अनुसूची 13

1[ प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में जमा
निक्षेपों के लिए विशेष गारन्टी योजना
नियमावली, 1997


ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में बैंकिंग प्रवृत्ति को बढ़ावा देने तथा प्रारम्भिक कृषि ऋण समितियों की आर्थिक स्थित सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश में मिनी बैंकों का गठन किया गया है, मिनी बैंक/पैक्स में जनकर्ताओं के विश्वास को बनाये रखने के लिए केरल/तमिलनाडु राज्यों के पैटर्न के अनुसार निक्षेप बीमा निधि बनाने पर विचार किया गया, जिसमें सहकारी समितियों, जिला सहकारी बैंको तथा उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बेंक का अंशदान होगा चूंकि सहकारी समितिय बैंक नहीं हैं, अतः इस प्रकार जमा की गयी धनराशि की गारन्टी बीमा के माध्यम से होना सम्भव नहीं है, इस कठिनाई के निवारण हेतु एक गारन्टी योजना बनाया जाना प्रस्तावित है और इसी योजना के लिए भारत सरकार से प्राप्त माडल गाइ लाइसेन्स के आधार पर प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में जमा निक्षेपों के लिए निक्षेप गारन्टी योजना नियमावली, 1997 निम्नलिखित रुप में प्रख्यापित करने हेतु श्री राज्यपाल महोदय सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-
1.नामः- इस नियमावली को प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में जमा निक्षेपों के लिए निक्षेप गारन्टी योजना नियमावली, 1997 कहा जायेगा।
2.परिभाषायें- जब तक कि इस विष में या प्रसंग में कोई बात प्रतिकूल हो इस नियमावली में-
(1)विनियमावली का तात्पर्य प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समिति में जमा निक्षेपों के लिये गारन्टी योजना विनयमावली से है,
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1. सहकारिता अनुभाग-1, अधिसूचना संख्या 2017/49-1-377(7)/94-टी.सी. दिनांक 30 जून,1997,उ0प्र0 गजट, असाधारण, भाग 4,खण्ड(ख), दिनांक 30 जन, 1997 को प्रकाशित हुआ।


(2)समिति का तात्पर्य प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों से है जैसा कि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 में परिभाषित है,
(3)बैंक का तात्पर्य जिला सहकारी बैंक से है,
(4)शीर्ष बैंक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक से है,
(5)विभाग का तात्पर्य सहकारिता विभाग से है,
(6)शासन का तात्पर्य उत्तर प्रदेश शासन से है,
(7)निबन्धक का तात्पर्य निबन्धक सहकारी समितिय से है,
(8)फण्ड का तात्पर्य प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समिति निक्षेप गारन्टी फण्ड से है,
3.फण्ड का स्रोत-(1) बैंक स्तर पर एक कारपस फण्ड बनाया जायेगा जिसे प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकरी समिति निक्षेप गारंटी फण्ड कहा जायेगा इस फण्ड में निम्नप्रकार अंशदान किया जायेगा-
(अ) प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समिति द्वारा विगत 31 मार्च को जमा निक्षेप का        0.15 प्रतिशत
(ब) जिला सहकारी बैंक द्वारा विगत 31 मार्च को जमा निक्षेप का                                   0.10 प्रतिशत
(स) उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक द्वारा पैक्स में विगत 31 मार्च को जमा निक्षेप का              0.05 प्रतिशत
(द) राज्य सरकारी द्वारा पैक्स में विगत 31 मार्च को जमा निक्षेप का                             0.03 प्रतिशत
(2) प्रथम बार विगत 31 मार्च को समिति के निक्षेपों के आधार पर उपर्युक्त अंशदान की गणना की जायेगी तदनुसार प्रत्येक सहकारी वर्ष में विगत 31 मार्च को निक्षेप में हुई वृद्धि के आधार पर उपरोक्तानुसार वार्षिक अंशदान की गणना की जायेगी,
(3) देय अं का भुगतान सहकारी वर्ष के समाप्त होने के एक माह के अन्दर सभी अंशदाताओं द्वारा कराकर दिया जाये,
(4) फण्ड की समस्त धनराशि जिला सहकारी बैंक में इस हेतु खोले गये खाते में रखी जायेगी और उस पर बैंक द्वारा वही ब्याज दर की सावधि जमा निक्षेप पर बैंको द्वारा तत्समय दिया जा रहा है,
(5) समिति द्वारा क्षति की पूर्ति से सम्बन्धित कानूनी कार्यवाही करते हुये वसूल करके  की जायेगी इस प्रकार वसूल की गयी धनराशि समिति द्वारा बैंक कारपस फण्ड में जमा करने हेतु हस्तान्तरित की जायेगी,
4.योजना की परिधि में आने वाली समितियॉ-(क) यह योजना उन्हीं समितियों पर लागू होगी जो निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति करती हों-
(1) समिति द्वारा नियमित रुप से व्यावसाय विकास योजना बनायी जा रही हो,
(2) समिति लाभ पर कार्य कर रही है,
(3) समिति में विगत सहकारी वर्ष की समाप्ति की तिथि को 6 माह से अधिक की अवधि से कम से कम 25000 रु0(पच्चीस हजार रुपये) के निक्षेप जमा हो,
(4) समिति में बैंकिंग सुविधा यथा काउन्टर, सेफ आदि उपलब्ध ह,
(5) जमा निक्षेपों का विधिवत पृथक, लेखा रखा जा रहा हो तथा समिति में पूर्णकालिक सचिव हो,
(6) समिति का विगत वर्ष तक का आडिट हो गया हो तथा उसका वर्गीकरण कम से कम ग श्रेणी हो।
(ख) समिति द्वारा योजना की सदस्यता हेतु अपने जनपद की जिला सहकारी बैंक को जिला सहायक निबन्धक की संस्तुति के साथ निर्धारित प्रारुप पर आवेदन करना होगा जिस पर निर्णय प्रबन्ध समिति द्वारा लिया जायेगा, सदस्यता स्वीकार होने पर ही योजना का लाभ समिति को प्राप्त हो सकेगा,
(ग) कैश इन हैण्ड से सीमा से अधिक समस्त धनराशि समिति द्वारा जिला सहकारी बैंक में जमा करनी होगी,
(घ) समिति द्वारा 25% तरल आवरण रखा जायेगा तरल आवरण की धनराशि भी जिला सहकारी बैंक में लाभकारी विनियोजन में रखी जायेगी,
(ड़) समिति में कार्यरत कर्मचारियों की फाइडेन्टी गारन्टी तथा कैश आदि की बीमा एवं आग, चोरी एवं अन्य कारणों से हुई क्षतिपूर्ति के लिये बीमा, बीमा निगम से करना होगा,

(च) समिति द्वारा निबन्धक/बैंक द्वारा निर्धारित लेखा पद्वति के अनुसार जमा निक्षेपों का लेखा रखा जायेगा।

5.गारन्टी की धनराशिः-(1) समिति स्तर पर एकत्रित किये गये एक भी निक्षेपों की गारन्टी एक खाते में ब्याज सहित 5000.00(पच हजार रुपये मात्र) तक की हो जिसकी कुल धनराशि बैंक की निजी पूंजी के 25% से अधिक नही होगी तदनुसार जिला सहकारी बैंक द्वारा अपनी उपविधियों में आवश्यक संशोधन कराया जायेगा।
(2) समिति मे निक्षेप कर्ता के एक खाते में अधिकतम गारन्टी की धनराशि ब्याज सहित रू0 5000.00 (पच हजार रूपये मात्र) तक होगी, परन्तु 10 वर्ष से अधिक की जमा निक्षेप पर यह गारन्टी योजना लागू नहीं होगी।

6.बैंको का दायित्वः-(1)बैंक द्वारा समिति के मिनी बैंक में जमा तरल आवरण की राशि को अधिकतम ब्याज दर की सावधि खाते में जमा किया जायेगा तथा निक्षेप से प्राप्त अन्य राशि कैश रिजर्व को घटाकर विशेष खातें में जमा किया जायेगा जिस पर बैंक द्वारा अधिकतम सावधि खातें में अनुमन्य ब्याज दर से 1/2 प्रतिशत अधिक ब्याज दिया जायेगा।
अग्रेत्तर बैंक को यह अधिकारी होगा कि समिति द्वारा फण्ड में किये गये अंशदान से अधिक धनराशि की क्षतिपूर्ति ब्याज सहित वसूल समिति से कर ले।
(2) योजना में चयनित समितियों को सावधि जमा रसीद, सेविंग बैंक पासबुक तथा अन्य समस्त स्टेशनरी नगद भुगतान पर बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी।
(3) प्रत्येक सावधि जमा रसीद/सेविंग बैंक पास बुक पर जिला सहकारी बैंक द्वारा गारन्टी स्पष्ट रुप से अंकि होगा।
7.वारंटीं का नवोक किया जानाः-(1) गारन्टी इनवोक की दशा में निक्षेपकर्ता को उसके खाते में पड़ी धनराशि का 1/10 अथवा रुपये 500.00 से जो भी कम होगा, समिति द्वारा तत्काल भुगतान किया जायेगा लेकिन उससे ऊपर की धनराशि के भुगतान हेतु निक्षेपकर्ता द्वारा 15 दिन की नोटिस समिति को दिया जाना आवश्यक होगा तथा
(2) निक्षेपकर्ता द्वारा गारन्टी इनवोक किये जाने पर संबंधित समिति के सचिव द्वारा सम्पूर्ण विवरण सहित सुस्पष्ट प्रस्ताव बेंक को भेजा जायेगा,
(3) बैंक स्तर पर इस प्रकार इनवोक की गयी गारन्टी के सम्बन्ध में प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर क्लेम्स का निस्तारण निम्न कमेटी द्वारा किया जायेगा-
(1) सभापति बैंक                                                                               अध्यक्ष

(2) क्षेत्रीय प्रबन्धक,उ0प्र0 कोआपरेटिव बैंक                                          सदस्य 

(3) जिला सहायक निबन्धक,सहायक समितिय                                  सदस्य 

(4) उन दो सहकारी समितियों के अध्यक्ष जिनके द्वारा विगत 31 मार्च को सर्वाधिक अंशदान किया गया हो,        सदस्य


(5) सचिव/महाप्रबन्धक बैंक                                                           सदस्य/संयोजक                               


(4) निक्षेपकर्ता को क्षति की स्थिति में कमेटी की स्वीकृति उपरोक्त बैंक द्वारा फण्ड से एक खातें में ब्याज सहित 5000 रुपये(पांच हजार रुपये तक मात्र) की क्षतिपूर्ति की जायेगी, यदि फण्ड में आवश्यक धनराशि उपलब्ध नही है तो बैंक द्वारा फण्ड को ओवर ड्राफ्ट पर भुगतान किया जायेगा जो बैंक की निजी पूंजी के 25%से अधिक न होगा।
8.योजना का अनुश्रवणः-योजना के अनुश्रवण हेतु निम्न् व्यवस्था के अनुसार कार्यवाही की जायेगी-
(क) यनित समितियों द्वारा बैंक को समिति में जमा निक्षेप से संबंधित विवरण बैंक के निबन्धक द्वारा निर्धारति प्रारुप निर्धारित समय सरणी के अनुसार संबंधित बैंक द्वारा प्रेषित किया जायेगा,
(ख) मिति से प्राप्त सूचनाओं का संकलन बैंक की संबंधित शाखा में एक पृथक रजिस्टर में रखा जायेगा एवं बैंक मुख्यालय प्रेषित किया जायेगा तथा तरल आवरण आदि की साप्ताहिक जच कर पूर्ति कराई जायेगी, बैंक द्वारा संकलित विवरण निर्धारित प्रारुप पर उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक को प्रेषित किया जायेगा,
(ग) चयनित समिति का आडिट नियमित रुप से अगले सहकारी वर्ष के अन्त तक अवश्य कर लिया जायेगा,
(घ) विभाग/बैंक द्वारा नियमित रुप से समिति का निरीक्षण कराया जायेगा,
(ड़) उक्त नियमावली 1997 दिनांक 28.2.96 से प्रवृत्त होगी।
इस नियमावली में यदि संशोधन/परिवर्तन/ नए नियम को जोड़ने अथवा हटाये जाने की आवश्यकता होगी, वे प्रस्ताव प्राप्त होने पर शासन द्वारा यथा समय विचार किया जायेगा।