अनुसूची 5
1[ उत्तर प्रदेश ( सहकारी समिति केन्द्रीयत सेवाओं के पदों पर ) तदर्थ नियुक्तियों का विनियमितीकरण नियमावली, 1985
 


1.संक्षिप्त नाम,विस्तार और प्रारम्भ- (एक). यह नियमावली उत्तर प्रदेश ( सहकारी समिति केन्द्रीयत सेवाओं के पदों पर ) तदर्थ नियुक्तियों का विनियमितीकरण नियमावली, 1985 कही जायेगी।
(दो) यह नियम 3 के खण्ड (दो) में उल्लिखित केन्द्रीयित सेवा नियमावली द्वारा नियन्त्रित केन्द्रीयित सेवाओं पर लागू होगी।
(तीन) यह गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रवृत्त होगी।
2. अधिभावी प्रभाव- यह नियमावली किसी अन्य नियमों या आदेश में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी प्रभावी होगी।
3. परिभाषाएं- जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस नियमावली में-
(एक).नियुक्ति प्राधिकारी का तात्पर्य किसी ऐसे प्राधिकारी से है जो सुसंगत केन्द्रीयत सेवा नियमावली के अधीन नियुक्ति करने के लिए सशक्त हो;
(दो). केन्द्रीयत सेवा नियमावली का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 122-क के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी निम्नलिखित किसी भी केन्द्रीयित सेवा नियमावली, से है।
(क). उत्तर प्रदेश प्रारम्भिक कृषि सहकारी ऋण समिति केन्द्रीयित सेवा नियमावली ; 1976
(ख). सहकारी बैंक केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976;
(ग). उत्तर प्रदेश सहकारी उपभोक्ता भण्डार केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1976; और
(घ). उत्तर प्रदेश सहकारी प्रसंस्करण इकाई और कोल्ड स्टोरेज केन्द्रीयित सेवा नियमावली, 1981
(तीन).केन्द्रीयित सेवा का तात्पर्य केन्द्रीयित सेवा नियमावली के अधीन गठित केन्द्रीयित सेवा से है;
(चार.) कर्मचारी का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी केन्द्रीयित सेवा की पूर्ण-कालिक सेवा में हो किन्तु इसके अन्तर्गत  दैनिक मजदूरी पर नियोजित आकस्मिक कर्मकार या अंशकालिक सेवा में नियोजित व्यक्ति नही है;
(पच) निबन्धक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सहकारी अधिनियम 1965 की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन सहकारी समितियों के निबन्धक के रूप में नियुक्ति व्यक्ति से है।
(छः) इस नियमावली में प्रयुक्त, किन्तु यह पर अपरिभाषित, शब्दों और पदों के वही अर्थ होगे जो उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 और उसके अधीन बनाये गये नियमों में उनके लिए दिये गये है।
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1. अधिसूचना संख्या 3125/12-सी-2-151(5)-83, दिनांक 30 जुलाई 1985 द्वारा प्रतिस्थापित जो उत्तर प्रदेश साधारण गजट, दिनांक 30 जुलाई, 1985 में प्रकाशित हुआ ।
4. तदर्थ नियुक्तियों का विनियमितीकरण- (1) किसी कर्मचारी की-
(एक) जो किसी केन्द्रीयित सेवा में किसी पद पर तदर्थ आधार पर 1 मई, 1983 को या इसके पूर्व सीधे नियुक्त किया गया हो और इस नियमावली के प्रारम्भ के दिनांक को इस रूप में निरन्तर सेवारत हो;
(दो) जो ऐसी तदर्थ नियुक्ति के समय नियमित नियुक्ति के लिए नियम अपेक्षित अर्हताएं रखता हो; और
(तीन) जिसने तीन वर्ष की निरन्तर सेवा पूरी कर ली हो या, यथास्थिति पूरी करने के पश्चात् किसी स्थायी या अस्थायी रिक्ति में, जो उपलब्ध हो, नियमित नियुक्ति के लिए ऐसी रिक्ति मे  सुसंगत सेवा नियमों या आदेशों के अनुसार कोई नियमित नियुक्ति करने के पूर्व उसके अभिलेख और उपयुक्तता के आधार पर विचार किया जायेगा।
(2) इस नियमावली के अधीन नियुक्तिय करने में , अनुसूचित जातिय, अनुसूचित जनजातिय, पिछड़े वर्गो और अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण, भर्ती के समय प्रवृत्त राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार किया जायेगा।
(3) उपनियम (1) के प्रयोजन के लिए, चयन समिति का गठन निम्नलिखित प्रकार से किया जायेगाः
निबन्धक या उसके द्वारा नाम-निर्दिष्ट


(क) कोई अधिकारी जो अपर निबन्धक के पद से कम न हो                                             अघ्यक्ष


(ख) एक अधिकारी जो सम्बद्व शीर्ष सहकारी समिति के सभापति द्वारा 

    उक्त समिति के अधिकारियों में से नाम-निर्दिष्ट किया जायेगा।                                         सदस्य


(ग) सुसंगत केन्द्रीयत सेवा नियमावली के अधीन गठित संवर्ग प्राधिकारी का सदस्य-सचिव                                 सदस्य/ संयोजक


(4) नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थियों की , ज्येष्ठताक्रम में, जैसा कि उनकी प्रारम्भिक नियुक्ति के आदेश के दिनांक के अनुसार अवधारित हो और , यदि दो या अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्ति किये जाये तो उस क्रम में, जिसमें उनके नाम उक्त नियुक्ति के आदेश में रखे गये हो, एक पात्रता-सूची तैयार करेगा। सूची को उनकी चरित्र-पंजियों, यदि कोई हों, और उनसे सम्बन्धित ऐसे अन्य अभिलेखों के साथ जो उनकी उपयुक्तता को निर्धारित करने के लिए आवश्यक समझे जायें, चयन-समिति के समक्ष रखा जायेगा।
टिप्पणी- यदि दो या अधिक आदेश एक ही दिनांक को जारी किये जायें तो पहले जारी किये गये आदेश में उल्लिखित व्यक्ति को ज्येष्ठ समझा जाएगा।
(5) चयन-समिति उपनियम (4) में निर्दिष्ट अभिलेखो के आधार पर अभ्यर्थियों के मामलों पर विचार करेगी।
(6) चयन-समिति चयन किये गये अभ्यर्थियों को एक सूची तैयार करेगी और सूची में नाम ज्येष्ठताक्रम में रखकर उसे नियुक्ति प्रधिकारी को अग्रसारित करेगी।
5. नियुक्तियॉ- नियुक्ति प्राधिकारी नियम 4 के उपनियम (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नियम 4 के उपनियम (6) के अधीन तैयार की गई सूची से नियुक्तिय उसी क्रम में करेगा जिसमें उनके नाम उक्त सूची में हों ।
6. नियुक्तियों को सुसंगत सेवा नियमों, आदि के अधीन किया गया समझा जायेगा- इस नियमावली के अधीन की गई नियुक्तिय सुसंगत सेवा नियमों, या आदेशों के, यदि कोई हो, अधीन की गई समझी जायेंगी।
7. ज्येष्ठता- इस नियमावली के अधीन नियुक्ति कोई व्यक्ति इस नियमावली के अनुसार चयन के पश्चात् केवल नियुक्ति के आदेश के दिनांक से ज्येष्ठता का हकदार होगा और सभी मामलों में इस नियमावली के अधीन ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति के पूर्व, यथास्थिति, सुसंगत सेवा नियमों या नियमित नियत प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति व्यक्तियों के नीचे रखा जायेगा।
(2) यदि दो या अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्ति किये जाये तो उनकी परस्पर ज्येष्ठता नियुक्ति के आदेश में उल्लिखित क्रम में अवधारित की जायेगी।
8. सेवा की सामाप्ति- तदर्थ आधर पर नियुक्ति ऐसे व्यक्ति की सेवा जो उपयुक्त न पाया जाये या जिसका मामला नियम 4 के उपनियम (1) के अधीन न आता हो या जो तदर्थ सेवा की अवधि कितनी भी होते हुए उपलब्ध स्वीकृत पदों से अधिक हो, तत्काल सामाप्त कर दी जायेगी और ऐसी समाप्ति पर वह एक मास का वेतन पाने का हकदार होगा।
परन्तु ऐसे किसी कर्मचारी स्थिति में जो यथास्थिति, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 या संयुक्त प्रान्त औद्योगिक झगड़ों का एक्ट, 1947 द्वारा नियन्त्रित हो, उक्त अधिनियम / ऐक्ट के प्रयोज्य हो, उपबन्धों के अनुसार आदेश पारित किये जायेगी।
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