम 8 के उपनियम (ख) में निर्दिष्ट है।
10.कर्मचारी वर्ग का अनुवीक्षण और आमेलनः-(1) भण्डार के कर्मचारियों का अन्तिम रुप से सेवा का सदस्य समझा जायेगा। ऐसे सदस्यों को सेवा में अन्तिम रुप से आमेलित करने के प्रश्न का विनिश्चय कमेटी अधिनियम की धारा 122-क के अधीन समय-समय पर निबन्धक द्वारा जारी किये गये अनुदेशों के अनुसार करेगीः
परन्तु ऐसे कर्मचारी जो इस नियमावली के प्रारम्भ के दिनांक को निलम्बित हों या जिनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यावाहियॉ विचाराधीन हों, इस नियमावली में किसी बात के होते हुये भी, जब तक कि उनके मामलों का अन्तिम रुप से निस्तारण न हो जाये भण्डार के नियमों से नियन्त्रित होंगे।
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1 अधिसूचना संख्या 2663XII-C-3-10(1)-82 U.P.A-XI-1966-Rule 1979 AM-(1).1982 दिनांक 25.2.1983 Published in U.P.  Gazette dated 25-02-83 द्वारा प्रतिस्थापित ।
2 अधिसूचना संख्या 2663XII-C-3-10(1)-82 U.P.A-XI-1966-Rule 1979 AM-(1).1982 दिनांक 25.2.1983 Published in U.P.  Gazette dated 25-02-83 द्वारा प्रतिस्थापित ।

(2) ऐसा कर्मचारी जो सेवा में सम्मिलित पद पर अनन्तिम रुप से कार्य कर रहा हो, इस नियमावली के प्रारम्भ होने के 30 दिन के भीतर, ऐसी सेवा का सदस्य न होने के सम्बन्ध में अपने विकल्प की सूचना कमेटी के सचिव को इस निमित्त लिखित नोटिस द्वारा देगा और उस दशा में उसकी सेवा ऐसे नोटिस के दिनांक से समाप्त हो जायेगी और वह निम्नलिखित रुप में भण्डार से प्रतिकर का हकदार हो जायेगा-
(क) किसी स्थायी कर्मचारी की दशा में तीन महीने की अवधि के लिये, या उसकी सेवा की शेष् अवधि के लिए, इसे जो भी कम हो, उसके वेतन(सभी भत्तों को मिलाकर) के बराबर धनराशि;
(ख) किसी स्थायी कर्मचरी की दशा में एक महीने की अवधि या उसकी सेवा की शेष अवधि के लिये, इनमें जो भी कम हो, उसके वेतन(सभी भत्तों को मिलाकर) के बराबर धनराशि;
(3) अन्य अनन्तिम रुप से आमेलित सदस्यों की (सेवा) उपनियम(चार) में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवधारित की जायेगी ।
(4) कमेटी धारा 122-क के अधीन निबन्धक द्वारा समय-समय पर जारी किये गये अनुदेशो के अनुसार ऐसे अन्तिम रुप से आमेलित कर्मचारियों की अनुवीक्षा करेगी।यदि ऐसी अनुवीक्षा के परिणामस्वरुप कोई अनन्तिम रुप से आमेलित कर्मचारी कमेटी द्वारा सेवा में अन्तिम आमेलन के लिए उपयुक्त न पाया जाये, तो सम्बद्ध भण्डार में उसकी सेवा कमेटी द्वारा उस निमित्त आदेश जारी करने के दिनांक से समाप्त हो जायेगी और उस दशा में वह यथास्थिति उपनियम(2) के खण्ड (क)या (ख) मे उल्लिखित प्रतिकर का हकदार होगा।
11.वेतन और भत्तेः-(क) सचिव का वेतनमान जब तक कि प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर निबन्धक के अनुमोदन से पुनरीक्षित न किया जाये, 350-15-700-द0रो0 20-600-द0रो0 25-700 रु0 होगा;
परन्तु सेवा में 25 प्रतिशत पद प्राधिकारी के विवेकानुसार 550-30-700-द0रो0 40-900-द0रो 500-1200 रु0 के ज्येष्ठ वेतनमान में 5 प्रतिशत पद 800-1450 रु0 के चयन श्रेणी के वेतनमान मे रखे जा सकते हैं।
(ख) सेवा के सदस्य राज्य सरकार के कर्मचारियों को अनुमन्य दर पर मंहगाई भत्ते और ऐसे अन्य भत्तों के भी हकदार होंगे, जो प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर निबन्धक के पूर्वानुमोदन से अवधारित किये जायेंगे ।
(ग) यात्रा भत्ते जिसमें स्थानान्तत्रण यात्रा भी सम्मिलित है, सेवा के सदस्यों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू दरो पर अनुमन्य होगा।
(घ) संवर्ग निधि-नियम 14 मे यथाउपबन्धित के सिवाय प्राधिकरी सेवा के सदस्यों के वेतन के भुगतान के लिए एक राज्य सहकारी उपभोक्ता भण्डार केन्द्रीयित सेवा निधि जिसे इसमें आगे संवर्ग निधि के रुप में निर्दिष्ट किया गया है, संघटित करेगा। संवर्ग निधि में अंशदान भण्डारों द्वारा किया जायेगा। इसकी दरें इस प्रकार अवधारित की जायेंगी कि संवर्ग निधि में किसी सहकारी वर्ष में केन्द्रीयित सेवा के कुल व्यय की पूर्ति हो सके और इसे निबन्धक, सहकारी समिति के अनुमोदन से उद् गृहित किया जायेगा ।

राज्य सरकार की संवर्ग निधि में ऐसी दर से अंशदान कर सकती है जिसे वह समय-समय पर विनिश्चित करे।
(ड.) यदि संवर्ग निधि में उक्त स्रोतों से प्राप्त अंशदान किसी सहकारी वर्ष में केन्द्रीयित सेवा के कुल व्यय से कम पड़ ज तो निबन्धक, इस कमी को पूरा करने के लिए संघ भण्डारों की संवर्ग निधि में ऐसे अनुपात में, जिसे वह उचित समझे, अंशदान का निर्देश दे सकता है।
(च) उपनियम(घ) के अनुसार उद्गृहीत अंशदान ण्डारों द्वारा प्रतिवर्ष जुलाई और जनवरी के प्रथम दिनांक को दो समान किस्तों में देय होगा। वह सम्बन्धित भण्डारों की परिसम्पत्ति पर प्रथम प्रभार होगा। विहित दिनांक तक ऐसे अंशदान का भुगतान न करने की दशा में उसे जिला सहायक निबन्धक, सहकारी समिति द्वारा जारी किये गये प्रमाण-पत्र के आधार पर भू-राजस्व की बकाया के रुप में वसूल किया जा सकेगा।
(छ) संवर्ग निधि को उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक की किसी भी शाखा या जिला सहकारी बैंक मे रखा जायेगा और उसका संचालन प्राधिकारी के सदस्य-चिव के हस्ताक्षर से किया जायेगा।
12. अर्हता -सेवा के सदस्यों की अर्हताएं ऐसी होगी जो अधिनियम की धारा 120 के अधीन निबन्धक द्वारा समय-समय पर विहित की जायें।
13. सामान्य संवर्ग कोष्ठकः-सेवा से सम्बन्धित दिन-प्रतिदिन के कार्य को करने और इस नियमावली के कार्यान्वयन के लिए प्राधिकारी के निदेशों के अनुसार एक सामान्य संवर्ग कोष्ठक का सृजन किया जायेगा और उस पर होने वाला समस्त व्यय संघ द्वारा वहन किया जायेगा।
14. सेवा में अन्ति रुप से आमेलन के पूर्व वेतन का भुगतानः-सेवा में सदस्य ऐसे समय तक,जब तक कि उन्हें सेवा में अन्तिम रुप से आमेलित न कर दिया जाये, अपने-अपने पुराने वेतनमान में अपना वेतन और भत्ता लेते रहेंगे।
15. प्रकीर्णः-भण्डारों की प्रबन्ध कमेटी को ऐसे पदों पर जो सेवा में सम्मिलित हों, किसी व्यक्ति को नियुक्त करने की शक्ति न होगी। जह प्रशासनिक कमेटी ने भण्डार में ऐसे पद पर सेवा के किसी सदस्य को नियुक्त किया जो, वह सम्बन्धित भण्डार की प्रबन्ध कमेटी सदस्य पर ऐसे नियन्त्रण का प्रयोग करेगी जैसा इस नियमावली के नियम 7 (घ) के अधीन बनाये गये विनियमों में विनिर्दिष्ट हो।
16. निर्वाचन- यदि इस नियमावली के निर्वाचन या उसके लागू किये जाने के सम्बन्ध में किसी समय कोई विवाद उत्पन्न हो तो वह विषय निबन्धक को निर्दिष्ट किया जायेगा, जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा।
17. व्यायवृत्तिः-(क) जब तक कि नियम 7 के उपनियम (घ) में निर्दिष्ट विनियम न बनाये जायें, तब तक उसमें निर्दिष्ट सभी या कोई विषय ऐसे आदेशों या निदेशों में नियन्त्रित होगा जो निबन्धक के अनुमोदन से प्राधिकरी द्वारा जारी किये जायें।
(ख) कोई ऐसा विषय जो इस नियमावली के अन्तर्गत न आता हो, ऐसे निदेशों से नियन्त्रित होगा जो निबन्धक के अनुमोदन से प्राधिकारी द्वारा जारी किये जायें।


भाग 7
धारा 133 के अन्तर्गत जारी की गई अधिसूचनायें


इस धारा के अन्तर्गत निम्न अधिसूचनायें जारी की गयी-
(1) सहकारिता (क) विभाग अधिसूचना संख्या 68-सी/12-सी-ए-25(1)-69, दिनांक 5 फरवरी सन् 1968, जो उत्तर प्रदेश असाधारण गजट में फरवरी सन्1968 को प्रकाशित हुई,
चूंकि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 (अधिनियम संख्या 11, 1966) (जिसको बाद मे अधिनियम कहा गया है) की धारा 30 की उपधारा (1) से यह अपेक्षा की गई हो कि प्रत्येक सहकारी समिति का एक सभापति होगा जो नियमों तथा उपविधियों के उपबन्धों के अनुसार निर्वाचित होगा,
    और चूंकि अधिनियम की धारा 31 की उपधारा(1) की यह अपेक्षा है कि प्रत्येक सहाकरी समिति का एक सचिव होगा जो इस अधिनियम की धारा 121 तथा 122 के अन्तर्गत बने नियमों तथा विनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये नियुक्त किया तथा हटाया जा सकेगा और यह भी अपेक्षा है कि उसकी उपलब्धिय तथा सेवा की अन्य शर्ते ऐसी होंगी जैसी कि विनियमों तथा नियमों के अनुसार बनी समिति की उपविधयों में बताई जायेगी ।
    और चूंकि कुछ सहकारी समितियों की वर्तमान उपविधियों में समिति के लिए निर्वाचित सभापति या ऐसे वेतनभोगी सचिव के विषय में प्राविधान नहीं है जो उसके द्वारा नियुक्त या हटाया जा सके,
     और चूंकि अधिनियम की धारा 131 की उपधारा(3) तथा (7) के उपबन्धों के अनुसार वर्तमान सहकारी समितियों को इस अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर अपनी उपविधयों का संशोधन करके इस अधिनियम के उपबन्धं के अनुसा लाना है और अपनी प्रबन्ध कमेटी का गठन इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार करना है,
       और चूंकि इस अधिनियम की धारा 131 की उपधारा(8) में यह प्राविधान है कि इस अधिनियम में किसी प्रतिकूल बात के होते हुये किसी समिति या उसकी प्रबन्ध कमेटी का कोई कार्य या कार्यवाही इस बिना पर अवैध नहीं होगी न उसको चुनौती दी जा सकेगी कि धारा 131 के उपबन्धों के अनुसार प्रबन्ध कमेटी का  पुर्नगठन या सदस्यता का समायोजन करने के समय तक समिति  की सदस्यता या उसकी प्रबन्ध कमेटका गठन  इस अधिनियम तथा उसके अन्तर्गत बने नियमों के उपबन्धों के अन्तर्गत था,
और चूंकि  धारा 131 की उपधारा(8) के उपबन्धों के समान कोई प्राविधान उन वर्तमान सहकारी समितियों के विषयों में नहीं है जो अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार सभापति नहीं रखते हैं,
और चूंकि ऐसी किसी सहकारी समिति का कार्य इस अधिनियम के अनुसार नहीं चलाया जा सकता जब तक कि सभापति या सचिव, यथास्थिति, का इस अधिनियम तथा उसके अन्तर्गत बने नियमों के उपबन्धों के अनुसार चुनाव या नियुक्ति न हो जावे,
और चूंकि इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुपालन में एक कठिनाई उत्पन्न हो गई है, अब इसलिए धारा 133 की उपधारा (1) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल निम्नलिखित आदेश देते हैं-
आदेश
1.संक्षिप्त शीर्ष ना तथा प्रारम्भः-(1) यह आदे उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (कठिनाइयों का निवारण) आदेश 1968 कहलायेगा।
(2) यह गजट में प्रकाशित होने के एक वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम,1965 के उपबन्ध निम्नलिखित संशोधन के अधीन लागू होंगे ।
(i) अधिनियम की धारा 131 की उपधारा (8) के पश्चात् निम्नलिखित नई उपधाराएं जोड़ी जायेंगी ।
टिप्पणी- ये उपधाराएं की धारा 131 की व्याख्या में नोट नं0 6 में दी है।
(ii) सहकारिता विभाग (क) अधिसूचना संख्या 5610-सी/12-सी-ए-5,(1)-69 दिनांक 6 अगस्त सन् 1969 जो उसी दिनांक के असाधारण गजट में प्रकाशित हुई। चूंकि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति धिनियम, 1965. (जिसको इसके पश्चात् अधिनियम कहा गया है) की धारा 131 की उपधारा (1) में यह प्राविधान है कि इस अधिनियम के लागू होने के समय किसी वर्तमान समिति की उपविधय लागू रहेंगी, यदि वे इस अधिनियम के स्पष्ट उबन्धों के अन्तर्गत नहीं है जब तक कि उनको इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार परिवर्तित या विखण्डित नहीं किया गया है,
और चूंकि उक्त धारा की उपधारा (3) में यह प्राविधान है कि इस अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष, के भीतर सहकारी समिति ऐसे उपविधियों का, जो इस अधिनियम तथा नियमों/उपबन्धों के अन्तर्गत हैं, संशोधन करेगी या उन्हें निकाल देगी और ऐसी उपविधिय बनायेगी जो इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों का ध्यान में रखते हुये आवश्यक हैं,
और चूंकि उक्त धारा की उपधारा (4) में यह प्राविधान है कि सहकारी समिति द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3) के अनुसार कार्य करने के अभाव में निबन्धक समिति की उपविधियों में आवश्यक संशधन कर सकता हैं,
और चूंकि उक्त धारा की उपधारा (7) में यह प्राविधान है कि प्रत्येंक सहकरी अधिनियम लागू होने के एक वर्ष के अन्दर अपनी प्रबन्ध कमेटी, अधिनियम तथा नियमों के अनुसार संगठित करेगी और उके ऐसा करने के अभाव में नियत तरीके से प्रबन्ध कमेटी का गठन करेंगे।
और चूंकि उक्त धारा (8) के अनुसार किसी सहकारी समिति या उसकी प्रबन्ध कमेटी का कोई कार्य या कार्यवाही इस कारण अवैध नहीं होगी या चुनौती नहीं दी जायेगी कि इस अधिनिय में उपबन्धों के अनुसार प्रबन्ध कमेटी का पुनर्गठन या सदस्यता का समायोजन करने के समय तक समिति की सदस्यता या उसकी प्रबन्ध कमेटी इस अधिनियम या नियमों उपबन्धों के अन्तर्गत थी,
और चूंकि यह अधिनियम 26 जनवरी 1968 को लागू हुआ।
और चूंकि कुछ सहकारी समितिय इस समय तक उपविधियों में आवश्यक संशोधन या अपनी प्रबन्ध कमेटियों का पुनर्गठन इस अधिनियम तथा नियमों के उपबन्धों के अनुसार नहीं कर पाई हैं और निबन्धक भी ऐसी समितियों के विषय में उक्त धारा की उपधारा (4) तथा (7) के अनुसार कार्यवाही नहीं कर पाया है,
और चूंकि कुछ सहकारी समितिय की प्रबन्ध कमेटियों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस अधिनियम तथा नियमों के स्पष्ट उपबन्धों के असंगत वर्तमान उपविधिय उक्त धारा की उपधारा (1) के कारण निष्प्रभावी होगी और नई उपविधिय अभी तक नहीं बनी है, वर्तमान कमेटियों को चालू रखने के लिए अथवा उनके पुनर्गठन के लिए प्राविधान नहीं है,
और चूंकि इसलिए इस अधिनियम के उपबन्धों का अनुपालन करने में कठिनाईयॉ उपस्थित हो गई हैं,
अब इसलिए धारा 133 की उपधारा (1) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुये राज्यपाल निम्न आदेश बनाते हैं-
(1)(अ) यह आदेश उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (कठिनाईयों का निवारण) आदेश 1969 कहलायेगा ।
(ब) यह गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से लागू होगा और 25 जनवरी सन् 1970 तक लागू रहेगा ।
(2) इस आदेश के लागू होने की अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के उपबन्ध निम्न अनुकूलनों के अधीन प्रभावी रहेंगे-
(अ) अधिनियम की धारा 131 की उपधारा (8) के पश्चात् नई उपधारा जोड़ी जावेगी-(यह उपधारा,धारा 133 की व्याख्या के नोट नं0 6 मे बता दी गई है)