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सहकारी कृषि निवेश योजना

 

1- उद्देश्य-
उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान प्रदेश है, यहां की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है जिनकी जीविका का मूल आधार कृषि व्यवसाय ही है। कृषकों की उन्नत एवं देश के आर्थिक विकास के लिए कृषि उत्पादन में उत्तरोत्तर वृद्धि हेतु सहकारी संस्थाओं द्वारा कृषकों को उच्च गुणवत्ता के कृषि निवेशों यथा रासायनिक उर्वरक, यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी आदि, प्रमाणित बीज, तथा जिंक सल्फेट आदि का उचित मूल्य पर सामयिक रूप से वितरण कराया जाना सहकारी कृषि निवेश योजना का मुख्य उद्देश्य है।

2- कृषि निवेशों के वितरण का माध्यम
सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश में कृषकों को कृषि निवेशों की आपूर्ति प्रदेश की न्याय पंचायत स्तरीय 7446 प्रारम्भिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स), विकास खण्ड स्तर पर स्थित लगभग 1200 सक्रिय सहकारी संघों, तहसील स्तर पर कार्यरत 258 सहकारी क्रय विक्रय समितियों, जनपद स्तर पर कार्यरत 50 जिला सहकारी संघों व 49 केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भण्डारों तथा शीर्ष सहकारी संस्थाओं यथा पी०सी०एफ०, यू०पी०एस०एस०, उ०प्र० सहकारी जूट एवं कृषि विकास संघ, उ०प्र० आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ, इफको एवं कृभकों आदि सहकारी संस्थाओं द्वारा संचालित कृषि निवेश बिक्री केन्द्रों के माध्यम से की जाती हैं। कृषि निवेशों के वितरण हेतु प्रदेश की 50 जिला सहकारी बैंक तथा उनकी 1277 बैंक शाखायें वित्त पोषण का कार्य करती है।

3- कृषि निवेशों के वितरण का आधार
न्याय पंचायत स्तरीय सहकारी समितियों (पैक्स) द्वारा सदस्य कृषकों को उनकी जोत के आधार पर तैयार की गई ऋण्‍ा सीमा जिला सहकारी बैंक से स्वीकृत हो जाने के पश्चात सदस्य कृषक द्वारा निर्गत चेक के अनुसार सम्बन्धित कृषकों को कृषि निवेश की आपूर्ति नगद बिक्री के साथ-साथ वस्तु के रूप में (अंश "ख")  एवं नगद (अंश "क") ऋण के रूप में भी की जाती है। सामान्यतय: अंश ख एवं अंश क ऋण वितरण का अनुपात 50:50 है किन्तु कुछ जिला सहकारी बैंकों में यह अनुपात 75:25 का भी विद्यमान है। स्वीकृत ऋण सीमा के सापेक्ष सामान्य कृषक सदस्यों को उनके द्वारा जमा अंश पूंजी का 10 गुना तथा निर्बल वर्ग के कृषक सदस्यों को उनके द्वारा जमा अंशपूंजी का 20 गुना तक ऋण दिये जाने की व्यवस्था है। ऋण की प्राप्ति हेतु वित्तमान का निर्धारण प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा आपने-अपने जनपद की भौगोलिक स्थिति तथा फसलों को दृष्टिगत रखते हुए निर्धारित किया जाता है। इस व्यवस्था से समितियां अपने-अपने कार्यक्षेत्र के कृषकों को सदस्य बनाकर आच्छादित करते हुए उन्हें कृषि निवेशों की आपूर्ति करती है। इस प्रकार पूरे प्रदेश के कृषक सदस्य सहकारी क्षेत्र से जुड़ जाते है। पैक्स के अतिरिक्त अन्य सभी सहकारी संस्थाओं द्वारा कृषि निवेशों की बिक्री केवल नगद आधार पर की जाती है। सहकारी संस्थाओं द्वारा कृषकों को वितरित किये जाने वाले कृषि निवेशों का मदवार विवरण निम्न प्रकार है:-

4- रासायनिक उर्वरक- प्रदेश के सहकारी क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति मुख्य रूप से सहकारी क्षेत्र की खाद उत्पादक सहकारी संस्थायें इफको एवं कृभकों से प्राप्त होती है, इफको एवं कृभकों द्वारा उत्पादित खाद रेल तथा सड़क मार्ग द्वारा जनपद स्तर पर उपलब्ध करायी जाती है, जहां से उर्वरक परिवहन कार्य हेतु अधिकृत सहकारी संस्था उर्वरकों का भण्डारण बफर गोदाम में करते हुए इफको एवं कृभकों द्वारा जारी निर्गत आदेश के आधार पर जनपद की विभिन्न सहकारी समितियों पर आपूर्ति सुलभ कराती है।

(4)1- गत वर्षों की प्रगति
सहकारिता विभाग द्वारा इस दशक के प्रारम्भ से वितरित किये गये रासायनिक उर्वरकों के विवरण की अद्यावधिक स्थिति निम्न प्रकार है:-

(मात्रा मै० टन में)

क्र०

वर्ष यूरिया डी०ए०पी० एन०पी०के० एम०ओ०पी० योग
1 2010-11 2090831 916113 645156 2570 3654670
2 2011-12 2128769 560033 729759 1055 3419616
3 2012-13 2277172 794869 432102 751 3504894
4 2013-14 2516212 869246 294932 983 3681373
5 2014-15 2360588 915918 317106 1021 3594633

प्रदेश में विभिन्न एजेन्सियों तथा निजी क्षेत्रों द्वारा विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों के कुल उर्वरक वितरण के आंकड़ों में सहकारिता विभाग द्वारा की गयी पूर्ति का विगत 04 वर्षों का वितरण अधोलिखित है :-

 सहकारिता विभाग रासायनिक उर्वरकों के वितरण में वर्ष प्रतिवर्ष महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है, सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश के कुल उर्वरक वितरण में अभी तक लगभग 40 प्रतिशत तक की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

(4)2- उर्वरकों का संतुलित प्रयोग
रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भूमि को एन०पी०के० पृथक-पृथक तत्व प्राप्त होते हैं। तत्व के रूप में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग का अनुपात 4 : 2 : 1 निर्धारित है। रासायनिक उर्वरकों में निम्नानुसार तत्व पाये जाते है।

क्र० नाम उर्वरक मात्रा एन पी के
1 यूरिया 50 कि०ग्रा० 46% - -
2 डीएपी 50 कि०ग्रा० 18% 46% -
3 एनपीके । 50 कि०ग्रा० 12% 32% 16%
4 एनपीके ।। 50 कि०ग्रा० 10% 26% 26%
5 ए.पी.एस. 50 कि०ग्रा० 20% 20% 10%
6 एमओपी 50 कि०ग्रा० - - 60%
         

(4)3- आगामी योजना-
रासायनिक उर्वरकों के वितरण में सहकारी क्षेत्र की भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए आगामी पंचवर्षीय योजना में रासायनिक उर्वरकों के वितरण की वर्षवार योजना अधोलिखित है:-

(मात्रा लाख मै० टन में)
क्रमांक वर्ष मात्रा
1 2012-2013 41.73
2 2013-2014 43.69
3 2014-2015 50.78
4 2015-2016 40.75
5 2016-2017 39.40 (प्रस्तावित)

2- प्रमाणित बीज:-
प्रदेश के खाद्यान्न उत्पादन में प्रमाणित बीजों का भी अत्याधिक योगदान है। सहकारिता विभाग द्वारा खरीफ अभियान में धान, बाजरा, अरहर एवं सोयाबीन तथा रबी अभियान में लोकप्रिय विभिन्न प्रजातियों के गेहूँ, चना, मटर, मसूर एवं राई/सरसों के बीजों का वितरण निर्धारित समय सारिणी के अनुसार किया जाता है।

(2)1- प्रमाणित बीजों की प्राप्ति एवं वितरण का माध्यम:-
प्रमाणित बीजों की आपूर्ति  पी०सी०एफ० के माध्यम से करायी जाती है  पी०सी०एफ० के जनपद स्तरीय शाखाओं द्वारा समितियों / बिक्री केन्द्रों को वितरण हेतु समय से बीज उपलब्ध कराया जाता है। समितियों / बिक्री केन्द्रों द्वारा कृषक सदस्यों को ऋण एवं नकद बिक्री के आधार पर बीजों की बिक्री की जाती है।

(2)2- गत वर्षों की प्रगति
इस दशक के प्रारम्भ से खरीफ एवं रबी अभियान में प्रमाणित बीज वितरण की अद्यावधिक प्रगति अधोलिखित है:-

 
क्र० वर्ष खरीफ रबी योग
1 2011-12 15552 828798 844350
2 2012-13 14565 488525 503090
3 2013-14 12535 478153 490688
4 2014-15 14096 604573 618669
5 2015-16 5878 203587 209465

 

(2)3- प्रमाणित बीजों पर अनुदान व्यवस्था :-
खरीफ
में वितरण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित प्रमाणित बीजों पर अनुदान डी० बी० टी० योजनान्तर्गत सीधे क्रषको के खाते में उपलब्ध कराया जा रहा है

1- कृषि आपूर्ति व्यवस्था एवं उपयोग:-
 जिंक सल्फेट की आपूर्ति कृषकों को उनकी मांग के अनुरूप उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था है।  जिंक सल्फेट का प्रयोग आवश्यकता अनुसार खरीफ एवं रबी दोनों ही फसलों में किया जाता है।

3- कृषि निवेशों की आपूर्ति एवं फुटकर बिक्री दरें-
प्रदेश में सहकारिता विभाग में कृषि-निवेशों यथा रासायनिक उर्वरक, प्रमाणित बीज,  की सहकारी समितियों को आपूर्ति एवं कृषकों को फुटकर बिक्री की प्रचलित जारी सम्बंधित निर्गत परिपत्र विभागीय वैबसाइट पर उपलब्ध/अपलोड है दरे समय-समय पर परिवर्तनीय है।    

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